कैसे तय कर लिया टीईटी में हुई धांधली : इलाहाबाद हाईकोर्ट
- उच्चस्तरीय कमेटी की जांच पर उठाए सवाल
- कमेटी ने महत्वपूर्ण बिंदुओं की सावधानी से नहीं की समीक्षा
इलाहाबाद
(ब्यूरो)। परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए आयोजित
टीईटी परीक्षा में धांधली की शिकायतों पर गठित उच्चस्तरीय कमेटी की भूमिका
पर हाईकोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं। मंगलवार को इस मसले पर हुई सुनवाई में
जस्टिस सुशील हरकौली व जस्टिस मनोज मिश्र की खंडपीठ ने जानना चाहा कि क्या
हाईपावर कमेटी ने टीईटी में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट तैयार करते समय
अपने मस्तिष्क का उपयोग कर मामले की तार्किक समीक्षा की है, अथवा सरसरी तौर
पर ही पुलिस की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया। खास तौर से जबकि
अभ्यर्थियों का पक्ष कमेटी के द्वारा नहीं सुना गया उसकी जिम्मेदारी और बढ़
जाती है।
कोर्ट ने जानना चाहा है कि कैसे
यह तय कर लिया गया कि टीईटी में धांधली हुई और इसे अब मात्र अर्हता ही माना
जाएगा। कोर्ट ने 3493 उत्तर पुस्तिकाओं के ओएमआर सीट की कार्बन कॉपी और एक
कंप्यूटर हार्डडिस्क जब्त किए जाने का भी हवाला दिया। इसके संबंध में एसपी
रमाबाई नगर ने 10 अप्रैल 2012 को रिपोर्ट दी थी कि मूल ओएमआर सीट के बजाए
उसकी कार्बन प्रति स्कैनर से जांची जा रही थी। न्यायालय ने इस बात हैरानी
जताई कि सिर्फ कार्बन कॉपी मिलने से यह कैसे तय कर लिया गया कि मूल ओएमआर
को नहीं जांचा गया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इसका स्पष्टीकरण नहीं दिया
है। एसपी ने किस आधार पर यह तय किया कि कंप्यूटर स्कैनर ने सिर्फ कार्बन
कॉपियां ही जांची हैं मूल ओएमआर नहीं।
याचियों की ओर से इस संबंध में बताया कि मूल ओएमआर पर बार कोड होता है इसके बिना स्कैनर उत्तर पुस्तिकाएं नहीं जांच सकता |
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(साभार-अमर उजाला)।
कैसे तय कर लिया टीईटी में हुई धांधली : इलाहाबाद हाईकोर्ट
Reviewed by Brijesh Shrivastava
on
7:31 AM
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1 comment:
T e t ko canc. Kar naya parikcha ka ayojan hona chahiye..
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