68500 भर्ती रद करने के फैसले से सकते में यूपी सरकार, दूसरे चरण की भर्ती पर भी लग सकता है ग्रहण, 12460 भर्ती पर आए फैसले ने किया कोढ़ में खाज का काम
68500 भर्ती रद करने के फैसले से सकते में यूपी सरकार, दूसरे चरण की भर्ती पर भी लग सकता है ग्रहण, 12460 भर्ती पर आए फैसले ने किया कोढ़ में खाज का काम।
लखनऊ : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षकों की भर्ती की सीबीआइ जांच और 12460 शिक्षकों की भर्ती को रद करने के हाईकोर्ट के आदेशों ने राज्य सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। योगी सरकार की अब तक की सबसे बड़ी भर्ती करार दी गई 68500 शिक्षकों की चयन प्रक्रिया की सीबीआइ जांच के आदेश से हुकूमत सकते में है। वहीं 12460 शिक्षकों की भर्ती को रद करने के आदेश ने सरकार के लिए कोढ़ में खाज का काम किया है।
भर्तियों को लेकर सरकार की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि संकेत हैं कि सरकार हाईकोर्ट की एकल पीठ के इन आदेशों के खिलाफ विशेष अपील करेगी। सीबीआइ जांच के कोर्ट के आदेश ने जहां इसके तहत नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों में बेचैनी पैदा की है, वहीं भर्ती से जुड़े अफसरों की मुश्किलें बढ़नी भी तय है। कोर्ट के इस आदेश ने शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए भर्तियों में जुटी सरकार को भी बैकफुट पर ला दिया है।
गौरतलब है कि बेसिक शिक्षा विभाग प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षकों के दूसरे चरण की भर्ती प्रक्रिया की तैयारियों में जुटा था। इस सिलसिले में 18 नवंबर को उप्र शिक्षक पात्रता परीक्षा भी प्रस्तावित है। कोर्ट के इस आदेश से इस भर्ती प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि विभाग के आला अफसर अभी यह कहते हुए कुछ कहने से बच रहे हैं कि उन्हें कोर्ट के मुकम्मल आदेश की जानकारी नहीं है।
गौरतलब है कि शिक्षामित्रों का समायोजन रद होने के बाद प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के 1.37 लाख पद रिक्त हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सरकार ने इन पदों को भरने के लिए 68500 शिक्षकों की भर्ती दो चरणों में करने का फैसला किया था। पहले चरण में 68500 शिक्षकों की भर्ती के लिए हुई लिखित परीक्षा में 41556 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए थे। यह बात दीगर है कि लिखित परीक्षा के परिणामों में जिस तरह की धांधलियां उजागर हुईं, उसने सरकार के लिए बेहद असहज स्थिति पैदा कर दी।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने प्रमुख सचिव चीनी एवं गन्ना विकास संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, वहीं सभी उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी (नंबरों का मिलान) भी कराई। शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणामों में सामने आई अनियमितताएं तो सरकार के लिए भारी पड़ीं ही, लिखित परीक्षा में फेल और स्क्रूटनी में पास पाए गए अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपने में हीलाहवाली भी कोर्ट की नाराजगी की वजह बनी।
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