टीईटी का जिम्मा संभाल रही एजेंसी पर उठे चुके हैं सवाल,  परीक्षा नियामक कार्यालय में परीक्षाओं का जिम्मा उठाने वाली एजेंसियां पहली बार निशाने पर नहीं

टीईटी का जिम्मा संभाल रही एजेंसी पर उठे चुके हैं सवाल,  परीक्षा नियामक कार्यालय में परीक्षाओं का जिम्मा उठाने वाली एजेंसियां पहली बार निशाने पर नहीं। 


इलाहाबाद : परिषदीय स्कूलों की की लिखित परीक्षा में कार्य करने वाली एजेंसी पहली बार निशाने पर नहीं आई है, बल्कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में कार्य कर रही कई एजेंसियों पर गंभीर आरोप लग चुके हैं। यह अलग बात है कि अफसरों ने हर बार आरोपों को खारिज किया।



उप्र शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि यूपीटीईटी 2017 की परीक्षा व परीक्षा परिणाम तैयार करने वाली एजेंसी पर सवाल उठ चुके हैं। शिकायत के बाद राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के तत्कालीन निदेशक डॉ. सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से आख्या मांगी थी। निदेशक से शिकायत की गई थी कि टीईटी 2017 का आयोजन व परीक्षा परिणाम का कार्य उस एजेंसी को दिया गया। 



इस पर माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड की टीजीटी-पीजीटी 2013 परीक्षा और टीईटी 2013 परीक्षा व परीक्षा परिणाम संबंधी कार्य में बड़े स्तर पर धांधली के गंभीर आरोप लगे थे। एससीईआरटी निदेशक ने सचिव से इस मामले में स्पष्ट आख्या परिषद कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसी एजेंसी ने टीजीटी-पीजीटी 2013 की परीक्षा की ओएमआर सीट भी जांची थी। शिकायत के बाद पूर्व अध्यक्ष हीरालाल गुप्ता ने चयन बोर्ड में रखी ओएमआर सीट के आधार पर जांच कराई तो काफी गड़बड़ी सामने आई थी। 



इस पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी रहीं सचिव डा. सुत्ता सिंह का कहना था कि शासनादेश के तहत एजेंसी के चयन का कार्य पूरी तरह गोपनीय होता है। शिकायत पूरी तरह काल्पनिक है। 



कोर्ट के सुझाव की अनदेखी: से पहले हुई टीईटी के सवालों पर विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा था। उस समय कोर्ट ने तत्कालीन सचिव से पूछा था कि क्या उन्होंने प्रश्नपत्र तैयार करने से पहले देखे नहीं थे। इस पर उन्होंने गोपनीयता का हवाला देकर प्रश्नपत्र देखने से इन्कार किया था।

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