नामांकन व उपस्थिति में फिसड्डी हुए स्कूल, गर्मी के साथ साथ, कॉपी-किताब, बैग, ड्रेस जैसा तोहफा जल्द मिलने की उम्मीद न होने से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति लड़खड़ाई

इलाहाबाद :  नए शैक्षिक सत्र का प्राथमिक विद्यालयों में धीरे-धीरे एक माह पूरा होने वाला है, लेकिन स्कूलों में छात्र-छात्रओं की संख्या बढ़ने का नाम ही नहीं ले रही है। शिक्षक स्कूल समयावधि में मुट्ठीभर बच्चों को बैठाए रहते हैं। कॉपी-किताब, बैग, ड्रेस जैसा तोहफा जल्द मिलने की उम्मीद भी नहीं है, ऊपर से बरस रही आग बच्चों के मन में स्कूल का आकर्षण पैदा नहीं कर पा रही है।



बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ऐसा ही नजारा इन दिनों दिख रहा है। अफसरों ने सत्र का श्रीगणोश करा दिया है, शैक्षिक कैलेंडर स्कूलों में भेजा जा चुका है और पुरानी किताबों से पढ़ाने का फरमान भी जारी हुआ है। साथ ही नई सरकार की सख्ती पर खंड शिक्षा अधिकारियों से माह में दो बार निरीक्षण रिपोर्ट भी मांगी जा रही है। ऐसे में अफसरों की चहलकदमी जरूर बढ़ी है। साथ ही बड़े अधिकारी भी स्कूलों का दौरा कर रहे हैं। इसमें छात्रों की संख्या को लेकर सभी परेशान हैं। ज्यादातर स्कूलों में जितने बच्चों का नामांकन है उसका एक चौथाई ही मौके पर मिल रहे हैं।




कई जगहों पर स्कूल खुलने और बंद होने का समय अब भी शिक्षक की मनमर्जी के मुताबिक ही मिला है। अफसर लगातार अधिक बच्चों का नामांकन कराने और उन्हें जैसे-तैसे भी स्कूल में रोकने का निर्देश दे रहे हैं। यह हाल तब है जब पिछली कक्षा के बच्चों का अगली कक्षा में अपने आप दाखिला हो गया है। साथ ही छह से 14 वर्ष तक के छूटे हुए यानी स्कूल न जाने वाले बच्चों का नामांकन कराने के लिए अभियान चलाने के निर्देश हैं। शिक्षकों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण तक दिया गया है, लेकिन राज्य परियोजना कार्यालय को इसकी रिपोर्ट ही भेजी जा रही है। असल में विशेष प्रशिक्षण आदि कागजों पर हो गया है इसीलिए उसका असर धरातल पर नहीं दिख रहा है।




निरीक्षण पर आने वाले अफसर व खंड शिक्षा अधिकारी शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार छात्र-छात्रओं से सवाल भी कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश स्कूलों में अभी शिक्षण कार्य शुरू ही नहीं हो सका है। इसकी वजह छात्रों की संख्या बहुत कम होना भी है। कम छात्र संख्या को विभागीय बड़े अफसर भी स्वीकार रहे हैं इसीलिए प्राथमिक स्कूलों के बच्चों का आधार कार्ड बनवाने के लिए बेसिक शिक्षा सचिव ने निर्देश दिया है कि जिस स्कूल में यह टीम जाए वहां कम से कम 50 बच्चे जरूर मौजूद हों। साफ है कि स्कूलों में उपस्थिति बेहद कम है। परिषद मुख्यालय के अफसर कहते हैं कि स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता तभी दुरुस्त होगी, जब नियमित निरीक्षण होंगे और वह स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बनवाएंगे।

नामांकन व उपस्थिति में फिसड्डी हुए स्कूल, गर्मी के साथ साथ, कॉपी-किताब, बैग, ड्रेस जैसा तोहफा जल्द मिलने की उम्मीद न होने से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति लड़खड़ाई Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 1 on 7:07 AM Rating: 5

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