69000 शिक्षक भर्ती : आठ सितंबर से लगातार 3 दिन होगी सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अभ्यर्थियों के भविष्य को लंबे समय तक अधर में नहीं रखा जा सकता

69000 शिक्षक भर्ती : आठ सितंबर से लगातार 3 दिन होगी सुनवाई,  सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अभ्यर्थियों के भविष्य को लंबे समय तक अधर में नहीं रखा जा सकता

11 अगस्त 2026
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को साफ शब्दों में कहा कि अभ्यर्थियों के भविष्य पर फैसला जल्द होना चाहिए। इसे लंबे समय तक नहीं लटका सकते। शीर्ष अदालत मामले की आठ सितंबर से लगातार तीन दिन सुनवाई करेगा।

जस्टिस एवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा, अभ्यर्थी लंबे समय से दुविधा की स्थिति में हैं। उनके भविष्य को लंबे समय तक अधर में नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से इस मामले को लेकर आवेदनकर्ताओं, वादी और प्रतिवादियों की श्रेणियां, उनकी आपत्तियां और मांगों का समूह तैयार करने के लिए कहा। सरकारी वकील से दो सप्ताह में ऐसी सूची तैयार करने के लिए कहा गया है, जिसमें यह निश्चित हो कि किन किन पक्षों को किन-किन मसलों पर सुना जाना है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सभी पक्षों को सुना जाएगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार के पहले दिए सीटों के आंकड़ों को वह नहीं मानेगा। अब अंकित गोयल 18 अगस्त तक केस को 3 कैटेगरी में बांटकर रिपोर्ट देंगे। इसमें 'आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थी', 'हाईकोर्ट में याची नहीं रहे अभ्यर्थी' और '13 अगस्त 2024 के लखनऊ डबल बेंच के आदेश से प्रभावित अभ्यर्थी' की कटैगरी शामिल है। शीर्ष अदालत इसकी श्रेणीवार 8, 9 और 10 सितंबर को सुनवाई करेगा, जिससे तय हो सके कि न्याय का सबसे पहले दावा किसका है। 

नोडल काउंसलर हटाए गए
इस बीच पीठ ने नोडल काउंसलर मंदीप कालरा को तुरंत हटा दिया। उनकी जगह राज्य सरकार के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) अंकित गोयल को नया नोडल काउंसलर बना दिया।



यूपी की 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा - सभी पक्ष सहमत हों तो समाधान के लिए करेंगे असाधारण शक्तियों से फैसला

69,000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगे सुझाव

28 जुलाई 2026
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से सुझाव मांगे हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर दोनों पक्ष एकमत होते हैं तो कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 में मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करके अगली सुनवाई पर चार अगस्त (मंगलवार) को केस निस्तारित कर देगा। अगर दोनों पक्ष एकमत नहीं हुए और उनमें मतभिन्नता रही तो कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध लंबित याचिकाओं की मेरिट पर सुनवाई करेगा। 

जस्टिस दीपांकर दत्ता एवं जस्टिस शील नागू की पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही। कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर सभी पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले को 28 जुलाई को अंतिम सुनवाई के लिए लगा दिया था। लेकिन मंगलवार को मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि उन्हें सभी पक्षों की लिखित दलीलें अभी प्राप्त नहीं हुई हैं, इसके लिए कोर्ट ने पक्षकारों को बुधवार तक का समय और दे दिया। 

इसी बीच आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील ने कोर्ट से कहा कि वह पिछली सुनवाई पर भी कह चुके हैं और अब भी उनका यही कहना है कि जब प्रदेश सरकार के पास रिक्तियां हैं तो उन्हें नौकरी में समायोजित करके केस निस्तारित कर दिया जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल की गईं लिखित दलीलों में दिए ब्योरे और पिछली सुनवाइयों पर दिए गए आंकड़ों का हवाला दिया।



69000 शिक्षक भर्ती : राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया शपथपत्र, पहले से नियुक्त 67867 शिक्षक प्रभावित नहीं होंगे, आज होनी है सुनवाई, आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों ने मांगा याची लाभ

27 जुलाई 2026
लखनऊ। 69 हजार शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में राज्य सरकार ने सोमवार को फिर अपना चार पेज का शपथपत्र दाखिल किया है। इसमें 20 जुलाई को दाखिल शपथपत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में संशोधित मेरिट सूची में स्थान पाने वाले पात्रों को पहले से नियुक्त 67867 शिक्षकों को प्रभावित किए बिना समायोजित किया जा सकेगा।

यह समायोजन मौजूदा खाली पदों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। संबंधित अभ्यर्थी न्यूनतम निर्धारित योग्यता पूरी करते हो। इसे भविष्य के मामलों में कोई नजीर नहीं माना माना जाए। इस मामले में न्यायालय जो भी निर्देश देगा, राज्य उसका पालन करने के लिए तैयार है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 28 जुलाई को होनी है। 

वहीं आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों में सरकार के इस शपथपत्र से नाराजगी है। उन्होंने कहा कि भर्ती में जितने भी आरक्षण प्रभावितयाची हाईकोर्ट सिंगल बेंच से डबल बेंच तक हैं। उन्हें याची लाभ देकर यह मामला निस्तारित किया जाए। इस भर्ती की मूल चयन सूची सार्वजनिक की जाए।








69000 शिक्षक भर्ती : सुप्रीम कोर्ट ने नहीं स्वीकारी यूपी सरकार की सूची, सरकार ने 8270 अभ्यर्थियों की सूची दी, आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों का किया उल्लेख


22 जुलाई 2026
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़ी गड़बड़ियों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश की गई उस सूची पर सवाल उठाए, जिसमें करीब 8270 अभ्यर्थियों के आरक्षण से जुड़ी त्रुटियों का जिक्र है। सुप्रीम कोर्ट ने सूची को अभी अंतिम मानने से इन्कार कर दिया।

अदालत ने सभी पक्षों से कहा कि वे 2020 से अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ, इसका पूरा घटनाक्रम लिखकर सोमवार तक अदालत में जमा करें। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने संशोधित कटऑफ का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, पूरी चयन सूची को फिर से तैयार करने पर अनारक्षित वर्ग की कटऑफ 69.42, ओबीसी की 65.92, एससी की 60.14 और एसटी की 56.09 बनती है। 

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे, मनीष गोस्वामी, आरके सिंह और पुष्कर शर्मा ने सरकार के हलफनामे और सूची पर कहा कि सरकार की सूची पारदर्शी नहीं है और जब तक पूरी मूल चयन सूची सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक यह तय नहीं किया जा सकता कि गड़बड़ी कितनी सीटों पर हुई है। 


69000 शिक्षक भर्ती मामले में 9500 और लोगों को समायोजित कर सकती है उप्र सरकार, एक नई सूची तैयार करके हलफनामे के साथ सुप्रीम कोर्ट में की दाखिल 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम सबकी दलीलों पर करेंगे विचार, अगली सुनवाई मंगलवार को

69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में पक्षकारों को सरकार के हलफनामे पर आपत्ति

21 जुलाई 2026
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में 2018 की 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में नियुक्ति का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण फिर जगी है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 9500 और लोगों को नौकरी में समाहित किया जा सकता है। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में एक नई सूची तैयार करके हलफनामे के साथ कोर्ट में दाखिल की।

हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने प्रदेश सरकार के हलफनामे पर सवाल उठाया और शुरुआत में नौकरी का आफर स्वीकार नहीं करने वाले 4946 उम्मीदवारों को फिर नई सूची में शामिल किये जाने पर आपत्ति उठाई। कोर्ट ने भी राज्य सरकार से पूछा कि जिन्हें पहले आफर दिया गया था और उन्होंने स्वीकार नहीं किया था तो उन्हें नई सूची में क्यों शामिल किया गया। इस पर राज्य सरकार का कहना था कि कोर्ट कहेगा तो वे उन्हें हटा देंगे लेकिन वे मेरिट में ऊपर थे इसलिए सूची में शामिल किया। 

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें मेरिट पर सुनने की बात कहते हुए मामले को अगले मंगलवार फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया है। इस बीच पक्षकारों को लिखित दलीलें और संक्षिप्त नोट दाखिल करने को कहा गया है। कोर्ट ने कहा, भले ही बहुत सारे पक्षकार हों लेकिन वो दोनों तरफ से पांच-पांच वकीलों और एक वकील अर्जी दाखिल करने वालों की ओर से सुनेगा।

ये निर्देश जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले पर सुनवाई के दौरान दिए। पूर्व सुनवाई में 2020 से नौकरी पाने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनकी मांग ये नहीं है कि जो लोग नौकरी कर रहे हैं उन्हें हटा दिया जाए, उनकी मांग तो ये है कि उन्हें भी नौकरी दी जाए, वे 2020 से कोर्ट दर कोर्ट भटक रहे हैं। इस पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या वह और लोगों को समायोजित कर सकती है। 

पिछली सुनवाई में प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वो उन लोगों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार, मूल चयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं। प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगा।
69000 शिक्षक भर्ती : आठ सितंबर से लगातार 3 दिन होगी सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अभ्यर्थियों के भविष्य को लंबे समय तक अधर में नहीं रखा जा सकता Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2 on 6:10 AM Rating: 5

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