परिषदीय स्कूलों में फिर से यूनिफाॅर्म का रंग बदलने की तैयारी : नहीं मिलेगा जूता और स्वेटर

लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में फिर से यूनिफाॅर्म का रंग बदलने की तैयारी है। इस बार केवल छात्राओं के यूनिफाॅर्म का रंग बदला जाएगा। कुर्ता तो खाकी ही रहेगा लेकिन सलवार का रंग सफेद करने पर विचार हो रहा है। अभी कुर्ता और सलवार दोनों का रंग खाकी है। इसके अलावा यह भी तैयारी है कि इस बार अगस्त से यूनिफाॅर्म बांटने की प्रक्रिया शुरू कर अक्तूबर तक समाप्त कर दी जाए। यूनिफाॅर्म की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। छात्र-छात्राओं की नाप का यूनिफाॅर्म सिलवा कर बांटा जाएगा।
 
बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मुफ्त यूनिफाॅर्म देने की व्यवस्था है। प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद अखिलेश सरकार ने पहली बार 2013 में यूनिफाॅर्म का रंग बदला था। पहले छात्रों को आसमानी रंग की शर्ट और नीले रंग की नेकर व छात्राओं को आसमानी रंग की शर्ट तथा नीले रंग की स्कर्ट या आसमानी कुर्ता एवं नीले रंग की सलवार दी जा रही थी। अखिलेश सरकार ने इसे बदलकर खाकी कर दिया। इसे बदलने का चाहे जो भी मकसद रहा हो पर चर्चा यह रही कि बसपा के झंडे का रंग नीला है इसलिए इसे बदला गया है।
 
राज्य सरकार ने 2013 में आनन-फानन में यूनिफाॅर्म का रंग तो बदल दिया, लेकिन ऐसा रंग कर दिया जो देखने में अच्छा नहीं लग रहा है। इसलिए छात्राओं के यूनिफाॅर्म का रंग बदलने पर विचार किया जा रहा है। छात्राओं के स्कर्ट और सलवार का रंग सफेद करने पर विचार किया जा रहा है। सर्व शिक्षा अभियान इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी को भेजेगा। उनकी सहमति के बाद ही इस पर निर्णय किया जाएगा। इस बार यूनिफाॅर्म को बांटने से पहले छात्रों व छात्राओं की नाप ली जाएगी और अगस्त से ही बांटने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

खबर साभार : अमर उजाला


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परिषदीय स्कूलों में फिर से यूनिफाॅर्म का रंग बदलने की तैयारी : नहीं मिलेगा जूता और स्वेटर Reviewed by प्रवीण त्रिवेदी on 5:43 AM Rating: 5

1 comment:

Unknown said...

बीटीसी कॉलेजों में अधिक फीस वसूली की जांच शुरू
लखनऊ। निजी कॉलेजों में बीटीसी कोर्स के नाम पर अधिक फीस की वसूली की जांच को सीटीई प्राचार्य मुमताज जहां की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बना दी गई है। कमेटी ने जांच शुरू भी कर दी है और एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) निदेशक को देगी। निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को आदेश जारी कर दिया है। उन्होंने जांच के आदेश तो फतेहपुर में अधिक फीस वसूली की शिकायत के मामले में दी है, लेकिन कहा है कि जहां भी जानकारी मिले इसकी जांच करा ली जाए।
सूबे में डायट के साथ निजी बीटीसी कॉलेजों में भी कोर्स चलाने की अनुमति दी गई है। प्रदेश में मौजूदा समय 701 कॉलेज हैं। प्रत्येक कॉलेजों में 50-50 बीटीसी की सीटें हैं। बीटीसी में प्रवेश के लिए टॉप मेरिट पर आने वालों को डायट में दाखिला दिया जाता है। इसके बाद कम मेरिट वालों को निजी कॉलेजों में दाखिला देने की व्यवस्था है।
निजी कॉलेजों में फ्री सीट की फीस 22,000 और पेड सीट की 44,000 रुपये है। इसके बाद भी कॉलेज प्रबंधन दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं से अधिक वसूली कर रहे हैं। सर्वाधिक शिकायतें फतेहपुर से मिली थीं। इसके आधार पर एससीईआरटी निदेशक ने सीटीई प्राचार्य की अध्यक्षता में कमेटी बना दी है।
इसमें फतेहपुर के डायट प्राचार्य राजेंद्र प्रताप व वहीं के डीआईओएस रफीक को सदस्य बनाया गया है। कमेटी जांच कर अपनी रिपोर्ट निदेशक एससीईआरटी को देगी। दोषी मिलने वाले कॉलेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
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