एक अंक से लंबित 69000 शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट नाराज, 05 वर्ष से लंबित मामले में बेसिक शिक्षा सचिव को निर्देश- "आदेश का पालन करें अन्यथा हाजिर रहें ताकि शुरू हो सके अवमानना की कार्रवाई"

एक अंक से लंबित 69000 शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट नाराज, 05 वर्ष से लंबित मामले में बेसिक शिक्षा सचिव को निर्देश- "आदेश का पालन करें अन्यथा हाजिर रहें ताकि शुरू हो सके अवमानना की कार्रवाई"

प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 शिक्षक भर्ती में एक अंक के मामले को लेकर बेसिक शिक्षा परिषद में न्यायिक आदेशों की जानबूझकर की जा रही अवहेलना को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर या तो कोई राहत/अनुकूल आदेश पेश करें, अन्यथा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें ताकि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सके। यह आदेश न्यायमूर्ति पीयूष ने अरुण प्रताप सिंह परमार की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।


सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा सचिव के दो नवंबर के निर्देश पेश कर बताया गया कि इसी प्रकार का मामला सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (रवि कुमार सक्सेना बनाम उप्र राज्य) में विचाराधीन है, जिसकी सुनवाई 18 नवंबर को तय है। विभाग का कहना था कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से फैसला नहीं आ जाता, तब तक परिषद स्तर से अंतिम सूची जारी करना या कोई नई कार्रवाई करना संभव नहीं है। 

याची के अधिवक्ताओं मुनिराज मौर्य, राहुल यादव व सुधांशु कुमार मिश्र ने विभाग की इस दलील का विरोध करते हुए बताया कि लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन एक अन्य अवमानना मामले में जब सुप्रीम कोर्ट ने अवमाननाकर्ता अधिकारी से पूछा था कि बिना किसी स्टे के हाईकोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया, तब विभाग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए अभ्यर्थी विवेक कुमार सिंह को नियुक्ति प्रदान कर दी थी।

न्यायाधीशों की खंडपीठ ने अभिषेक श्रीवास्तव व अन्य की विशेष अपील पर 25 अगस्त 2021 के आदेश में शैक्षिक परिभाषा वाले प्रश्न पर प्रभावित अभ्यर्थियों को एक अंक बढ़ाते हुए मेरिट के अनुसार चयन करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में सरकार ने विशेष अनुमति याचिका की, जिसे सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया। 22 दिसंबर 2022 को सरकारी निर्देशों के क्रम में सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने एक अंक के विवाद से प्रभावित 2249 अभ्यर्थियों की प्रामाणिक सूची तैयार कर आवश्यक कार्रवाई के लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को आधिकारिक तौर पर प्रेषित की।

 नियमानुसार इस सूची में शामिल अभ्यर्थियों के गुणांक और भारांक के आधार पर मेरिट तैयार कर कट-ऑफ के दायरे में आने वाले हजारों योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जानी चाहिए थी। लेकिन हजारों पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों को दरकिनार करते हुए बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा पारदर्शी नियुक्तियां करने की बजाय मात्र एकल अभ्यर्थी को श्रावस्ती जिले में नियुक्ति का लाभ दिया गया, जबकि इससे अधिक योग्यता रखने वाले हजारों मेधावी अभ्यर्थी अब भी वंचित हैं। वर्तमान में विधिक रूप से इस आदेश में कोई रोक नहीं है।

दोनों पक्षों की दलीलों और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड से यह साफ झलकता है कि कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की गई है। बेसिक शिक्षा परिषद की मोहलत मांगे जाने पर मामले की अगली सुनवाई एक दिसंबर को तय की है।
एक अंक से लंबित 69000 शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट नाराज, 05 वर्ष से लंबित मामले में बेसिक शिक्षा सचिव को निर्देश- "आदेश का पालन करें अन्यथा हाजिर रहें ताकि शुरू हो सके अवमानना की कार्रवाई" Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2 on 5:58 AM Rating: 5

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