बाल अधिकारों के हनन पर आयोग कराएगा स्टडी, कस्तूरबा, नवोदय विद्यालय और आश्रमशाला में स्टडी का रहेगा फोकस


नई दिल्ली : देश में बाल अधिकारों की उच्च संस्था नैशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) स्कूलों में बाल अधिकारों का हनन रोकने के लिए स्टडी कराएगा। कमिशन के मुताबिक स्टडी के जरिए यह जानने की कोशिश की जाएगी कि कहां दिक्कत है और क्या कदम उठाकर बच्चों को स्कूल में सुरक्षित रख सकते हैं।




कमिशन मेंबर प्रियंक कानूनगो ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, नवोदय विद्यालय और आश्रमशाला में यह स्टडी फोकस रहेगी। जिसमें देखा जाएगा कि इन स्कूलों में वॉर्डन रखने की क्या प्रक्रिया है, वॉर्डन का चुनाव कैसे होता है, क्या वॉर्डन नियमित उपलब्ध रहते हैं और लड़कियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं। कानूनगो के मुताबिक स्टडी के आधार पर नियमों में बदलाव और जरूरी कदम उठाने का सुझाव दिया जा सकता है।






सूत्रों के मुताबिक कई स्कूलों से ऐसी शिकायतें आईं कि लड़कियों के हॉस्टल में पुरुष वॉर्डन हैं। जिस वजह से लड़कियां अपनी दिक्कतें बताने में भी झिझकती हैं। हाल ही में हरियाणा के एक नवोदय विद्यालय के छात्र की मौत के मामले में जब कमिशन ने जांच की तो पाया कि वहां टीचर को ही हाउस मास्टर का जिम्मा दिया गया था। कमिशन सूत्रों के मुताबिक आरटीई एक्ट के सेक्शन 27 के मुताबिक टीचर से टीचर की ही ड्यूटी ली जा सकती है। टीचर हाउस मास्टर की जिम्मेदारी निभाने के लिए ट्रेंड नहीं है। जिसके बाद कमिशन ने नवोदय विद्यालय समिति से पूछा भी कि ऐसा क्यों किया जा रहा है और क्या नियम हैं। कमिशन के मुताबिक टीचर से हाउस मास्टर की ड्यूटी कराना गलत है।




कई मामलों में कमिशन ने पाया कि पुलिस के साथ ही स्कूल में स्टूडेंट्स की जिम्मेदारी संभाल रहे लोग भी जेजे एक्ट को लेकर जागरूक नहीं हैं। जेजे एक्ट की पूरी जानकारी न होने की वजह से कई बार स्टाफ बच्चों के अधिकारों का भी हनन करता है साथ ही उनके साथ कुछ गलत होने की स्थिति में जरूरी कदम वक्त पर नहीं उठा पाता। स्टडी के जरिए इन कमियों की पूरी लिस्ट तैयार करेगा।

बाल अधिकारों के हनन पर आयोग कराएगा स्टडी, कस्तूरबा, नवोदय विद्यालय और आश्रमशाला में स्टडी का रहेगा फोकस Reviewed by Sona Trivedi on 7:42 AM Rating: 5

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