गांवों के बच्चे अंग्रेजी और गणित में आगे बढ़ रहे, ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों का सरकारी स्कूल छोड़ निजी स्कूलों में पलायन भी काफी हद तक रुका

गांवों के बच्चे अंग्रेजी और गणित में आगे बढ़ रहे, ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों का सरकारी स्कूल छोड़ निजी स्कूलों में पलायन भी काफी हद तक रुका

छोटी कक्षाओं की अंग्रेजी में सुधार

नईदिल्ली  : देश में ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों के गणित और अंग्रेजी सीखने में सुधार आया है। साथ ही बच्चों में किताबें पढ़ने की क्षमता भी बढ़ रही है। दूसरे, सरकारी स्कूल छोड़कर निजी स्कूलों में पलायन भी काफी हद तक रुका है।

गैर सरकारी संगठन प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा को लेकर अध्ययन रिपोर्ट ‘असर’ बुधवार को जारी की गई है। यह 11वीं असर रिपोर्ट है जिसमें प्राथमिक शिक्षा में कुछ सकारात्मक बदलाव होता हुआ नजर आ रहा है।


गणित में कौशल बढ़ा: सबसे बड़ा बदलाव गणित पढ़ने को लेकर है। प्राइमरी स्कूलों के बच्चों में गणित सीखने की प्रवृत्ति में इजाफा देखा गया है। 2014 में कक्षा तीन के 25.45 बच्चे ही दो अंकों के घटाने के सवाल को हल कर पाते थे, लेकिन अब यह प्रतिशत 27.7 हो गया है। सरकारी स्कूलों के बच्चों की बात करें तो यह 17.2 से बढ़कर 20.2} हो गया है।

सभी राज्यों में हो रहा सुधार : करीब-करीब सभी राज्यों में बच्चों का गणित सुधर रहा है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में इसमें पांच अंकों या इससे ज्यादा की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। पांचवीं के बच्चों के गणित को समझने की दर पहले जैसी यानी 26 फीसदी रही है, लेकिन पांच राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा ओडिशा में इसमें पांच अंकों की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं कक्षा आठ के विद्यार्थियों के लिए गणित अभी भी कठिन बना हुआ है।

कक्षा तीन के बच्चों में अंग्रेजी पढ़ने में सुधार हुआ है। कक्षा तीन के 32} बच्चे अंग्रेजी पढ़ पा रहे हैं। पहले यह दर 28.5} थी, लेकिन कक्षा पांच में अंग्रेजी में सुधार सिर्फ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और केरल के बच्चों में ही दिखा है। जहां ऐसे बच्चों की संख्या में पांच अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन कक्षा आठवीं में इसमें गिरावट दिख रही है।

यह एक अच्छा संकेत है कि अब छोटी कक्षाओं में बच्चों के सीखने की प्रवृत्ति सुधरती नजर आ रही है। यह शुरुआत है, इसमें और काम किए जाने की जरूरत है। -रुकमणि बनर्जी, सीईओ प्रथम फाउंडेशन

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