नए सत्र में भी दो करोड़ बच्चों को देर से मिलेंगी किताबें, किताबें छापने के लिए अब तक नहीं शुरू हुई प्रक्रिया, शासन के आदेश के इंतजार में पाठ्य पुस्तक कार्यालय

⚫  नई पॉलिसी को लेकर हुआ था विवाद, एक महीने पहले भेजा प्रस्ताव अब तक आदेश नहीं

लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले दो करोड़ बच्चों को अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र में समय से किताबें मिलना मुश्किल होगा। इसकी वजह अब तक किताबें छापने की प्रक्रिया शुरू न होना है। यह स्थिति तब है जबकि हाईकोर्ट ने वर्तमान शैक्षिक सत्र में किताबें समय से न दिए जाने पर विभाग के अफसरों को कड़ी फटकार लगाई थी। साथ ही पूछा था कि नए शैक्षिक सत्र में बच्चों को किताबें देने की क्या तैयारी है। इस मामले में अब तक विभाग शासन का आदेश जारी होने का इंतजार कर रहा है।



सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों, राजकीय, सहायता प्राप्त एवं मदरसा आदि में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के करीब दो करोड़ बच्चों को निशुल्क किताबें उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। पिछले वर्ष तक किताबें छपवाने की प्रक्रिया फरवरी-मार्च में शुरू हो जाती थी, जिससे जून तक किताबें स्कूलों में भेज दी जाती थीं। लेकिन 2016 सत्र में किताबें बांटने की प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर गई। स्थिति यह रही कि अप्रैल में बांटी जाने वाली किताबें बच्चों को अक्टूबर में दी गईं। इस मामले में एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई, जिस पर कोर्ट ने विभाग के अफसरों पर कड़ी नाराजगी जताई थी।



किताबों में लगाए जाने वाले कवर एवं अंदर के पन्नों की क्वालिटी बहुत अच्छी नहीं थी। जो किताबें छापी जाती थीं, वह 70 जीएसएम पर इको फ्रेंडली रिसाईिकल्ड कागज पर थीं। शैक्षिक सत्र 2016-17 में दी जाने वाली किताबों के अंदर के पन्नों में कागज में बदलाव के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई। लेकिन नए कागज की पॉलिसी के खिलाफ मामला कोर्ट चला गया। जिसके बाद किताबें छापने की प्रक्रिया अधर में अटक गई। बीते 31 मई को कोर्ट से आदेश होने के बाद अफसरों ने किताबें छापने की प्रक्रिया फिर शुरू की थी।



पिछले साल मामला कोर्ट में होने की वजह से किताबें छापने और वितरण की प्रक्रिया लेट हो गई थी। इस बार किताबों की प्रक्रिया शुरू करने के लिए शासन को एक महीने पहले प्रस्ताव भेज दिया गया है। वहां से मुद्रण आदेश आने के बाद प्रक्रिया शुरू होगी। - अमरेंद्र सिंह, पाठ्य पुस्तक अधिकारी उप्र


सूबे के परिषदीय, राजकीय, सहायता प्राप्प्त एवं मदरसा आदि में करीब दो करोड़ बच्चों के लिए 12 करोड़ किताबें छानी जानी है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से पिछले वर्ष 22 प्रकाशक तय किए गए थे। इस वर्ष शैक्षिक सत्र 2017 के लिए किताबें छपाई की प्रक्रिया शुरू करने के संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग ने शासन को एक महीने पहले प्रस्ताव भेजा था। विभाग के जिम्मेदारों की मानें तो अब तक शासन ने इसका कोई आदेश नहीं जारी किया है। जबकि इतने बड़े पैमाने पर किताबें छापने से लेकर उन्हें जिलों में भेजने तक करीब तीन महीने का समय लगता है।

नए सत्र में भी दो करोड़ बच्चों को देर से मिलेंगी किताबें, किताबें छापने के लिए अब तक नहीं शुरू हुई प्रक्रिया, शासन के आदेश के इंतजार में पाठ्य पुस्तक कार्यालय Reviewed by Praveen Trivedi on 8:29 AM Rating: 5

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