खराब नहीं हैं सरकारी स्कूल : बोले मानव संसाधन विकास मंत्री जावड़ेकर, अध्यापकों की जवाबदेही व शिक्षा के परिणामों पर देना होगा ध्यान


केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने एक फार्मेट तैयार किया है। जिसमें तय किया गया है कि क्लास के हिसाब से बच्चे को क्या-क्या सीखना चाहिए। नए सत्र में सभी स्कूलों की दीवारों पर यह लर्निंग आउटकम लगाए जाएंगे। जिससे अभिभावकों और छात्रों को भी यह पता रहे कि उन्हें क्या सिखाया जाएगा। सीएमएस में हुए समारोह की अध्यक्षता प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने की। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल, राज्यमंत्री संदीप सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, स्कूल के संस्थापक प्रबंधक डॉ. जगदीश गांधी, डॉ. भारती गांधी सहित शिक्षक व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



नकल रोकना बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में बोर्ड परीक्षा के दौरान होने वाली नकल के मामले में भी मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने चिंता जताई। कहा कि नकल कारोबार यहां की शिक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इस पर नकेल कसने के लिए सरकार ने काम शुरू कर दिया है। लेकिन अभिभावकों को भी आगे आना होगा। उन्होंने अभिभावकों से अपील की वह बच्चों को पास कराने के लिए नकल का रास्ता न दिखाएं, बल्कि हर रोज एक घंटा पढ़ने के लिए कहें। यह बच्चों के लिए ज्यादा अच्छा रहेगा। कार्यक्रम में ‘हाउ टु इम्प्रूव द क्वालिटी ऑफ एजूकेशन इन इंडिया’ विषय पर विश्व संसद का प्रस्तुतिकरण कर आरटीई के तहत निजी स्कूलों की निशुल्क सीट पर दाखिले लेने वाले छात्रों का मुद्दा उठाया। इस दौरान आरटीई में होने वाले दाखिलों की शुल्क प्रतिपूर्ति में वाउचर सिस्टम लागू करने की वकालत की गई।




लखनऊ। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने साफ कहा है कि हमारे सरकारी स्कूल खराब नहीं हैं। जरूरत सिर्फ शिक्षकों पर जमी धूल झाड़ने की है। सरकारी व प्राइवेट दोनों स्कूलों को अध्यापकों की जवाबदेही व शिक्षा के परिणामों पर ध्यान देना होगा। बच्चों को प्रत्येक कक्षा के अनुसार लिखना पढ़ना आना चाहिए। इसके लिए अध्यापकों की ट्रेनिंग की जरूरी है। श्री जावडे़कर सोमवार को सीएमएस गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) ऑडिटोरियम में ‘न्यू मॉडल ऑफ एजूकेशन फॉर ट्वेन्टी फर्स्ट सेन्चुरी’ विषयक शिक्षक सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने ‘सबको शिक्षा अच्छी शिक्षा’ का नारा भी दिया। साथ ही सीएमएस के शिक्षकों को सम्मानित भी किया।




सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति पर लगातर उठाए जा रहे प्रश्नों पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में कोई खराबी नहीं है। सरकारी स्कूलों का स्तर सुधारने के लिए अभिभावकों को सिर्फ तीन काम करने होंगे। पहला काम,‘बच्चे से रोज पूछना है कि शिक्षक आए की नहीं’। दूसरा काम-‘रोज पूछिए कि आज क्या पढ़ाया’ और तीसरा काम-‘अपने सामने एक घंटा छात्र को बैठाकर कहें कि पढ़ना ही है’। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजधानी के महापौर के पद पर उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने नगर निगम के विद्यालयों के लिए काम किया। शिक्षकों की भर्ती से लेकर उन्हें प्रशिक्षण भी दिया। जिसकी वजह से इन स्कूलों की स्थिति में सुधार आया है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय विद्यालय गुणवत्ता में रोल मॉडल हैं। पिछले साल जवाहर नवोदय स्कूल में पढ़ने वाले सात हजार छात्र-छात्राएं जेईई मेन्स में शामिल हुए। 3500 ने सफलताा भी हासिल की। इनमें 700 को आईआईटी में दाखिला भी मिल गया। यह बड़ी उपलब्धि है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छात्र को बनाने में सबसे बड़ी भूमिका शिक्षक की है। प्रकृति ने हर बच्चों को रचनात्मकता दी है। उसमें मजहब, जाति और किसी आधार पर नहीं होता। हर बच्चे में कुछ न कुछ खास होता है। उसकी पहचान करना ही शिक्षक की कला है।

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