‘किताबों के टेंडर में फर्जीवाड़े के जरिये करोड़ों का खेल’ : यूपी बेसिक एजुकेशन प्रिंटर्स असोसिएशन ने लगाए आरोप

यूपी बेसिक एजुकेशन प्रिंटर्स असोसिएशन ने एक से आठवीं तक के छात्रों की किताबों के लिए हुए टेंडर में फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। 



प्रिंटर्स असोसिएशन गुरुवार को प्रेस क्लब में एक वार्ता के दौरान आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर एक कंपनी को करोड़ों रुपये का टेंडर दे दिया गया, जबकि उसकी छवि पहले से ही खराब है। असोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र जैन ने मांग की है कि दोबारा से टेंडर करवाया जाए और दागी कंपनियों को बाहर किया जाए। इस संबंध में असोसिएशन ने हाई कोर्ट में रिट भी दायर की है, जिसपर कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है। 



इलाहाबाद के डीएम ने की थी ब्लैकलिस्ट की सिफारिश
इलाहाबाद के डीएम ने मार्च में ही इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की थी। इसके अलवा अन्य जिलों के डीएम ने भी पत्र लिखा था, लेकिन कार्रवाई की बजाय उसी कंपनी को टेंडर दे दिया गया।



डायरेक्टर ने भी उठाए थे सवाल
असोसिएशन ने बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम की 9 मई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि डायरेक्टर ने खुद ही इस कंपनी पर सवाल खड़े किए थे। डायरेक्टर ने पत्र में कहा था कि कंपनी की ओर बिड सबसे कम है, फिर भी इस बार लागत 55 करोड़ रुपये ज्यादा आ रही है, जबकि नियम और शर्तें पुरानी ही हैं। पिछली बार 22 कंपनियों ने काम किया था तो किताबें नवंबर तक बच्चों को मिली थीं। इस बार सिर्फ 13 कंपनियां ही हैं, ऐसे में किताबें और देर से मिलेंगी। इससे पहले तो 40 कंपनियों को यह जिम्मेदारी दी जाती थी। इसलिए किताबों का फिर से टेंडर करवाया जाए, जिससे ज्यादा कंपनियों को काम दिया जा सके।


इसके बाद संयुक्त सचिव निहालुद्दीन खां की ओर से 19 मई को पत्र जारी किया गया, जिसमें नए टेंडर की जगह नेगोशिएसन की बात थी। इसके बाद डायरेक्टर ने 23 मई को दूसरा पत्र जारी कर कंपनी की शर्तें मान लीं।

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