सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी के अंशकालिक अनुदेशकों को बढ़ा हुआ मानदेय ₹17,000 देने का आदेश, देखें सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी के अंशकालिक अनुदेशकों को बढ़ा हुआ मानदेय ₹17,000 देने का आदेश
समान कार्य के लिए समान सम्मान: संविदा शिक्षकों के हक में सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
मुख्य निष्कर्ष
🔴 उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत पार्ट टाइम संविदा शिक्षकों/अनुदेशकों को बढ़े हुए मानदेय का अधिकार।
🔴 2013 में निर्धारित ₹7000 मासिक मानदेय को वर्षों तक यथावत रखना अनुचित ठहराया गया।
🔴 मानदेय का पुनरीक्षण वार्षिक न सही तो समय-समय पर किया जाना अनिवार्य।
🔴 वर्ष 2017-18 की परियोजना अनुमोदन बोर्ड (PAB) की बैठक में तय ₹17,000 मासिक मानदेय लागू करने के निर्देश।
🔴 राज्य सरकार द्वारा ₹7,000, ₹8,470 या ₹9,800 जैसे कम भुगतान को गलत माना गया।
🔴 सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों से कार्य लेने के बाद उचित पारिश्रमिक देना राज्य का दायित्व है।
🔴 यूपी सरकार की सभी विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) खारिज।
🔴 निर्णय से प्रदेश के हजारों अंशकालिक अनुदेशकों को सीधा लाभ।
उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत पार्ट टाइम संविदा शिक्षकों के हित में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2013 में तय किए गए ₹7000 मासिक मानदेय को लंबे समय तक बिना संशोधन के जारी रखना न तो न्यायसंगत है और न ही संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जब राज्य सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत संविदा शिक्षकों से निरंतर शैक्षणिक कार्य लिया जा रहा है, तो उन्हें समय-समय पर सम्मानजनक मानदेय देना अनिवार्य है। न्यायालय ने यह भी माना कि परियोजना अनुमोदन बोर्ड द्वारा 2017-18 में ₹17,000 मासिक मानदेय निर्धारित किया गया था, इसलिए सभी पात्र संविदा शिक्षकों को उसी दर से भुगतान किया जाना चाहिए।
अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि सरकार द्वारा कभी ₹8,470, कभी ₹9,800 और कभी ₹7,000 के आधार पर भुगतान करना भेदभावपूर्ण है और यह समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के विपरीत है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर सभी अपीलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में अंतिम मुहर लगा दी। यह फैसला न केवल आर्थिक राहत प्रदान करेगा, बल्कि संविदा शिक्षकों के आत्मसम्मान और कार्य की गरिमा को भी स्थापित करेगा।
शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि यह फैसला भविष्य में संविदा कर्मियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत नजीर बनेगा।
देखें सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर 👇
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशकों को 17 हजार रुपए मानदेय दिए जाने की खबर
यूपी के सरकारी जूनियर स्कूलों में पढ़ा रहे अनुदेशकों की नौकरी खत्म नहीं होगी। इनको अब 17 हजार रुपए मानदेय भी मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की वह अपील खारिज कर दी है, जिसमें यूपी सरकार अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने के खिलाफ थी। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने साफ कहा है कि संविदा की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी अनुदेशकों की नौकरी खत्म नहीं होती। दस साल से लगातार काम करने की वजह से यह पद ऑटोमैटिक तरीके से सृजित है। अनुदेशकों/ शिक्षकों को 17 हजार रुपए मानदेय भी दिया जाए।
दरअसल, अनुदेशक 2013 से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इनकी याचिका पर हाईकोर्ट ने मानदेय बढ़ाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने कहा कि संविदा की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी अनुदेशकों की नियुक्ति खत्म नहीं होगी। यह पोस्ट कांट्रैक्चुअल भी नहीं माना जा सकता क्योंकि इनके कांट्रैक्ट में यह साफ तौर पर मेंशन है कि वे अपने स्पेयर टाइम में दूसरी नौकरी या काम नहीं कर सकते। ऐसे में यह स्पष्ट है कि ये इंट्रक्टर टीचर दस साल से लगातार काम कर रहे है और परमानेंट टीचर के रूप में डीम्ड तौर पर एम्लायड हैं। इतना समय बीतने और उनके लगातार काम करने की वजह से यह पद ऑटोमेटिकली सृजित हो गया है। कोर्ट ने 17 हजार मानदेय देने के आदेश को सही मानते हुए कहा कि इससे कम संविधान की आर्टिकल 23 के विपरीत है।
कोर्ट ने पूछा- मानदेय बढ़ाने में दिक्कत क्या है?
कोर्ट में मंगलवार को करीब तीन घंटे तक सुनवाई हुई। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की डबल बेंच ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं को तीन दिन के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट की टिप्पणियों से अनुदेशकों के पक्ष में माहौल बनता नजर आया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कड़े सवाल किए। कोर्ट ने कहा, “जब पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया। आपको मानदेय देने में क्या दिक्कत है?” कोर्ट की इस टिप्पणी पर राज्य सरकार के वकील ने भी सहमति जताई, जिससे अनुदेशकों की उम्मीदें और मजबूत हो गईं।
2013 से 7 हजार मानदेय, कोर्ट ने माना अनुचित श्रम व्यवहार
कोर्ट ने 2013 में तय किए गए ₹7,000 प्रतिमाह मानदेय को लेकर भी राज्य सरकार पर सख्त टिप्पणी की। डबल बेंच ने कहा कि इतने लंबे समय तक बिना किसी संशोधन के मानदेय तय रखना “अनुचित श्रम व्यवहार” की श्रेणी में आता है। अंशकालिक शिक्षक लगातार सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक से वंचित नहीं किया जा सकता।
अंशकालिक शिक्षक वर्ष 2013 में निर्धारित मानदेय के पुनरीक्षण के पूर्ण अधिकार के पात्र हैं। कोर्ट ने कहा कि मानदेय का पुनरीक्षण नियत अवधि पर किया जाना चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया कि 2017–18 से अंशकालिक शिक्षकों का मानदेय ₹17,000 प्रतिमाह माना जाएगा, जो अगले संशोधन तक प्रभावी रहेगा।
1 अप्रैल 2026 से भुगतान, 6 महीने में बकाया चुकाने का आदेश
डबल बेंच ने आदेश दिया कि संशोधित मानदेय का भुगतान 1 अप्रैल 2026 से शुरू किया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि अंशकालिक शिक्षकों का पूरा बकाया आज यानी 4 फरवरी 2026 से छह महीने की अवधि के भीतर अनिवार्य रूप से भुगतान किया जाए।
2017 में दोगुना हुआ था मानदेय, नहीं हुआ लागू
यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय वर्ष 2017 में 8,470 रुपए से बढ़ाकर 17,000 रुपए किया गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इस निर्णय को लागू नहीं किया गया। इसके विरोध में अनुदेशकों ने लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच में याचिका दायर की थी।
लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के तत्कालीन न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने अनुदेशकों को 17,000 रुपये मानदेय 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने केवल एक वर्ष के लिए 17,000 रुपये मानदेय भुगतान का निर्देश दिया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
2 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में पूरी हुई बहस
करीब 2 साल के अंतराल के बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता सखाराम यादव, पीएस पटवालिया और दुर्गा तिवारी ने अनुदेशकों की ओर से मजबूत पक्ष रखा। मुख्य याचिकाकर्ता आशुतोष शुक्ला, राकेश पटेल सहित अन्य याची भी सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। अनुदेशकों के विधिक सलाहकार बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अनुदेशकों के पक्ष में आना बड़ी जीत है।
एलर्ट : खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर अपलोड होने के बाद अंतिम रूप से कुछ कहा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी के अंशकालिक अनुदेशकों को बढ़ा हुआ मानदेय ₹17,000 देने का आदेश, देखें सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
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5:41 PM
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