राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों का होगा विशेष ऑडिट, मुख्य सचिव ने महालेखाकार को भेजा पत्र, जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय’ के नाम से जाने जाएंगे

लखनऊ : राज्य सरकार ने समाज कल्याण और जनजाति विकास विभागों द्वारा संचालित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों को पिछले पांच वर्षो के दौरान जारी किये गए बजट और उनके खचरें का विशेष ऑडिट कराने का फैसला किया है।


प्रदेश के 60 जिलों में समाज कल्याण विभाग के अधीन 93 और जनजाति विकास विभाग द्वारा संचालित नौ राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय हैं। प्रदेश के 102 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में से 100 संचालित और दो निर्माणाधीन हैं। इन आवासीय विद्यालयों में गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई के लिए दाखिला दिया जाता है। पढ़ाई-लिखाई, रहन-सहन और खानपान पर होने वाला पूरा खर्च सरकार वहन करती है।


कक्षा एक से 12 तक संचालित आश्रम पद्धति विद्यालय पहले यूपी बोर्ड से संबद्ध हुआ करते थे लेकिन राज्य सरकार ने अब इन्हें नवोदय विद्यालय की तर्ज पर छठवीं से बारहवीं कक्षा तक संचालित करने का फैसला किया है। मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित 85 और जनजाति विकास विभाग के नौ राजकीय आश्रम पद्धति आवासीय विद्यालयों के साथ ही दोनों एकलव्य मॉडल स्कूलों का विशेष ऑडिट कराने के लिए महालेखाकार को पत्र भेजा है।


जय प्रकाश नारायण के नाम से हुआ नामकरण :
अखिलेश सरकार ने समाज कल्याण और जनजाति विकास विभागों द्वारा संचालित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय का नामकरण संपूर्ण क्रांति के प्रणोता जय प्रकाश नारायण के नाम पर कर दिया है। अब इन विद्यालयों को ‘जय प्रकाश नारायण सर्वोदय  विद्यालय’ के नाम से जाना जाएगा।

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