69,000 शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट ने मांगा याचियों का विवरण, राज्य सरकार को 10 दिन में अपना पक्ष रखने का दिया आदेश

69,000 शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट ने मांगा याचियों का विवरण

कहा- राज्य सरकार 19000 सीटों पर हुए आरक्षण घोटाले में 10 दिनों में रखे पक्ष


नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में 19,000 सीटों पर हुए आरक्षण घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने याचियों का विवरण पेश करने के लिए कहा है। जस्टिस दीपाकर दत्ता एवं जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने राज्य सरकार को 10 दिनों के भीतर अदालत के समक्ष रखने के लिए कहा है। सुनवाई के दौरान आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोस्वामी ने पीठ को बताया कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ इस भर्ती में अन्याय हुआ है। वे वर्ष 2020 न्याय मांग रहे हैं।


पहले हाईकोर्ट में याची के तौर पर और अब सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादी के रूप में। उन्होंने कहा कि वह इस बात के विरोध में नहीं है कि जो शिक्षक इस भर्ती में गलत तरीके से नियुक्त हो गए हैं और 5 वर्षों से नौकरी कर रहे हैं उनको अब इस भर्ती प्रक्रिया से बाहर निकाला जाए। याचिका में अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि इस भर्ती में आरक्षण नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया और करीब 19,000 सीटों का घोटाला हुआ है।


इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 13 अगस्त 2024 को आरक्षण को लेकर मेरिट लिस्ट रद्द कर दी थी और सरकार को 3 महीने के भीतर नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और दोनों पक्षों से जवाब मांगा था। 2018 में यूपी सरकार ने 69 हजार सहायक शिक्षक पदों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी।
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