संस्कृत दीपालय में प्रशिक्षित होंगे बेसिक और माध्यमिक शिक्षक, शिक्षक सीखेंगे संस्कृत, फिर बच्चों को सिखाएंगे

संस्कृत दीपालय में प्रशिक्षित होंगे बेसिक और माध्यमिक शिक्षक, प्रदेशभर में खुलेंगे दीपालय
पहल
इन बातों पर रहेगा जोर
ऐसे चलेंगी संस्कारशाला
संस्कारशाला में बच्चों को नैतिक मूल्य सिखाए जाएंगे। नाम, पता, पिता और माता का नाम, शरीर के अंगों के नाम, फल, रंग, गिनती आदि संस्कृत भाषा के जरिए सिखाई जाएगी। पढ़ने वाले बच्चों को नाश्ता भी दिया जाएगा।
गांव में चौपाल, ग्राम प्रधान के घर, कोई मंदिर परिसर या इच्छुक व्यक्ति के घर संस्कारशाला स्थापित होंगी। इसमें सिर्फ दो घंटे तक बच्चों को संस्कृत बोलना सिखाया जाएगा।• अनूप मिश्र, लखनऊ: बच्चों में संस्कृत भाषा के संस्कार विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान ने अपनी योजना को प्रभावी रूप देना शुरू कर दिया है। जल्दी ही उत्तर प्रदेश के सभी गांवों में छोटे-छोटे बच्चे भी संस्कृत में बोलना सीखेंगे। बच्चों को संस्कृत सिखाने की जिम्मेदारी गांव की 12वीं पास छात्राओं की होगी। इसके एवज में उन्हें तीन हजार रुपये धनराशि मानदेय के रूप में दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ वाचस्पति मिश्र ने बताया कि योजना के तहत प्रदेश में तहसील और गांव स्तर पर चुन्नू-मुन्नू संस्कारशालाएं खोली जाएंगी। संस्कारशाला में बच्चों को सिर्फ बुनियादी संस्कृत बोलना और लिखना सिखाया जाएगा। उन्हें संस्कृत सिखाने के लिए विडियो और चित्रकथाओं का उपयोग किया जाएगा। 12वीं छात्राओं को संस्कृत के शिक्षक ट्रेनिंग देंगे।

हमारा लक्ष्य बच्चों को संस्कृत बोलना और लिखना सिखाना है। ताकि युवाओं और बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास हो सके और वह अपनी संस्कृति को जान सकें। सरल संस्कृत संभाषण योजना के तहत बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों के हिन्दी और संस्कृत शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर सहयोग लिया जाएगा।

- डॉ. वाचस्पति मिश्र, अध्यक्ष, संस्कृत संस्थान
बोलचाल में शामिल करेंगे
संस्थान के अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र ने बताया कि प्रदेश में संस्कृत को बोलचाल में शामिल करने के लिए शिक्षकों को पारंगत किया जाएगा। इसके पहले चरण में लखनऊ में छह सौ शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।• एनबीटी लखनऊ

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की सरल संस्कृत योजना के तहत प्रदेश के हर जिले में संस्कृत दीपालय खोले जाएंगे। इसमें संस्कृत के शिक्षक बेसिक और माध्यमिक शिक्षकों को सरल संस्कृत संभाषण की ट्रेनिंग देंगे। यह शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में आठवीं के बच्चों को संस्कृत बोलना और लिखना सिखाएंगे। इतना ही नहीं प्रदेशभर के जिलों में प्रशिक्षित बच्चों की सरल संस्कृत संभाषण प्रतियोगिताएं होंगी।

यह पहले चरण में जिले स्तर पर होगी और जिले में चयनित बच्चों की फाइनल प्रतियोगिता मंडल स्तर पर होगी। इसके लिए प्रदेश को संस्थान ने छह संभागों में बांटा है। इसमें मेरठ, ब्रज, बुंदेलखंड, अवध, गोरखपुर, वाराणसी में क्षेत्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएं होंगी।

संस्कृत दीपालय में प्रशिक्षित होंगे बेसिक और माध्यमिक शिक्षक, शिक्षक सीखेंगे संस्कृत, फिर बच्चों को सिखाएंगे Reviewed by Ram Krishna mishra on 8:05 AM Rating: 5

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