इलाहाबाद हाईकोर्ट का समायोजन मामले में आदेश: हर स्कूल में कम से कम 2 शिक्षक अनिवार्य, ट्रांसफर प्रक्रिया में हो सख्त निगरानी, देखें हाईकोर्ट ऑर्डर
कोर्ट ने कहा, स्थानांतरण दंडात्मक या भेदभावपूर्ण न हों, भौतिक सत्यापन करना होगा
शिक्षकों का तबादला अब केवल पोर्टल के भरोसे नहीं होगा: हाईकोर्ट
पोर्टल का डेटा केवल एक संकेत माना जाएगा, उसे अंतिम आधार नहीं बनाया जा सकता
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सरप्लस (अतिशेष) शिक्षकों के समायोजन और पुनर्नियोजन को लेकर स्पष्ट किया है कि शिक्षकों का स्थानांतरण डेटा-आधारित और पारदर्शी होना चाहिए, न कि मनमाना। कोर्ट ने टिप्पणी की कि स्थानांतरण दंडात्मक या भेदभावपूर्ण नहीं होने चाहिए, बल्कि इनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा का अधिकार कानून का पालन और छात्रों का शैक्षणिक कल्याण होना चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वर्तमान में यह प्रक्रिया इस तरह अपनाई जाए कि हर विद्यालय में कम से कम दो शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन स्कूलों में पहले से दो शिक्षक मौजूद हैं, वहां फिलहाल कोई नया बदलाव न किया जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने ने सौरभ कुमार सिंह व अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। अपीलार्थियों ने शिकायत की थी कि स्थानांतरण के लिए उपयोग किया जा रहा पोर्टल (यूडीआईएसई) का डेटा अविश्वसनीय और अपारदर्शी है। इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि पोर्टल का डेटा केवल एक संकेत माना जाएगा, उसे अंतिम आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि 30 अप्रैल 2026 तक की छात्र संख्या और शिक्षकों की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन किया जाए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी को संयुक्त रूप से डेटा प्रमाणित करना होगा।
कोर्ट ने महिला शिक्षकों के हितों का ध्यान रखते हुए निर्देश दिया कि यदि किसी महिला शिक्षक को सरप्लस के रूप में स्थानांतरित किया जाता है तो जिला स्तरीय समिति उन्हें पहले उसी ब्लॉक में तैनात करने का प्रयास करें। यदि ऐसा संभव न हो तो उन्हें सड़क मार्ग से जुड़े निकटतम ब्लॉक या उनके निवास के पास वाले स्कूल में प्राथमिकता दी जाए।
छह मई तक सत्यापित डेटा जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। 13 मई तक प्रभावित शिक्षक अपनी आपत्तियां ऑफलाइन माध्यम से डीएम की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति को सौंप सकेंगे। 22 मई को इस मामले की अगली सुनवाई होगी और तब तक पूर्व में दी गई अंतरिम राहत जारी रहेगा।
प्रयागराज, 22 अप्रैल 2026।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सहायक शिक्षकों के स्थानांतरण और अधिशेष शिक्षकों के पुनःस्थापन (redeployment) को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, डेटा-आधारित और नियमसम्मत होनी चाहिए। न्यायमूर्ति श्री सौमित्र दयाल सिंह जी एवं न्यायमूर्ति मैडम स्वरूपमा चतुर्वेदी जी की खंडपीठ ने स्पेशल अपील संख्या 398/2026 में सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
क्या कहा कोर्ट ने?
न्यायालय ने सबसे महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि *प्रत्येक विद्यालय में कम से कम दो शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जब तक यह न्यूनतम व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अन्य प्रकार के स्थानांतरण नहीं किए जाएंगे।
UDISE डेटा पर सवाल, भौतिक सत्यापन अनिवार्य
याचिकाकर्ताओं ने सरकार द्वारा उपयोग किए जा रहे UDISE पोर्टल के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि—
30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों का भौतिक सत्यापन किया जाए, केवल सत्यापित डेटा के आधार पर ही ट्रांसफर और पुनःस्थापन की प्रक्रिया चले
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होगी प्रक्रिया
कोर्ट ने कहा कि 14 नवंबर 2025 के शासनादेश के तहत गठित जिला स्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे, पूरी प्रक्रिया संचालित करेगी।
डेटा का संयुक्त प्रमाणीकरण
प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य, खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
शिक्षकों को मिलेगा आपत्ति दर्ज करने का अवसर
6 मई 2026 तक सभी डेटा वेबसाइट पर अपलोड होंगे
13 मई 2026 तक प्रभावित शिक्षक अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे
समिति सभी आपत्तियों का निस्तारण कर अंतिम निर्णय लेगी
महिला शिक्षकों को विशेष राहत
कोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला अधिशेष शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर पहले उसी ब्लॉक में अन्यथा निकटतम ब्लॉक में तैनात किया जाए, विशेषकर उनके निवास के आसपास।
फिलहाल इन स्कूलों में नहीं होगा बदलाव
जहां पहले से ही 2 शिक्षक कार्यरत हैं, वहां फिलहाल कोई पुनःस्थापन नहीं किया जाएगा।
अंतरिम राहत जारी
कोर्ट ने पूर्व में दी गई अंतरिम सुरक्षा को अगली सुनवाई (22 मई 2026) तक जारी रखा है।
क्या है इस आदेश का असर?
यह आदेश प्रदेश के हजारों शिक्षकों के स्थानांतरण पर सीधा प्रभाव डालेगा। अब बिना सत्यापित डेटा और पारदर्शी प्रक्रिया के कोई भी ट्रांसफर आदेश जारी नहीं किया जा सकेगा।
हाईकोर्ट ऑर्डर 👇
इलाहाबाद हाईकोर्ट का समायोजन मामले में आदेश: हर स्कूल में कम से कम 2 शिक्षक अनिवार्य, ट्रांसफर प्रक्रिया में हो सख्त निगरानी, देखें हाईकोर्ट ऑर्डर
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
on
6:49 AM
Rating:
No comments:
Post a Comment