बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों एवं विशेष शिक्षक (CWSN) हेतु विशेष अध्यापक पात्रता परीक्षा (Special TET) आयोजित कराने हेतु कार्ययोजना के संबंध में
शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी की कार्ययोजना को स्वीकृति, विशेष टीईटी 150 प्रश्नों की होगी, जिसके लिए 150 अंक होंगे
लखनऊः सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष एक सितंबर को सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया था। पुनर्विचार याचिका में 29 मई के आदेश के अनुसार कार्यरत प्रदेश सरकार ने विशेष अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) कराने की कार्ययोजना स्वीकृत कर दी है।
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को पहली बार इस विशेष परीक्षा के जरिये टीईटी की अनिवार्यता पूरी करने का अवसर मिलेगा। करीब 1.40 लाख से अधिक शिक्षक इसके दायरे में आएंगे। इनमें 2,500 विशेष शिक्षक भी परीक्षा में शामिल होंगे। कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को प्राथमिकता के आधार पर विज्ञापन जारी कर परीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं। इसके दायरे में बेसिक शिक्षा परिषद, स्थानीय निकाय और राज्य सरकार से मान्यताप्राप्त व सहायताप्राप्त विद्यालयों के शिक्षक आएंगे। विशेष टीईटी 150 प्रश्नों की होगी, जिसके लिए 150 अंक होंगे।
शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के सात मार्च 2025 के आदेश के अनुपालन में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर के करीब 2,500 विशेष शिक्षक भी परीक्षा में शामिल होंगे। प्राथमिक शिक्षक कक्षा एक से पांच और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षक परीक्षा दे सकेंगे। विशेष शिक्षकों के लिए प्राथमिक स्तर पर स्नातक के साथ भारतीय पुनर्वास परिषद मान्यता प्राप्त डीएड विशेष शिक्षा और आरसीआइ पंजीकरण जरूरी होगा।
उच्च प्राथमिक के लिए बीएड विशेष शिक्षा या समकक्ष योग्यता अनिवार्य होगी। परीक्षा के लिए संविदा/डेली वेजेस विशेष शिक्षकों की अधिकतम आयु परीक्षा की तारीख तक 60 वर्ष अनुमन्य है।
परीक्षा में पूछे जाएंगे 150 सवाल, नहीं होगी निगेटिव मार्किंग
कार्यरत शिक्षकों के लिए होने वाला विशेष टीईटी 150 मिनट का होगा। सभी 150 प्रश्न बहुविकल्पीय होंगे और प्रत्येक एक अंक का होगा। निगेटिव मार्किंग नहीं होगी। प्रश्नपत्र हिंदी व अंग्रेजी में होंगे, जबकि भाषा विषयों में यह व्यवस्था लागू नहीं होगी। प्राथमिक स्तर पर बाल विकास एवं शिक्षण विधि, हिंदी, दूसरी भाषा (अंग्रेजी/उर्दू/संस्कृत), गणित और पर्यावरण अध्ययन से 30-30 प्रश्न होंगे। उच्च प्राथमिक स्तर पर बाल विकास, हिंदी और दूसरी भाषा से 30-30 प्रश्न व गणित-विज्ञान या सामाजिक अध्ययन/विज्ञान से 60 प्रश्न होंगे।
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