हर जिले से अलग-अलग विज्ञापन क्यों जारी नहीं हुए, भर्ती जिलावार तो प्रदेश स्तर पर क्यों जारी हुई सूची : 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट का सवाल
हर जिले से अलग-अलग विज्ञापन क्यों जारी नहीं हुए, भर्ती जिलावार तो प्रदेश स्तर पर क्यों जारी हुई सूची : 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट का सवाल
चयनित अभ्यर्थियों के वकील ने सभी को राहत देने का किया आग्रह
25 सितंबर 2026
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को भी सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि यदि भर्ती जिलास्तर की है तो प्रदेश स्तर पर चयन सूची क्यों जारी की गई? चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वकीलों ने नौकरी कर रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा और सभी को राहत देने की मांग की।
चयनित पक्ष के वकील विकास सिंह ने कहा कि यह भर्ती जिला स्तर पर हुई थी। जिलों के हिसाब से पद तय किए गए थे और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नियुक्ति करता है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि अगर नियुक्ति और भर्ती जिला स्तर की है तो प्रदेश स्तर पर सचिव की ओर से चयन सूची क्यों जारी की गई? कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि कटऑफ का निर्धारण प्रदेश स्तर पर क्यों किया गया। सिंह ने भर्ती को जनपदवार बताते हुए विज्ञापन का हवाला दिया। इस पर कोर्ट ने पूछा कि अगर भर्ती वास्तव में जनपदवार थी तो हर जिले से अलग-अलग विज्ञापन क्यों जारी नहीं किया गया।
विकास सिंह ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे सभी को समायोजित किया जा सकता है और किसी को नौकरी से बाहर नहीं करना पड़ेगा। एक अन्य वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा कि 65 फीसदी से अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों के ओवरलैपिंग पर आपत्ति नहीं है। हालांकि, 65 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को रोकने पर विचार किया जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने पूछा कि शासनादेश या नियमावली में ऐसा प्रावधान कहां है।
अन्य वकील सिद्धार्थ भटनागर ने कहा कि कई चयनित शिक्षक करीब छह वर्षों से नौकरी कर रहे हैं। कुछ की उम्र अब दूसरी सरकारी नौकरी करने की सीमा से अधिक हो चुकी है। कई ने दूसरी नौकरियां छोड़कर यह नौकरी ज्वाइन की थी। इसलिए कार्यरत शिक्षकों के हितों को सुरक्षित रखा जाए। अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
69000 शिक्षक भर्ती : विधानसभा चुनाव से पहले आ सकता है फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने कहा - बहस सीमित रखें, हजारों शिक्षकों से जुड़ा है मामला, सुनवाई आज भी रहेगी जारी
24 सितम्बर 2026
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बहस सीमित रखने को कहा। जस्टिस एसबीएन भट्टी और जस्टिस एनबी अंजारिया की पीठ ने कहा कि मामला हजारों शिक्षकों से जुड़ा है और वह जल्द फैसला देना चाहती है।
पीठ ने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख करते हुए संकेत दिया कि उससे पहले निर्णय देना बेहतर होगा। भोजनावकाश के बाद अधिवक्ता मनीष सिंघवी ने कहा कि चयनित शिक्षक कई वर्षों से काम कर रहे हैं और कोविड के दौरान कुछ साथियों की मृत्यु हो गई। कोर्ट ने पूछा कि हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश में गलती कहां है। सिंघवी ने बताया कि सरकार के पास 1.25 लाख पद खाली हैं। वंचित अभ्यर्थियों को इन पदों पर समायोजित किया जाए, लेकिन चयनित शिक्षकों को सेवा से बाहर न किया जाए। सुनवाई बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी।
वकीलों को टोका, दूसरी पीठ की चेतावनी
सुनवाई के दौरान कई वकीलों के एक साथ दलील रखने पर जस्टिस भट्टी ने नाराजगी जताई। कहा कि मामला वर्षों तक चलता रहेगा। लगातार टोके जाने पर उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति जारी रही तो मामले को प्रधान न्यायाधीश के पास भेजकर दूसरी पीठ गठित करने का आग्रह करेंगे। करीब तीन घंटे चली सुनवाई में चयनित पक्ष की अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने टीईटी में छूट वाले अभ्यर्थियों को माइग्रेट नहीं करने की दलील दोहराई। कोर्ट ने कहा कि एक ही बात न दोहराएं और पूछा कि टीईटी में 65% व एटीआरई में 60% अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को कहां रखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, भावनात्मक नहीं कागजात के आधार पर हो बहस, 69000 शिक्षक भर्ती मामले में आज भी सुनवाई रहेगी जारी
23 सितंबर 2026
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षण घोटाले के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बहस भावनात्मक नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए।
जस्टिस एसबीएन भट्टी और जस्टिस एनबी अंजारिया की पीठ के समक्ष मंगलवार को करीब 45 मिनट बहस चली। चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने बहस के दौरान कहा कि आरक्षित वर्ग को टीईटी परीक्षा में आयु, फीस और पासिंग मार्क्स में छूट मिली। अब सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा (एटीआरई) में भी वे छूट ले रहे हैं। यह दोहरा आरक्षण है। इस पर कोर्ट ने साफ कहा कि टीईटी सिर्फ पात्रता परीक्षा है। यह नियुक्ति पत्र नहीं है।
कोर्ट ने पूछा कि एटीआरई स्क्रीनिंग टेस्ट है या नहीं। अधिवक्ता ने हां कहा। तब कोर्ट ने पूछा कि जब टीईटी पात्रता परीक्षा और एटीआरई स्क्रीनिंग टेस्ट है तो दोहरा आरक्षण - कैसे हो गया।
अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने कहा कि लखनऊ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने एटीआरई को चयन का हिस्सा माना था। कोर्ट ने पूछा कि खंडपीठ का आदेश क्या कहता है। अधिवक्ता ने बताया कि खंडपीठ ने आरक्षण नियमों का पालन कर नई सूची बनाने के लिए कहा है। अधिवक्ता ने भावनात्मक दलील दी कि कई अभ्यर्थी पहले से नियुक्त हो चुके हैं। अगर हाईकोर्ट के आदेश का पालन हुआ तो छह साल से नौकरी कर रहे कई शिक्षक बाहर हो जाएंगे। कोर्ट ने उन्हें कहा कि बहस सिर्फ कागजात पर रखें और पुरानी बातें बार-बार न दोहराएं।
इस भर्ती में ओबीसी को 27 प्रतिशत की बजाय सिर्फ 3.86 प्रतिशत और एससी को 21 प्रतिशत की बजाय 16.2 प्रतिशत आरक्षण मिला था। लखनऊ हाईकोर्ट ने 13 अगस्त 2024 को पूरी सूची रद्द कर नई सूची बनाने का आदेश दिया था। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी इस घोटाले पर रिपोर्ट दी थी। सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।
69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद निर्णायक मोड़ पर, कल सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई
सरकार का फार्मूला-शिक्षकों को हटाए बिना आरक्षण से प्रभावित याची अभ्यर्थियों को मिले मौका
सुप्रीम कोर्ट में पिछली सुनवाई में कार्यरत शिक्षकों की ओर से रखा गया था प्रस्ताव
21 सितंबर 2026
लखनऊ : 69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक दौर में पहुंच गया है। 22 सितंबर को होने वाली सुनवाई में मेधावी एससी-ओबीसी अभ्यर्थियों को अनारक्षित सीटों पर माइग्रेशन का लाभ देने और करीब छह वर्ष से नौकरी कर रहे 67,867 शिक्षकों की नियुक्ति को बचाने के बीच समाधान खोजा जा सकता है। प्रदेश सरकार ने कार्यरत शिक्षकों को हटाए बिना आरक्षण से प्रभावित पात्र अभ्यर्थियों को रिक्त पदों पर समायोजित करने का प्रस्ताव रखा है।
एक जून 2020 को 69 हजार पदों के लिए 67,867 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी। एसटी के 1133 पद योग्य अभ्यर्थी न मिलने के कारण रिक्त रह गए। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने चयन सूची में सामान्य और ओबीसी कटआफ के बीच महज 0.38 अंक के अंतर को आधार बनाते हुए आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाया।
उनका आरोप है कि मेधावी ओबीसी-एससी अभ्यर्थियों को अनारक्षित सीटों पर माइग्रेट नहीं किया गया, जिससे करीब 19 हजार सीटों पर आरक्षण नियमों का उल्लंघन हुआ। आरक्षित वर्ग का कहना है कि यदि आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य मेरिट में आता है, तो उसे अनारक्षित सीट मिलनी चाहिए और उसकी आरक्षित सीट दूसरे पात्र अभ्यर्थी के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने 29 मई 2021 की रिपोर्ट में ओबीसी को 27 प्रतिशत के बजाय 3.86 प्रतिशत और एससी को 21 प्रतिशत के बजाय 16.2 प्रतिशत आरक्षण मिलने की बात कही थी। प्रदेश सरकार ने पांच जनवरी 2022 को 6800 अभ्यर्थियों की अतिरिक्त चयन सूची जारी की, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने रद कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में 16 सितंबर को कार्यरत शिक्षकों की ओर से सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने कहा कि चयनित शिक्षक करीब छह वर्ष से सेवा दे रहे हैं। जिन आरक्षित अभ्यर्थियों ने आयु, शुल्क या अन्य रियायत का लाभ लिया है, उन्हें बाद में अनारक्षित सीट पर माइग्रेशन का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।
सुनवाई में यह सवाल भी उठाया गया कि टीईटी में मिली छूट को अंतिम भर्ती में आरक्षण का दोहरा लाभ कैसे माना जा सकता है। प्रदेश सरकार ने हलफनामे में कहा है कि छह वर्ष से कार्यरत शिक्षकों को हटाने के बजाय उनकी नियुक्तियां सुरक्षित रखी जाए। अभ्यर्थी याचिका देकर विवाद समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मौजूदा शिक्षकों को हटाए बिना मामला सुलझ सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।
69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों ने रखी अपनी दलीलें, 22 सितंबर को अगली सुनवाई
17 सितंबर 2026
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण और अनारक्षित वर्ग में चयन को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ के समक्ष चयनित अनारक्षित वर्ग के शिक्षकों की ओर से आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के सामान्य वर्ग में माइग्रेशन पर सवाल उठाया गया। वहीं आरक्षित वर्ग की ओर से अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को सामान्य मेरिट में शामिल किए जाने के अधिकार का पक्ष रखा जा रहा है।
अनारक्षित वर्ग की दलील: आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में उम्र, फीस अथवा अंकों जैसी छूट का लाभ लिया है, उन्हें अधिक अंक आने पर अनारक्षित सीटों पर माइग्रेशन का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।
‘दोहरा आरक्षण’ का सवाल: अनारक्षित वर्ग की ओर से दलील दी गई कि अभ्यर्थियों ने टीईटी और सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण/छूट का लाभ लिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि जब टीईटी केवल पात्रता परीक्षा है तो इसे दोहरा आरक्षण कैसे माना जा सकता है?
आरक्षित वर्ग का पक्ष: आरक्षित वर्ग की ओर से यह तर्क है कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य मेरिट में निर्धारित अंक प्राप्त करता है तो उसे सामान्य श्रेणी में स्थान मिलना चाहिए और उसकी आरक्षित सीट दूसरे पात्र अभ्यर्थी के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। इसी मुद्दे पर 13 अगस्त 2024 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में नई मेरिट बनाने का निर्देश दिया गया था।
छूट बनाम आरक्षण: सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि रिलैक्सेशन को आरक्षण नहीं माना जा सकता, जबकि चयनित अनारक्षित वर्ग की ओर से उम्र, फीस और अंकों में मिली छूट को आरक्षण की श्रेणी में मानने की दलील दी गई।
नौकरी कर रहे शिक्षकों का मुद्दा: अनारक्षित वर्ग के चयनित शिक्षकों की ओर से कहा गया कि वे करीब छह वर्षों से सेवा में हैं और भर्ती प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। हाईकोर्ट का 13 अगस्त 2024 का फैसला लागू होने पर बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
सरकार का रुख: राज्य सरकार पहले ही अदालत के समक्ष कह चुकी है कि वह वर्षों से कार्यरत चयनित शिक्षकों को हटाने के पक्ष में नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि मौजूदा शिक्षकों को नहीं हटाया जाता, तो आरक्षण से प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय कैसे मिलेगा।
मामले में कई पहलू: सुप्रीम कोर्ट ने विवाद से जुड़ी याचिकाओं को अलग-अलग श्रेणियों में सुनने की व्यवस्था की है। इनमें सेवारत अनारक्षित शिक्षक, आरक्षण विवाद, बीएड/डीएलएड/बीटीसी अभ्यर्थी, दोहरे आरक्षण का मुद्दा, उत्तरकुंजी, पूर्व सैनिक, जिला आवंटन और ईडब्ल्यूएस से जुड़े मामले शामिल हैं।
अगली सुनवाई: 16 सितंबर की सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
69 हजार भर्ती का विवाद अब केवल आरक्षण के प्रतिशत तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य प्रश्न यह भी है कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमों के अनुरूप उनका अवसर कैसे मिले और दूसरी ओर वर्षों से कार्यरत चयनित शिक्षकों के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही अदालत इस पर अंतिम निर्णय करेगी।
69000 शिक्षक भर्ती : सभी पक्ष को 5 पेज में दलील देने का सुप्रीम निर्देश, कल नहीं हुई सुनवाई, अब 16 सितंबर को होगी
10 सितंबर 2026
नई दिल्ली। यूपी 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में कथित आरक्षण घोटाले को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई स्थगित हो गई। जस्टिस एस वी एन भट्टी की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की शुरुआत में कहा कि एक नोट दाखिल किया जाए जिस पर बोलना है। कभी कोई फाइल, कभी कोई फाइल, ऐसे नहीं चलेगा।
कोर्ट ने वादी तथा प्रतिवादी की तरफ से मौजूद वकीलों को निर्देश दिया कि एक ही पक्ष की ओर से बहस करने वाले सभी अधिवक्ता मिलकर शनिवार तक एक कंपाइलेशन (मुख्य तर्कों और दस्तावेजों का संक्षिप्त संकलन) दाखिल करें तथा इसके बाद रविवार तक सभी पक्षों को 5 पेज का कंपाइलेशन देना होगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आगे की बहस इसी कंपाइलेशन के आधार पर होगी। इसके अलावा प्रत्येक पक्ष की ओर से एक ही लिखित दलील और कंपाइलेशन दाखिल किया जाएगा। अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
किसी भी चयनित शिक्षक को हटाने के पक्ष में नहीं सरकार, 69000 शिक्षक भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम बहस शुरू
69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई शुरू
अनारक्षित वर्ग ने कहा-हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रखा तो चली जाएगी हमारी नौकरी
तीन दिनों तक सभी पक्षों की दलीलें सुनेगी दो सदस्यीय पीठ, आज भी चलेगी सुनवाई
9,500 लोगों को समायोजित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने दिया है स्टेटस रिपोर्ट में
8 सितंबर 2026 8:PM
नई दिल्ली। नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में लंबित अपीलों पर मंगलवार को नए सिरे से बहस शुरू हुई। अनारक्षित वर्ग की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का विरोध किया गया और नौकरी की दुहाई देते हुए कहा गया कि अगर हाई कोर्ट का आदेश लागू किया जाएगा तो वे लोग नौकरी से बाहर हो जाएंगे। हाई कोर्ट ने चयन सूची रद कर दी थी और राज्य सरकार को मूल चयन सूची में आरक्षण के सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के भीतर नए सिरे से चयन सूची बनाने का आदेश दिया था। जबकि, आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल कर रखी हैं। बहस बुधवार को भी जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें अनारक्षित वर्ग ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश को चुनौती दी गई है। मंगलवार को न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की दो सदस्यीय पीठ ने मामले में नए सिरे से सुनवाई शुरू की। शुरुआत में पक्षकारों ने कोर्ट को बताया कि इससे पहले मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने पक्षकारों की सहमति पर राज्य सरकार से सुझाव मांगा था कि क्या जो लोग नौकरी कर रहे हैं, उन्हें हटाए बगैर प्रदेश सरकार आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नौकरी में समायोजित कर सकती है।
कोर्ट ने संकेत दिया था कि अगर ऐसा हो सकता है तो कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आदेश पारित कर सकता है। कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि वह 9,500 लोगों को समायोजित कर सकती है। राज्य सरकार ने इसकी सूची भी दी थी, जिसमें 4,946 ऐसे उम्मीदवार शामिल थे, जो चयन की मेरिट सूची में शामिल थे और जिन्होंने पूर्व में नियुक्ति का विकल्प अपनाया नहीं था।
उसी वक्त उन 4,946 लोगों को चयन सूची में शामिल करने पर कुछ पक्षकारों और आरक्षित वर्ग ने सवाल उठाया था, क्योंकि इससे आरक्षित वर्ग का नौकरी पाने का अवसर कम हो रहा था। यह मुद्दा मंगलवार को फिर उठाया गया। पीठ ने कहा कि वह इस मामले की नए सिरे से सुनवाई करेगी और सभी पक्षों को बहस का मौका दिया जाएगा। लगातार तीन दिन मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सुनवाई होगी। इस दौरान बीएड वालों को योग्य माने जाने पर भी बहस हुई। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का मुद्दा भी उठा।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मुद्दा भी उठा : सुनवाई के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के आरक्षण का मुद्दा भी उठा। राज्य सरकार ने कहा कि इस भर्ती में ईडब्ल्यूएस का कोई विवाद नहीं है। हाईकोर्ट इस मुद्दे को खारिज कर चुका है। सुनवाई बुधवार को जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में 69000 शिक्षक भर्ती में सुनवाई आज
8 सितंबर 2026
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 8 सितंबर की सुनवाई है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। सुनवाई को लेकर आरक्षण से प्रभावित अभ्यर्थियों को काफी उम्मीद है।
लंबे समय से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी भर्ती में आरक्षण नियमों के सही तरीके से अनुपालन, पूर्व में जारी 6800 अभ्यर्थियों की सूची और छूटे हुए पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने बताया कि इस मामले में उनके और विभिन्न पक्षों की ओर से की गई मांगों तथा उनकी प्रेयर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं।
ऐसे में सुनवाई के दौरान कोर्ट हर कैटेगरी से जुड़े मुद्दों को अलग-अलग आधार पर सुन सकती है। महत्वपूर्ण यह है कि अलग-अलग कैटेगरी बनाने के कारण संबंधित पक्षों को अपने-अपने दावे और आपत्तियां न्यायालय के समक्ष रखने का अवसर मिल सकता है।
69000 शिक्षक भर्ती को लेकर जारी अदालती विवाद को सुप्रीम कोर्ट स्थायी रूप से निपटाने के मूड में, 8, 9 और 10 सितंबर को लगातार तीन दिन होगी सुनवाई
69000 शिक्षक भर्ती : आठ सितंबर से लगातार 3 दिन होगी सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अभ्यर्थियों के भविष्य को लंबे समय तक अधर में नहीं रखा जा सकता
11 अगस्त 2026
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को साफ शब्दों में कहा कि अभ्यर्थियों के भविष्य पर फैसला जल्द होना चाहिए। इसे लंबे समय तक नहीं लटका सकते। शीर्ष अदालत मामले की आठ सितंबर से लगातार तीन दिन सुनवाई करेगा।
जस्टिस एवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा, अभ्यर्थी लंबे समय से दुविधा की स्थिति में हैं। उनके भविष्य को लंबे समय तक अधर में नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से इस मामले को लेकर आवेदनकर्ताओं, वादी और प्रतिवादियों की श्रेणियां, उनकी आपत्तियां और मांगों का समूह तैयार करने के लिए कहा। सरकारी वकील से दो सप्ताह में ऐसी सूची तैयार करने के लिए कहा गया है, जिसमें यह निश्चित हो कि किन किन पक्षों को किन-किन मसलों पर सुना जाना है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सभी पक्षों को सुना जाएगा।
शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार के पहले दिए सीटों के आंकड़ों को वह नहीं मानेगा। अब अंकित गोयल 18 अगस्त तक केस को 3 कैटेगरी में बांटकर रिपोर्ट देंगे। इसमें 'आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थी', 'हाईकोर्ट में याची नहीं रहे अभ्यर्थी' और '13 अगस्त 2024 के लखनऊ डबल बेंच के आदेश से प्रभावित अभ्यर्थी' की कटैगरी शामिल है। शीर्ष अदालत इसकी श्रेणीवार 8, 9 और 10 सितंबर को सुनवाई करेगा, जिससे तय हो सके कि न्याय का सबसे पहले दावा किसका है।
नोडल काउंसलर हटाए गए
इस बीच पीठ ने नोडल काउंसलर मंदीप कालरा को तुरंत हटा दिया। उनकी जगह राज्य सरकार के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) अंकित गोयल को नया नोडल काउंसलर बना दिया।
यूपी की 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा - सभी पक्ष सहमत हों तो समाधान के लिए करेंगे असाधारण शक्तियों से फैसला
69,000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगे सुझाव
28 जुलाई 2026
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से सुझाव मांगे हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर दोनों पक्ष एकमत होते हैं तो कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 में मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करके अगली सुनवाई पर चार अगस्त (मंगलवार) को केस निस्तारित कर देगा। अगर दोनों पक्ष एकमत नहीं हुए और उनमें मतभिन्नता रही तो कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध लंबित याचिकाओं की मेरिट पर सुनवाई करेगा।
जस्टिस दीपांकर दत्ता एवं जस्टिस शील नागू की पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही। कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर सभी पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले को 28 जुलाई को अंतिम सुनवाई के लिए लगा दिया था। लेकिन मंगलवार को मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि उन्हें सभी पक्षों की लिखित दलीलें अभी प्राप्त नहीं हुई हैं, इसके लिए कोर्ट ने पक्षकारों को बुधवार तक का समय और दे दिया।
इसी बीच आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील ने कोर्ट से कहा कि वह पिछली सुनवाई पर भी कह चुके हैं और अब भी उनका यही कहना है कि जब प्रदेश सरकार के पास रिक्तियां हैं तो उन्हें नौकरी में समायोजित करके केस निस्तारित कर दिया जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल की गईं लिखित दलीलों में दिए ब्योरे और पिछली सुनवाइयों पर दिए गए आंकड़ों का हवाला दिया।
69000 शिक्षक भर्ती : राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया शपथपत्र, पहले से नियुक्त 67867 शिक्षक प्रभावित नहीं होंगे, आज होनी है सुनवाई, आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों ने मांगा याची लाभ
27 जुलाई 2026
लखनऊ। 69 हजार शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में राज्य सरकार ने सोमवार को फिर अपना चार पेज का शपथपत्र दाखिल किया है। इसमें 20 जुलाई को दाखिल शपथपत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में संशोधित मेरिट सूची में स्थान पाने वाले पात्रों को पहले से नियुक्त 67867 शिक्षकों को प्रभावित किए बिना समायोजित किया जा सकेगा।
यह समायोजन मौजूदा खाली पदों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। संबंधित अभ्यर्थी न्यूनतम निर्धारित योग्यता पूरी करते हो। इसे भविष्य के मामलों में कोई नजीर नहीं माना माना जाए। इस मामले में न्यायालय जो भी निर्देश देगा, राज्य उसका पालन करने के लिए तैयार है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 28 जुलाई को होनी है।
वहीं आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों में सरकार के इस शपथपत्र से नाराजगी है। उन्होंने कहा कि भर्ती में जितने भी आरक्षण प्रभावितयाची हाईकोर्ट सिंगल बेंच से डबल बेंच तक हैं। उन्हें याची लाभ देकर यह मामला निस्तारित किया जाए। इस भर्ती की मूल चयन सूची सार्वजनिक की जाए।
69000 शिक्षक भर्ती : सुप्रीम कोर्ट ने नहीं स्वीकारी यूपी सरकार की सूची, सरकार ने 8270 अभ्यर्थियों की सूची दी, आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों का किया उल्लेख
22 जुलाई 2026
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़ी गड़बड़ियों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश की गई उस सूची पर सवाल उठाए, जिसमें करीब 8270 अभ्यर्थियों के आरक्षण से जुड़ी त्रुटियों का जिक्र है। सुप्रीम कोर्ट ने सूची को अभी अंतिम मानने से इन्कार कर दिया।
अदालत ने सभी पक्षों से कहा कि वे 2020 से अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ, इसका पूरा घटनाक्रम लिखकर सोमवार तक अदालत में जमा करें। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने संशोधित कटऑफ का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, पूरी चयन सूची को फिर से तैयार करने पर अनारक्षित वर्ग की कटऑफ 69.42, ओबीसी की 65.92, एससी की 60.14 और एसटी की 56.09 बनती है।
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे, मनीष गोस्वामी, आरके सिंह और पुष्कर शर्मा ने सरकार के हलफनामे और सूची पर कहा कि सरकार की सूची पारदर्शी नहीं है और जब तक पूरी मूल चयन सूची सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक यह तय नहीं किया जा सकता कि गड़बड़ी कितनी सीटों पर हुई है।
69000 शिक्षक भर्ती मामले में 9500 और लोगों को समायोजित कर सकती है उप्र सरकार, एक नई सूची तैयार करके हलफनामे के साथ सुप्रीम कोर्ट में की दाखिल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम सबकी दलीलों पर करेंगे विचार, अगली सुनवाई मंगलवार को
69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में पक्षकारों को सरकार के हलफनामे पर आपत्ति
21 जुलाई 2026
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में 2018 की 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में नियुक्ति का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण फिर जगी है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 9500 और लोगों को नौकरी में समाहित किया जा सकता है। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में एक नई सूची तैयार करके हलफनामे के साथ कोर्ट में दाखिल की।
हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने प्रदेश सरकार के हलफनामे पर सवाल उठाया और शुरुआत में नौकरी का आफर स्वीकार नहीं करने वाले 4946 उम्मीदवारों को फिर नई सूची में शामिल किये जाने पर आपत्ति उठाई। कोर्ट ने भी राज्य सरकार से पूछा कि जिन्हें पहले आफर दिया गया था और उन्होंने स्वीकार नहीं किया था तो उन्हें नई सूची में क्यों शामिल किया गया। इस पर राज्य सरकार का कहना था कि कोर्ट कहेगा तो वे उन्हें हटा देंगे लेकिन वे मेरिट में ऊपर थे इसलिए सूची में शामिल किया।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें मेरिट पर सुनने की बात कहते हुए मामले को अगले मंगलवार फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया है। इस बीच पक्षकारों को लिखित दलीलें और संक्षिप्त नोट दाखिल करने को कहा गया है। कोर्ट ने कहा, भले ही बहुत सारे पक्षकार हों लेकिन वो दोनों तरफ से पांच-पांच वकीलों और एक वकील अर्जी दाखिल करने वालों की ओर से सुनेगा।
ये निर्देश जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले पर सुनवाई के दौरान दिए। पूर्व सुनवाई में 2020 से नौकरी पाने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनकी मांग ये नहीं है कि जो लोग नौकरी कर रहे हैं उन्हें हटा दिया जाए, उनकी मांग तो ये है कि उन्हें भी नौकरी दी जाए, वे 2020 से कोर्ट दर कोर्ट भटक रहे हैं। इस पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या वह और लोगों को समायोजित कर सकती है।
पिछली सुनवाई में प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वो उन लोगों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार, मूल चयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं। प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगा।
हर जिले से अलग-अलग विज्ञापन क्यों जारी नहीं हुए, भर्ती जिलावार तो प्रदेश स्तर पर क्यों जारी हुई सूची : 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट का सवाल
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