सम्मान के साथ शिक्षकों को मिली नसीहत इनाम में, राज्य अध्यापक पुरस्कार 2015 व विद्यालय पुरस्कार वितरण समारोह में  आत्ममंथन के साथ सुनाई खरी खरी बातें

सभी का सीबीएसई बोर्ड की ओर भागना शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय : बलराम

अभिभावकों का भरोसा तोड़ा तो होगा समाज से विश्वासघात : अहमद हसन

लखनऊ : अध्यापन में उत्कृष्टता के लिए सोमवार को प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के नौ और परिषदीय स्कूलों के 17 शिक्षकों को वर्ष 2015 के राज्य अध्यापक पुरस्कार से नवाजा गया। गन्ना संस्थान सभागार में आयोजित समारोह में माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव और बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन ने शिक्षकों को सम्मानित किया। चुने गए एक-एक सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों को भी पुरस्कृत किया गया। सम्मानित शिक्षकों को दस हजार रुपये की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र दिया गया। 


शिक्षकों को सम्मानित करने से पहले बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह अध्यापकों को खरी-खोटी सुनाने का मौका नहीं है। लेकिन यह कहने से नहीं चूके कि गरीब, बेसहारा लोग जिन उम्मीदों से अपने बच्चों को आपके हवाले करते हैं, यदि आपने उनके भरोसे को तोड़ा तो समाज के साथ इससे बड़ा कोई विश्वासघात नहीं होगा। शिक्षक अपने पेशे की गरिमा को महसूस नहीं करते। इस पर भी आत्ममंथन करने को कहा कि निजी स्कूलों के शिक्षक कम वेतन, कम शैक्षिक योग्यता व अनुभव के बावजूद सरकारी स्कूलों से बेहतर परिणाम दे रहे हैं। चेताया भी कि खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ साठगांठ कर स्कूल न जाने वाले शिक्षकों को वह गांव में जाकर दुरुस्त भी करेंगे। कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी अब स्कूलों के ज्यादा दौरे करेंगे। 


माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव ने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर समाज तो अंगुली उठा ही रहा था, अब हाई कोर्ट ने भी निर्देशात्मक आदेश दिया है कि जब तक राजनेताओं, नौकरशाहों और जनप्रतिनिधियों के बच्चे परिषदीय स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, उनकी हालत सुधरने वाली नहीं। आज आप-हम तो क्या, गरीब आदमी भी सीबीएसई बोर्ड की तरफ भाग रहा है। यह बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों के लिए बड़ी चुनौती है। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री वसीम अहमद ने कहा कि जब बच्चे किताब में लिखा नहीं पढ़ पाएंगे तो शिक्षकों का सम्मान कैसे बचेगा। 


समारोह को सचिव बेसिक शिक्षा अजय कुमार सिंह, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह, निदेशक माध्यमिक शिक्षा अमरनाथ वर्मा, निदेशक बेसिक शिक्षा डीबी शर्मा और निदेशक साक्षरता अवध नरेश शर्मा ने भी संबोधित किया। 


माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री की खरी-खरी: माध्यमिक शिक्षा मंत्री विजय बहादुर पाल ने अपने चिरपरिचित अंदाज में खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस राष्ट्रीय पर्व का दर्जा नहीं हासिल कर पाया। तहसील दिवस की तरह इसे सभी तहसीलों, थानों में जनता की मौजूदगी में मनाना चाहिए। शिक्षकों को यह भय भी दिखाया कि यदि उन्होंने दूसरे के बच्चों को अपना समझ कर जतन से नहीं पढ़ाया तो उनके सिर पर पाप की गठरी फूटेगी। यह भी बोले कि जब तक शिक्षक भूखा है, ज्ञान का सागर सूखा है। 


यूपी बोर्ड मेधावियों को पंचानन राय पुरस्कार : इस मौके पर वर्ष 2016 की यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा के टॉपर्स को पंचानन राय स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हाईस्कूल परीक्षा के लिए सौम्या पटेल व अनुपम सिंह और इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए साक्षी वर्मा, अभय बंसल व हिमांशु प्रताप सिंह को 10-10 हजार रुपये की राशि प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। 


सोमवार को गन्ना संस्थान सभागार में शिक्षक दिवस पर राज्य अध्यापक पुरस्कार-अलंकरण समारोह में सम्मानित होने वाले शिक्षक और साथ में मंत्री बेसिक शिक्षा अहमद हसन और मंत्री माध्यमिक शिक्षा एवं अन्य।शिक्षा में अभिनव प्रयोग करने, पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यालय की भौतिक स्थिति सुधारने के लिए विद्यालय पुरस्कार योजना के तहत प्रत्येक जिले से चुने गए एक सर्वश्रेष्ठ परिषदीय विद्यालय को 1.2 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया। 

सम्मान के साथ शिक्षकों को मिली नसीहत इनाम में, राज्य अध्यापक पुरस्कार 2015 व विद्यालय पुरस्कार वितरण समारोह में  आत्ममंथन के साथ सुनाई खरी खरी बातें Reviewed by Praveen Trivedi on 7:19 AM Rating: 5

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