मिड-डे मील में फल बंद : रकम का भुगतान न होने के कारण संस्थाओं ने खींचा हाथ, फल वितरण न किए जाने का मौखिक फरमान भी जारी, जिम्मेदार कुछ भी बोलने से कर रहे इंकार

लखनऊ : सरकारी तंत्र की असफलता कहें या कुछ और। परिषदीय स्कूलों व मदरसों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन के साथ फल मिलना बंद हो गया है। अक्षय पात्र समेत अन्य स्वयं सेवी संस्थाओं ने भुगतान न होने के कारण फल वितरण करने से हाथ खींच लिया है।

परिषदीय, मदरसा समेत अन्य स्कूली बच्चों को फल वितरण के मकसद से शुरू की समाजवादी पौष्टिक आहार योजना अब सरकारी तंत्र को अखरने लगी है। स्वयंसेवी संस्थाओं की मानें तो फरवरी 2017 से सितंबर 2017 तक के बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी गई। साथ ही फल वितरण न किए जाने का मौखिक फरमान भी जारी कर दिया गया। स्वयंसेवी संस्थाओं के बिल भुगतान न होने का खामियाजा जिले के दो लाख नौ हजार बच्चों को उठाना पड़ रहा। इन्हें मिड डे मील के साथ मौसमी फल नहीं दिए जा रहे। ऐसे में इन्हें सिर्फ मध्यान्ह भोजन से ही संतोष करना होगा।

★ किन कारणों से बजट शून्य हुआ है। इसके बारे में टिप्पणी नहीं कर सकता। हालांकि मुख्यमंत्री की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया है।  - अमित कुमार श्रीवास्तव, वित्त नियंत्रक, मध्यांह भोजन प्राधिकरण।

बजट हुआ शून्य : संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारियों का कहना कि फल वितरण के लिए जारी बजट को शासन ने शून्य कर दिया है। इस वित्तीय वर्ष में भी दो सौ करोड़ रुपये शासन द्वारा स्वीकृत किये गये। मगर बाद में बजट को शून्य कर दिया गया। स्वयं प्राधिकरण के जिम्मेदार भी कुछ भी बोलने से किनारा काट रहे हैं।

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