69000 शिक्षक भर्ती मामले में 9500 और लोगों को समायोजित कर सकती है उप्र सरकार, एक नई सूची तैयार करके हलफनामे के साथ सुप्रीम कोर्ट में की दाखिल
69000 शिक्षक भर्ती : सुप्रीम कोर्ट ने नहीं स्वीकारी यूपी सरकार की सूची, सरकार ने 8270 अभ्यर्थियों की सूची दी, आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों का किया उल्लेख
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़ी गड़बड़ियों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश की गई उस सूची पर सवाल उठाए, जिसमें करीब 8270 अभ्यर्थियों के आरक्षण से जुड़ी त्रुटियों का जिक्र है। सुप्रीम कोर्ट ने सूची को अभी अंतिम मानने से इन्कार कर दिया।
अदालत ने सभी पक्षों से कहा कि वे 2020 से अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ, इसका पूरा घटनाक्रम लिखकर सोमवार तक अदालत में जमा करें। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने संशोधित कटऑफ का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, पूरी चयन सूची को फिर से तैयार करने पर अनारक्षित वर्ग की कटऑफ 69.42, ओबीसी की 65.92, एससी की 60.14 और एसटी की 56.09 बनती है।
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे, मनीष गोस्वामी, आरके सिंह और पुष्कर शर्मा ने सरकार के हलफनामे और सूची पर कहा कि सरकार की सूची पारदर्शी नहीं है और जब तक पूरी मूल चयन सूची सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक यह तय नहीं किया जा सकता कि गड़बड़ी कितनी सीटों पर हुई है।
69000 शिक्षक भर्ती मामले में 9500 और लोगों को समायोजित कर सकती है उप्र सरकार, एक नई सूची तैयार करके हलफनामे के साथ सुप्रीम कोर्ट में की दाखिल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम सबकी दलीलों पर करेंगे विचार, अगली सुनवाई मंगलवार को
69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में पक्षकारों को सरकार के हलफनामे पर आपत्ति
21 जुलाई 2026
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में 2018 की 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में नियुक्ति का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण फिर जगी है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 9500 और लोगों को नौकरी में समाहित किया जा सकता है। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में एक नई सूची तैयार करके हलफनामे के साथ कोर्ट में दाखिल की।
हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने प्रदेश सरकार के हलफनामे पर सवाल उठाया और शुरुआत में नौकरी का आफर स्वीकार नहीं करने वाले 4946 उम्मीदवारों को फिर नई सूची में शामिल किये जाने पर आपत्ति उठाई। कोर्ट ने भी राज्य सरकार से पूछा कि जिन्हें पहले आफर दिया गया था और उन्होंने स्वीकार नहीं किया था तो उन्हें नई सूची में क्यों शामिल किया गया। इस पर राज्य सरकार का कहना था कि कोर्ट कहेगा तो वे उन्हें हटा देंगे लेकिन वे मेरिट में ऊपर थे इसलिए सूची में शामिल किया।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें मेरिट पर सुनने की बात कहते हुए मामले को अगले मंगलवार फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया है। इस बीच पक्षकारों को लिखित दलीलें और संक्षिप्त नोट दाखिल करने को कहा गया है। कोर्ट ने कहा, भले ही बहुत सारे पक्षकार हों लेकिन वो दोनों तरफ से पांच-पांच वकीलों और एक वकील अर्जी दाखिल करने वालों की ओर से सुनेगा।
ये निर्देश जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले पर सुनवाई के दौरान दिए। पूर्व सुनवाई में 2020 से नौकरी पाने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनकी मांग ये नहीं है कि जो लोग नौकरी कर रहे हैं उन्हें हटा दिया जाए, उनकी मांग तो ये है कि उन्हें भी नौकरी दी जाए, वे 2020 से कोर्ट दर कोर्ट भटक रहे हैं। इस पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या वह और लोगों को समायोजित कर सकती है।
पिछली सुनवाई में प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वो उन लोगों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार, मूल चयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं। प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगा।
69000 शिक्षक भर्ती मामले में 9500 और लोगों को समायोजित कर सकती है उप्र सरकार, एक नई सूची तैयार करके हलफनामे के साथ सुप्रीम कोर्ट में की दाखिल
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
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6:34 AM
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