महानिदेशक स्कूल शिक्षा की अध्यक्षता में दिनांक 06 अगस्त 2022 को वीडियों कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों जिला समन्वयक निर्माण तथा जिला समन्वयक (एम0आई0एस0) की बैठक का कार्यवृत्त।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा की अध्यक्षता में दिनांक 06 अगस्त 2022 को वीडियों कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों जिला समन्वयक निर्माण तथा जिला समन्वयक (एम0आई0एस0) की बैठक का कार्यवृत्त।

ऑपरेशन कायाकल्प में नौ जिले सबसे पिछड़े, 452 विद्यालयों की प्रतिमाह स्वमूल्यांकन फीडिंग आज तक नहीं

उत्तर प्रदेश में "ऑपरेशन कायाकल्प" में 9 जिलों में नहीं दिखी वांछित प्रगति, जानिए 5 बड़ी बातें

समीक्षा बैठक में हुआ खुलासा : बड़ी संख्या में स्कूलों ने चार वर्षों में अपने बुनियादी ढांचे में किया सुधार, वांछित प्रगति के लिए कदम उठाने के निर्देश 


लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार सूबे में शिक्षा की बेहतरी को लेकर लगातार कदम उठा रही है। कुछ दिनों पहले शासन स्तर पर ऑपरेशान कायाकल्प अभियान शुरू किया गया था जिसका मकसद यूपी में उन जिलों की पहचान करना था जहां प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की हालत काफी खस्ता है। इस बड़े अभियान का नतीजा अब सामने आने लगा है। शासन से जुड़े अधिकारियों की माने तो प्रदेश के नौ जिलों में इन स्कूलों की स्थिति काफी खराब है। ऑपरेशन कायाकल्प के बाद अब सरकार ने इन जिलों के स्कूलों को ठीक करने का काम शुरू कर दिया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में सुविधाओं में सुधार करने की पूरी कोशिश की जा रही है। जल्द ही इसके बेहतर परिणाम मिलेंगे।


नौ जिलों के स्कूलों में नहीं दिखी कोई प्रगति

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि "ऑपरेशन कायाकल्प" के तहत सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सुविधाओं को मजबूत करने में वांछित प्रगति नहीं की है। इन नौ जिलों में महोबा, हाथरस, अमरोहा, अयोध्या, ललितपुर, कानपुर देहात, बस्ती, मथुरा और संत कबीर नगर शामिल हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) और अन्य अधिकारियों के साथ वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से महानिदेशक (डीजी), स्कूली शिक्षा, विजय किरण आनंद की अध्यक्षता में हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इसका खुलासा हुआ है।


711 स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

इसी प्रकार विकास खण्ड की ओर से प्रेरणा पोर्टल पर विद्यालयों का स्वमूल्यांकन प्रत्येक माह किया जाता है। लेकिन प्रदेश के 452 सरकारी स्कूलों की ओर से कोई सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट पेश नहीं की गई. इन स्कूलों में आगरा में 94, कानपुर देहात में 64, गाजीपुर में 30, महोबा में 25, अमेठी में 22, आजमगढ़ में 15 और मैनपुरी जिले में 14 स्कूल शामिल हैं। समीक्षा में यह भी पाया गया कि राज्य में 711 स्कूल ऐसे हैं जिनमें शौचालय, पानी की सुविधा जैसी पहली पांच न्यूनतम सुविधाएं नहीं हैं और 4,211 स्कूलों में शौचालयों में टाइल जैसी अन्य सुविधाओं का अभाव है।


स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने के प्रयास

डीजी, स्कूली शिक्षा, उत्तर प्रदेश, विजय किरण आनंद के मुताबिक, स्कूल सुविधाओं में सुधार के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। "हम 'ऑपरेशन कायाकल्प' के माध्यम से स्कूलों में सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए बीएसए को प्रोत्साहित कर रहे हैं। हमारे पास पूरे यूपी में 1.3 लाख से अधिक स्कूल हैं। और अच्छी संख्या में स्कूलों ने चार वर्षों में अपने बुनियादी ढांचे में सुधार किया है।


संबंधित जिलों के BSA को दिए गए निर्देश

संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। उन्हें जल्द से जल्द सुधार करने को कहा गया है। सरकार की ओर से छह माह के भीतर स्कूलों में पाइप से पानी की सुविधा और बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए। हालांकि समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकारियों के अनुसार चित्रकूट, मऊ, कानपुर देहात, देवरिया, प्रतापगढ़, गोंडा, संत कबीर नगर, बलिया, अमरोहा, उन्नाव और आजमगढ़ जिलों की प्रगति असंतोषजनक पाई गई।


स्कूलों में इन 19 बुनियादी सुविधाओं का होना जरूरी

दरअसल स्कूलों में 19 बुनियादी सुविधाएं को बेहतर करने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प चलाया जा रहा है। इनमें पानी की सुविधा, लड़कों का शौचालय, लड़कियों का शौचालय, शौचालयों में पानी की सुविधा, शौचालयों में टाइलें, विकलांगों के लिए शौचालय, हाथ धोना, कक्षाओं में टाइलें, ब्लैकबोर्ड, रसोई, सफेद धुलाई, रैंप एवं रेलिंग, वायरिंग और बिजली के उपकरण, बिजली, फर्नीचर एवं डेस्क, सबमर्सिबल पंप और चारदीवारी का निर्माण शामिल है।


लखनऊ। प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए चल रहे ऑपरेशन कायाकल्प में नौ जिले सबसे ज्यादा पिछड़े हैं। इनमें अयोध्या, महोबा, हाथरस, अमरोहा, कानपुर देहात, ललितपुर, बस्ती, मथुरा व संत कबीरनगर शामिल हैं। यहां 31 मार्च, 2022 से मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं को बढ़ाने में प्रगति बहुत कमजोर है। विभिन्न जिलों के 452 ऐसे स्कूल हैं, जिनकी अवस्थापना सुविधाओं पर विद्यालय के स्वमूल्यांकन की फीडिंग में प्रेरणा पोर्टल पर कभी नहीं की गई। अन्य मामलों में भी अलग-अलग जिले पिछड़े हैं।


इसका खुलासा बीते दिनों जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों व जिला समन्वयकों की समीक्षा बैठक में हुआ है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने इस पर नाराजगी जताते हुए जल्द कमियां दूर कराने के निर्देश दिए हैं। ऑपरेशन कायाकल्प में 19 अवस्थापना सुविधाओं को सभी परिषदीय विद्यालयों में विकसित करने की कवायद हो रही है।


इसी क्रम में विद्यालयों के स्वमूल्यांकन की फीडिंग प्रेरणा पोर्टल पर कराई जाती है, लेकिन मुख्य रूप से आगरा के 94 कानपुर देहात के 64, गाजीपुर के 30, महोबा के 25, अमेठी के 22, आजमगढ़ के 15 व मैनपुरी के 14 ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं, जिनकी कभी फीडिंग नहीं हुई।


711 विद्यालयों में पांच से ज्यादा सुविधाएं नहीं

पता चला है कि 711 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें 19 में मात्र 0 से 5 अवस्थापना सुविधाएं हैं। 4211 विद्यालयों में 6 से 10 के बीच सुविधाएं हैं। यह स्थिति तब है जब चार वर्षों से ऑपरेशन कायाकल्प चल रहा है।


जल व शौचालय में 11 जिले पीछे

पाइप जल सुविधा और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय सुविधा 31 अगस्त तक किए जाने के निर्देश हैं, लेकिन इसमें 11 जिले पीछे चल रहे हैं। इनमें चित्रकूट, मऊ, कानपुर देहात, देवरिया, प्रतापगढ़, गोंडा, संत कबीरनगर, बलिया, अमरोहा, उन्नाव व आजमगढ़ की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली है। इसके लिए डीएम व सीडीओ के माध्यम से संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा की अध्यक्षता में दिनांक 06 अगस्त 2022 को वीडियों कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों जिला समन्वयक निर्माण तथा जिला समन्वयक (एम0आई0एस0) की बैठक का कार्यवृत्त। Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2 on 6:24 AM Rating: 5

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