मिड-डे-मील में अब अनिवार्य रूप से देना होगा हफ्ते में एक दिन दूध व फल, वितरण न होने की जानकारी पर शासन ने दिए आदेश

लखनऊ । बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रखने के लिए भले ही राज्य सरकार ने मिड-डे-मील में प्रत्येक बुधवार को गरम दूध बांटना अनिवार्य किया हो। लेकिन परिषदीय विद्यालयों से लेकर राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में ज्यादातर एनजीओ दूध नहीं बांट रहे। स्थिति यह है कि पिछले कई महीनों से बच्चों को मिड-डे-मील में दूध नहीं दिया जा रहा।


मामले की जानकारी शासन में आने के बाद विशेष सचिव देव प्रताप सिंह ने मध्यान्ह भोजन प्रााधिकरण के निदेशक को पत्र लिखकर सप्ताह में एक दिन अनिवार्य रूप से गरम दूध व फल वितरण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों के साथ-साथ माध्यमिक विद्यालयों और मदरसा आदि के कक्षा आठ तक के विद्यालयों में बच्चों को मिड-डे-मील देने की व्यवस्था है।


राजधानी के करीब दो लाख 38 हजार बच्चों को भी यह सुविधा दी जाती है। जुलाई 2015 में राज्य सरकार ने मिड-डे-मील के मेन्यू में परिवर्तन करके सप्ताह में एक दिन बच्चों को 200 मिली गरम दूध देने का प्रावधान किया। काकोरी, सरोजनी नगर, चिनहट, मोहनलालगंज के साथ ही नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में अक्षय पात्र फाउंडेशन को मिड-डे-मील की जिम्मेदारी सौंपी गई। जबकि नगर क्षेत्र के माध्यमिक एवं बेसिक एडेड स्कूलों से सम्बद्ध कक्षा आठ तक के विद्यालयों में स्वयं सेवी संस्थाओं को जिम्मेदारी दी गई। वहीं माल, महिलाबाद, गोसाईंगंज और बीकेटी में ग्राम प्रधान के सहयोग से मिड-डे-मील दिए जाने का प्रावधान किया गया। लेकिन कुछ सप्ताह में ही एनजीओ ने हाथ खड़े कर दिए।


पैसा बढ़ गया, फिर भी नहीं बांटा दूध: मिड-डे-मील में दूध का आदेश जारी होने के बाद एनजीओ संचालकों का तर्क था कि पैसा बहुत कम है। ऐसे में दूध नहीं बांटा जा सकता। इस पर शासन ने मिड-डे-मील के लिए प्राइमरी स्तर पर प्रति छात्र 4 रुपए 13 पैसे तथा जूनियर में प्रति छात्र 6 रुपए 18 पैसे का प्रावधान कर दिया। बावजूद इसके दूध का वितरण नहीं शुरू किया गया। हालांकि विभाग का कहना है कि अक्षय पात्र दूध की जगह खीर बांट रहा है।



एनजीओ को नहीं मिली अनुमति, खीर देने का दावा: राजधानी के सहायता प्राप्त माध्यमिक व बेसिक स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मिड-डे-मील देने की जिम्मेदारी सात एनजीओ की है। पिछले काफी समय से एनजीओ द्वारा दूध न देने की बात सामने आई है। हालांकि एनजीओ का दावा है कि वे खीर बांट रहे हैं। लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली है।

सप्ताह में एक बार बच्चों को दूध व फल वितरण के आदेश दिए गए थे। लेकिन वितरण की कार्रवाई निर्धारित मेन्यू के अनुसार सुनिश्चित नहीं की जा रही। इसलिए माध्यान्ह भोजन प्राधिकरण के निदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि वितरण व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। - देव प्रताप सिंह, विशेष सचिव, शासन

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