कस्तूरबा में पुराने शिक्षकों को मिलेगा भारांक का लाभ, विज्ञान गणित वाले पुरुष फिर भी रहेंगे वंचित

कस्तूरबा  में पुराने शिक्षकों को मिलेगा भारांक का लाभ, विज्ञान गणित वाले पुरुष फिर भी रहेंगे वंचित


कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में संविदा शिक्षकों को इस वर्ष भारांक का लाभ दिया जाएगा। शर्त यह है कि वर्ष 2020-21 में वह केजीबीवी में न पढ़ा रहे हों। प्रतिवर्ष सेवा के दो अंक दिए जाएंगे। इस संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने आदेश जारी कर दिया है। इससे लगभग ढाई हजार उन शिक्षकों को फायदा मिलेगा, जो नए नियमों के तहत बाहर हो गए हैं।


पुरुष शिक्षकों को फिर भी नहीं मिलेगा लाभ

यह आदेश कुछ शिक्षकों को तो लाभ दे सकता है लेकिन विज्ञान-गणित विषय के पुरुष शिक्षकों को इस भारांक का कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। नए नियमों को राज्य सरकार ने 2020-21 के सत्र में लागू किया था। नियमों के अनुसार विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, हिन्दी-अंग्रेजी विषयों के लिए पूर्णकालिक शिक्षक होना चाहिए। 


केजीबीवी में पूर्णकालिक के तौर पर महिला शिक्षिकाएं रखी जाती हैं, जबकि इससे पहले विषयों को अंशकालिक या पूर्णकालिक से नहीं जोड़ा गया था। लिहाजा, वे पुरुष शिक्षक जो केजीबीवी में पूर्णकालिक के लिए तय किए गए विषयों को पढ़ा रहे थे तो वे इस रेस से बाहर हो गए और उनकी संविदा खत्म हो गई। इस वर्ष भारांक देने के निर्देश हैं लेकिन उन्हें इस भारांक का कोई फायदा नहीं मिलेगा। यदि वे दूसरे विषय पढ़ाने की पात्रता रखते हैं तो उन्हें अंशकालिक के तौर पर नियुक्ति दी जा सकती है। ऐसे 1500 से 1700 शिक्षक हैं, जो उन विषयों को पढ़ा रहे थे, जिन्हें पूर्णकालिक के लिए तय किया गया है।
 

नए नियमों को लागू करते हुए सरकार ने वर्षों से पढ़ा रहे पुरुष शिक्षकों को सड़क पर खड़ा कर दिया है। विभाग ने भर्तियों के लिए विज्ञापन निकालना शुरू कर दिया है। हमारा मामला हाईकोर्ट में है। हमें पूरी उम्मीद है कि सभी शिक्षकों को न्याय मिलेगा। -अतुल कुमार बंसल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, केजीबीवी शिक्षक-शिक्षणेत्तर यूनियन
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