चयनित विद्यालयों में “लर्निंग बाय डूइंग” अनिवार्य, कक्षा 6 से 8 तक हर सप्ताह प्रैक्टिकल गतिविधियों के निर्देश, देखें जारी आदेश

चयनित विद्यालयों में “लर्निंग बाय डूइंग” अनिवार्य, कक्षा 6 से 8 तक हर सप्ताह प्रैक्टिकल गतिविधियों के निर्देश, देखें जारी आदेश 


मुख्य बिंदु:

• प्रदेश के चयनित विद्यालयों में “लर्निंग बाय डूइंग” कार्यक्रम लागू करने के निर्देश
• कक्षा 6, 7 और 8 के लिए सप्ताह में दो-दो दिन प्रायोगिक गतिविधियां अनिवार्य
• प्रत्येक कक्षा के लिए समय-सारणी के अनुसार अंतिम दो पीरियड निर्धारित
• गतिविधियों का संचालन प्रशिक्षित शिक्षक/तकनीकी अनुदेशक द्वारा कराया जाएगा
• प्रत्येक माह गतिविधियों की फोटो प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य
• जिला स्तर पर कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी गई


प्राइमरी का मास्टर  । प्रदेश के बेसिक विद्यालयों में शिक्षण को अधिक व्यावहारिक और रोचक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने चयनित विद्यालयों में “लर्निंग बाय डूइंग” कार्यक्रम को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा द्वारा जारी पत्र के अनुसार कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक सप्ताह निर्धारित दिनों में प्रयोगात्मक एवं गतिविधि आधारित शिक्षण कराया जाएगा।

निर्देशों के अनुसार कक्षा 8 के लिए प्रत्येक सोमवार और मंगलवार, कक्षा 7 के लिए बुधवार और गुरुवार तथा कक्षा 6 के लिए शुक्रवार और शनिवार को समय-सारणी के अनुसार अंतिम दो पीरियड “लर्निंग बाय डूइंग” गतिविधियों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन गतिविधियों का संचालन प्रशिक्षित शिक्षकों अथवा तकनीकी अनुदेशकों के माध्यम से कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को विषयों की समझ व्यवहारिक अनुभव के माध्यम से विकसित हो सके।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विद्यालय स्तर पर समय-सारणी में आवश्यक समायोजन किया जाए और सभी चयनित विद्यालय नियमित रूप से प्रायोगिक गतिविधियां संचालित करें। साथ ही प्रत्येक माह चारों ट्रेंड्स से संबंधित गतिविधियों की कम से कम एक-एक जियोटैग्ड फोटो प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करना भी अनिवार्य किया गया है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों सहित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कार्यक्रम की सतत निगरानी करते हुए इसके प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करें। शिक्षा विभाग का मानना है कि गतिविधि आधारित शिक्षण से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, समझ और व्यावहारिक कौशल का विकास होगा, जिससे सीखने की गुणवत्ता में सुधार आएगा।


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