शिक्षक भर्ती : बेसिक शिक्षा परिषद 1981 की नियमावली के अनुसार होगा चयन, सचिव बोले : 50 वर्ष तक के अभ्यर्थी प्रक्रिया का बनेंगे हिस्सा, विशिष्ट और उर्दू बीटीसी को मिलेगी नियुक्ति

आवेदन में मांगा गया था आधार नंबर परिषद सचिव संजय सिन्हा ने यह भी कहा है कि नियुक्ति के आवेदन में आधार नंबर इसलिए नहीं मांगा गया है, क्योंकि लिखित परीक्षा के आवेदन के समय लिया गया था, अब दूसरे पहचान के प्रमाण लिए जा रहे हैं, जो नियुक्ति में जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि लिखित परीक्षा के लिए आवेदन के बाद परीक्षा नियामक सचिव ने आवेदन में सुधार का मौका भी दिया था, उस समय सुधार न करके अब मांग करना जायज नहीं है, फिर भी विचार करेंगे।

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : परिषदीय स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती 2018 की लिखित परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच शुरू हो गई है। इसमें कॉपियों का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं हो रहा है, बल्कि मूल्यांकन के दौरान यदि किसी प्रश्न के उत्तर में भूलवश अंक नहीं दिए गए तो उसमें अभ्यर्थी को अंक जरूर मिलेंगे। इसके अलावा संबंधित उत्तर पुस्तिकाओं में दिए गए अंकों को नए सिरे से जोड़ा जाएगा। यदि मानवीय त्रुटि से अंक जोड़ने या दर्ज करने में कहीं भूल हुई है तो उसमें सुधार होगा।

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा 27 मई को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने कराई है। इसका परिणाम आने के बाद से तमाम अभ्यर्थी प्रत्यावेदन देकर दावा कर रहे थे कि उन्हें मिले अंक काफी कम है, उत्तर कुंजी और कार्बन कॉपी के आधार पर वह उत्तीर्ण प्रतिशत से अधिक अंक पा रहे हैं। परीक्षा नियामक सचिव ने इस आरोपों का संज्ञान लेकर मूल्यांकन कार्य की जांच कराने का आदेश जारी किया है। सचिव डा. सुत्ता सिंह ने स्पष्ट किया है इसमें केवल उन्हीं अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच होगी, जिन्होंने मिले अंकों से अधिक अंक पाने का दावा किया है और इसके लिए कार्यालय में प्रत्यावेदन प्राप्त कराया है। 30 अगस्त तक नए अभ्यर्थी भी ऐसा दावा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच होने का आशय कॉपियों का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं होना है, बल्कि मूल्यांकित कॉपियों में यह देखा जाएगा कि कहीं किसी प्रश्न में अंक देना छूट तो नहीं गया है और कुल अंकों को फिर से जोड़ा जाएगा। यदि प्रश्न मूल्यांकन से छूटे हैं तो अंक जरूर मिलेंगे और जोड़ गलत है तो उसे भी दुरुस्त किया जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी को सफलता प्रतिशत के तय अंक या उससे अधिक मिलते हैं तो नियमानुसार नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। सचिव ने कहा कि कॉपियों का मूल्यांकन शिक्षकों ने किया है उसमें मानवीय भूल हो सकती है लेकिन, मूल्यांकन सही तरीके से हुआ है। इसके बाद भी पारदर्शिता बनाए रखने को जांच करा रहे हैं, यदि अभ्यर्थियों का दावा सही निकलता है तो उन्हें लाभ देने में संस्था को कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ छिपाने की मंशा होती तो उत्तरकुंजी और कार्बन कॉपी न दी जाती।

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : परिषदीय स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती 2018 की लिखित परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच शुरू हो गई है। इसमें कॉपियों का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं हो रहा है, बल्कि मूल्यांकन के दौरान यदि किसी प्रश्न के उत्तर में भूलवश अंक नहीं दिए गए तो उसमें अभ्यर्थी को अंक जरूर मिलेंगे। इसके अलावा संबंधित उत्तर पुस्तिकाओं में दिए गए अंकों को नए सिरे से जोड़ा जाएगा। यदि मानवीय त्रुटि से अंक जोड़ने या दर्ज करने में कहीं भूल हुई है तो उसमें सुधार होगा।1बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा 27 मई को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने कराई है। इसका परिणाम आने के बाद से तमाम अभ्यर्थी प्रत्यावेदन देकर दावा कर रहे थे कि उन्हें मिले अंक काफी कम है, उत्तर कुंजी और कार्बन कॉपी के आधार पर वह उत्तीर्ण प्रतिशत से अधिक अंक पा रहे हैं। परीक्षा नियामक सचिव ने इस आरोपों का संज्ञान लेकर मूल्यांकन कार्य की जांच कराने का आदेश जारी किया है। सचिव डा. सुत्ता सिंह ने स्पष्ट किया है इसमें केवल उन्हीं अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच होगी, जिन्होंने मिले अंकों से अधिक अंक पाने का दावा किया है और इसके लिए कार्यालय में प्रत्यावेदन प्राप्त कराया है। 30 अगस्त तक नए अभ्यर्थी भी ऐसा दावा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच होने का आशय कॉपियों का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं होना है, बल्कि मूल्यांकित कॉपियों में यह देखा जाएगा कि कहीं किसी प्रश्न में अंक देना छूट तो नहीं गया है और कुल अंकों को फिर से जोड़ा जाएगा। यदि प्रश्न मूल्यांकन से छूटे हैं तो अंक जरूर मिलेंगे और जोड़ गलत है तो उसे भी दुरुस्त किया जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी को सफलता प्रतिशत के तय अंक या उससे अधिक मिलते हैं तो नियमानुसार नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। सचिव ने कहा कि कॉपियों का मूल्यांकन शिक्षकों ने किया है उसमें मानवीय भूल हो सकती है लेकिन, मूल्यांकन सही तरीके से हुआ है। इसके बाद भी पारदर्शिता बनाए रखने को जांच करा रहे हैं, यदि अभ्यर्थियों का दावा सही निकलता है तो उन्हें लाभ देने में संस्था को कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ छिपाने की मंशा होती तो उत्तरकुंजी और कार्बन कॉपी न दी जाती।

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्राथमिक स्कूलों की में विशिष्ट बीटीसी व उर्दू बीटीसी के अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट मिलेगी। दैनिक जागरण ने ‘आयु सीमा निर्धारण नहीं, 471 सफल अभ्यर्थी होंगे बाहर’ खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। इसका बेसिक शिक्षा परिषद सचिव संजय सिन्हा ने संज्ञान लिया और आश्वस्त किया है कि नियुक्ति में दोनों वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार लाभ दिया जाएगा। इसके लिए वह दुविधा में रहे, बल्कि नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन करें।

परिषदीय स्कूलों की 68500 सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा में प्रदेश भर के विशिष्ट बीटीसी व उर्दू बीटीसी के अभ्यर्थी भी शामिल हुए। 13 अगस्त को जारी रिजल्ट में 41556 सफल अभ्यर्थियों में विशिष्ट बीटीसी के 375 व उर्दू बीटीसी के 96 अभ्यर्थी भी हैं। अब नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं, इसमें इन दोनों वर्गो को आयु सीमा में छूट देने का स्पष्ट निर्देश नहीं रहा, जबकि भूतपूर्व सैनिक, शिक्षामित्र व दिव्यांग की ही आयु सीमा का निर्धारण किया गया है। यह खबर प्रकाशित होने पर सचिव ने नियुक्ति में आयु सीमा छूट देने का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि नियुक्ति के लिए उप्र बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में दिए गए प्रावधानों का अनुपालन हो रहा है। उसमें विशिष्ट बीटीसी व उर्दू बीटीसी के अभ्यर्थियों की आयु सीमा अधिकतम 50 वर्ष दी गई है। अभ्यर्थी सुधांशु कुमार त्रिवेदी का कहना है कि अधिकांश साथी 40 वर्ष से अधिक हैं लेकिन, सचिव के निर्देश के बाद अब कोई बाधा नहीं है।

शिक्षक भर्ती : बेसिक शिक्षा परिषद 1981 की नियमावली के अनुसार होगा चयन, सचिव बोले : 50 वर्ष तक के अभ्यर्थी प्रक्रिया का बनेंगे हिस्सा, विशिष्ट और उर्दू बीटीसी को मिलेगी नियुक्ति Reviewed by Ram Krishna mishra on 6:50 AM Rating: 5

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