पुरानी पेंशन बहाली की एक सूत्रीय मांग की दम से खड़े हुए आंदोलन में अचानक हड़ताल वापसी से शिक्षक कर्मचारियों में पैदा हुआ असंतोष

■  पुरानी पेंशन बहाली की एक सूत्रीय मांग की दम से खड़े हुए आंदोलन में अचानक हड़ताल वापसी से शिक्षक कर्मचारियों में पैदा हुआ असंतोष

■ जो कर्मचारी नेता तीन दिन पहले तक हुंकार भर रहे थे, वह दो दिन पहले अचानक खुद सरकार से वार्ता करने व हड़ताल से बचने का रास्ता तलाशने के प्रयास में जुट गए थे।

■ हड़ताल वापसी से शिक्षक कर्मचारी असंतुष्ट

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद अपनी कार्यकारिणी बैठक में जहां सरकार के झुकने का दावा किया तो वहीं यह आवाज भी उठी कि स्पष्ट निर्णय करने के बजाय सरकार ने छोटा कदम उठाकर बड़ा आंदोलन खत्म करा दिया। कर्मचारियों का बड़ा समूह सरकार द्वारा गठित समिति की संस्तुतियों को अनिश्चित मान रहा है। उन्हें आशंका है कि अब यह मामला कम से कम लोकसभा चुनाव तक ठहर गया है।

उधर, सचिवालय संघ की आम सभा में पदाधिकारियों ने तो पेंशन बहाली मंच के फैसले का साथ जाने का एलान किया, जबकि इस दौरान कई अधिकारियों व कर्मचारियों ने कर्मचारी संगठनों के अचानक बदले रुख पर नाराजगी जताई। चर्चा रही कि जो कर्मचारी नेता तीन दिन पहले तक हुंकार भर रहे थे, वह दो दिन पहले अचानक खुद सरकार से वार्ता करने व हड़ताल से बचने का रास्ता तलाशने के प्रयास में जुट गए थे।

कर्मचारी नेताओं ने आंदोलन तो इस शर्त पर खड़ा किया था कि पुरानी पेंशन योजना की बहाली से कम पर किसी भी सूरत में वह हड़ताल वापस नहीं लेंगे लेकिन, अचानक बैकफुट पर आए संगठनों के पदाधिकारियों ने पूरे मामले की समीक्षा के लिए केवल समिति गठित करने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आश्वासन पर ही हड़ताल स्थगित कर दी। गुरुवार से प्रस्तावित तीन दिन की हड़ताल के लिए सभी जिलों में कई हफ्तों से तैयारी में जुटे कर्मचारियों में इसे लेकर नाराजगी भी है।

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