अब मई और जून में चलेगा स्कूल चलो अभियान

  • बदल गया स्कूल चलो अभियान का तरीका
  • पहले 15 अप्रैल से हो जाती थी अभियान की शुरुआत
  • ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्यों तथा ग्राम प्रधानों के साथ बैठकें की जाएंगी
  • स्कूलों में जुलाई तक बच्चों को दाखिला दिया जाएगा
लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूल चलो अभियान का तरीका बदल दिया है। अब स्कूल खुलने से ठीक पहले यानी मई के आखिरी सप्ताह से लेकर 20 जून तक इसे चलाया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों में जुलाई तक बच्चों को दाखिला दिया जाएगा। पहले 15 अप्रैल से स्कूल चलो अभियान की शुरुआत हो जाती थी। उच्चाधिकारियों का मानना है कि मई के आखिरी सप्ताह से लेकर जून तक इस अभियान के चलने का फायदा स्कूलों में दाखिले के रूप में दिखेगा। दो माह पहले अभियान चलाने का अधिक लाभ नहीं होगा।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम में 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी परिषदीय स्कूलों में बच्चों को दाखिला देने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाया जाता है।

इस अभियान के अंतर्गत शिक्षक व शिक्षा मित्र घर-घर जाकर बच्चों के अभिभावकों से मिलते हैं और 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाते है। इस बार अभियान की शुरुआत होने से पहले विद्यालय प्रबंध समिति के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों से पांच वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों की सूची ली जाएगी। घर-घर संपर्क के दौरान उसके बाहर इसकी तारीख अंकित की जाएगी। प्राथमिक स्कूलों में कक्षा 2, 3, 4 व 5 में प्रोन्नत पाने वाले बच्चों के नाम एकत्र किए जाएंगे। स्कूल चलो अभियान का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्यों तथा ग्राम प्रधानों के साथ बैठकें की जाएंगी। साथ ही ग्राम व वार्ड शिक्षा समिति तथा विद्यालय प्रबंध समिति की बैठकें की जाएंगी ताकि स्कूलों में दाखिला लेने से कोई बच्चा छूट न जाए।


खबर साभार : अमर उजाला


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शिक्षकों की भर्ती पर आज साफ हो जाएगी तस्वीर

  • सचिव बेसिक शिक्षा डायट प्राचार्यों व बीएसए से करेंगे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
  • डायट प्राचार्यों व बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भेज गए निर्देश
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 72,825 शिक्षकों की भर्ती पर गुरुवार को तस्वीर साफ होने की संभावना है। सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) प्राचार्य और बेसिक शिक्षा अधिकारियों से गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने इस संबंध में डायट प्राचार्यों व बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भेज दिए हैं।
 
उन्होंने कहा है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान नवंबर 2011 में हुए विज्ञापन के आधार पर जिलों में आए कुल आवेदनों की संख्या और डायट स्तर पर प्राप्त आवेदन पत्रों में बचे आवेदन पत्रों की संख्या के बारे में पूरी जानकारी ली जाएगी। इनमें से कितने कंप्यूटर में फीड हैं और कितने नहीं, इसका भी विवरण होना चाहिए।
डायट प्राचार्यों से यह भी पूछा जाएगा कि आवेदन पत्रों में कितनों की स्कैनिंग हो चुकी है। आवेदन पत्रों से प्राप्त शुल्क की कुल राशि ब्याज के साथ कितनी हो चुकी है, यह भी पूछा जाएगा।
 
आवेदकों की मांग पर कुल कितनी राशि वापस की गई? आवेदन पत्रों की डाटा एंट्री किस एजेंसी से कराई जा रही है और डाटा फीडिंग किस फॉर्मेट पर हुआ है? जो डाटा फीड हो चुका है वह डायट पर सुरक्षित है या संबंधित एजेंसी के पास? शेष आवेदन पत्रों की डाटा एंट्री कब तक पूरी हो जाएगी? डायट प्राचार्य व बीएसए इन जानकारियों के साथ संबंधित जिले के एनआईसी सेंटर पर गुरुवार सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक उपस्थित रहेंगे।


खबर साभार : अमर उजाला

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29 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए जाएँगे कोर्ट : एकेडमिक रिकार्ड के आधार पर भर्ती की मांग



खबर साभार :  हिन्दुस्तान


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मनमाने तरीके से बढ़ा दिया जिला समन्वयकों का कार्यकाल

  • दर्जनों ऐसे भी जो दस साल से हैं प्रतिनियुक्ति पर तैनात
  • राज्य परियोजना निदेशालय भी अछूता नहीं

लखनऊ। सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत जनपदीय कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात जिला समन्वयकों का कार्यकाल मनमाने तरीके से बढ़ा दिया गया है। जबकि नियमानुसार तीन साल तक व्यक्ति प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर सकता है। उसके बाद दो साल और बढ़ाने के लिए भी मुख्य सचिव की अनुमति के बाद ही कार्यकाल बढ़ाए जाने का नियम है। बावजूद इसके प्रदेश में 130 जिला समन्वयकों का कार्यकाल 1 अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2015 तक बढ़ा दिया गया। इस संबंध में राज्य परियोजना निदेशक हरेंद्र वीर सिंह ने आदेश भी जारी कर दिया।

दरअसल, जनपदीय कार्यालय में अस्थायी रूप से जिला समन्वयकों के पद सृजित हैं। इन पर प्रतिनियुक्ति पर जिला समन्वयकों की तैनाती किए जाने का नियम है। इनमें जिला समन्वयक प्रशिक्षण, बालिका शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता तथा विशेष प्रशिक्षण शामिल हैं। इसके लिए अधिकतम पांच साल की अवधि निर्धारित है। इसमें भी दो साल मुख्य सचिव की अनुमति से ही बढ़ाए जा सकते हैं। लेकिन राज्य परियोजना कार्यालय में इस नियम के बिना ही जिला समन्वयकों का कार्यकाल बढ़ा दिया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो 130 जिला समन्वयकों की सूची में दर्जनों ऐसे हैं जो दस-दस साल से उसी पद पर तैनात हैं। लेकिन अफसरों के काफी करीबी होने की वजह से उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया। जबकि पांच साल से ऊपर कार्यकाल पूरा होने के बाद उसे बढ़ाने की व्यवस्था नहीं है।

मनमाने तरीके से बढ़ाए गए जिला समन्वयकों का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद विवादों से घिरा राज्य परियोजना कार्यालय भी इससे अछूता नहीं है। इस कार्यालय में भी कई ऐसे विशेषज्ञ या प्रशासनिक पद पर तैनात अधिकारी हैं जिनका प्रतिनियुक्ति का पांच साल पूरा कर चुके हैं। लेकिन अपने मूल विभाग जाने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि उच्च स्तर पर सेटिंग के चलते इनका कार्यकाल हर साल बढ़ा दिया जाता है।


खबर साभार :  डेली न्यूज एक्टिविस्ट


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सेवानिवृत्तिक लाभ एवं नवीन पेंशन योजना के संबंध में आदेश










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