परिषदीय शिक्षकों के अवकाश आवेदनों का मात्र 7.71 फीसद ही समय पर निस्तारण, सीएम डैशबोर्ड के आंकड़े दे रहे लापरवाही और सुस्ती की गवाही
परिषदीय शिक्षकों के अवकाश आवेदनों का मात्र 7.71 फीसद ही समय पर निस्तारण, सीएम डैशबोर्ड के आंकड़े दे रहे लापरवाही और सुस्ती की गवाही
बीईओ और बीएसए की लापरवाही और लेटलतीफी से शिक्षक भी परेशान और विभाग की मासिक रैंकिंग भी प्रभावित
लखनऊ : शिक्षकों के अवकाश की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई आनलाइन व्यवस्था अब विभागीय लापरवाही और मनमानी की भेंट चढ़ती दिख रही है। तय नियमों के बावजूद अवकाश के अधिकांश आवेदन समय पर निस्तारित नहीं हो पा रहे हैं, जिससे इस डिजिटल व्यवस्था की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। खराब प्रदर्शन के कारण जिलों की रैंकिंग में भी भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के अक्काश प्रबंधन को सरल और जवाबदेह बनाने के लिए मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था लागू की गई थी। नियमों के अनुसार, सीसीएल, मातृत्व अवकाश, अर्जित अवकाश और चिकित्सीय अवकाश सहित सभी आवेदनों का निस्तारण तीन दिनों के भीतर होना अनिवार्य है। जमीनी स्तर पर स्थिति इसके उलट है।
सीएम डैशबोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि फरवरी माह में प्रदेशभर के 6,09,645 शिक्षकों ने आवेदन किया। इनमें से 4,86,067 आवेदन स्वीकृत तो हुए, लेकिन केवल 46,976 आवेदन ही निर्धारित समय सीमा के भीतर निस्तारित किए जा सके। यह कुल स्वीकृत आवेदनों का मात्र 7.71 प्रतिशत है।
अधिकारियों की इस लेटलतीफी से न केवल शिक्षक परेशान हो रहे हैं, बल्कि विभाग की मासिक रैंकिंग भी प्रभावित हो रही है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अपर परियोजना निदेशक राजेंद्र प्रसाद ने सभी जिलों को पत्र लिखकर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
परिषदीय शिक्षकों के अवकाश आवेदनों का मात्र 7.71 फीसद ही समय पर निस्तारण, सीएम डैशबोर्ड के आंकड़े दे रहे लापरवाही और सुस्ती की गवाही
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
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6:39 AM
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