केंद्र का फैसला : बच्चों की सेहत सुधारने को मिड डे मील में परोसा जाएगा मोटा अनाज

Last Modified: Mon, Jun 18 2018. 08:58 IST

  
नए अकादमिक सत्र से स्कूली बच्चों को ‘मिड-डे मील’ में अन्य आहार के साथ ज्वार, बाजरा, कोदो, रागी (मंड़ूवा) और सांवा जैसे मोटे अनाज भी परोसे जाएंगे। कर्नाटक में ‘मिड-डे मील’ में इन मोटे अनाजों के बेहतर परिणामों से उत्साहित केंद्र सरकार इसे सभी राज्यों में लागू करने जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि इससे गरीब परिवारों से आने वाले बच्चों में कुपोषण की समस्या तो दूर होगी ही, बच्चों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आला अधिकारी ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि ‘मिड-डे मील’ में मोटे अनाजों को परोसने का प्रयोग सबसे पहले कर्नाटक में शुरू किया गया था। वहां इसके काफी अच्छे नतीजे सामने आए हैं। हमने देखा कि इससे बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हो रहा है और बतौर भोजन, बच्चे इन्हें काफी पसंद कर रहे हैं। इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण भी हैं कि मोट अनाज स्वास्थ्य के लिए अन्य खाद्यान्नों की तुलना में बेहतर हैं। यह देखते हुए, अब हमने सभी राज्यों में इसे लागू करने का फैसला किया है। जिन राज्यों में कुपोषण की अधिक समस्या है, वहां हम इस पर अधिक जोर दे रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि राज्यों के साथ ‘मिड-डे मील’ को लेकर हो रही प्रोग्राम अप्रूवल बोर्ड की बैठक में इसे लेकर चर्चा की जा रही है और ज्यादातर राज्य खुशी-खुशी इसके लिए तैयार हो रहे हैं।


अधिकारी ने बताया कि राज्य अपने यहां के एक या दो पारंपरिक मोटे अनाज को ‘मिड-डे मील’ का हिस्सा बनाएंगे। राज्यों को इन अनाजों से स्वादिष्ट आहार बनाने के लिए रेसिपी भी जारी की जाएगी। इसके लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च से मदद लेने की योजना है। मालूम हो, मिड-डे मील के लिए जारी वर्तमान रेसिपी दिल्ली के ओबेरॉय होटल के शेफ की ओर से तैयार की गई है। 

कृषि मंत्रालय ने घोषित किया है मिलेट ईयर
मोटे अनाजों के फायदों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2018 को मिलेट ईयर घोषित कर रखा है।      

ज्वार 
मुख्य उत्पादक: उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान
खासियत: कैल्शियम से भरपूर। आयरन, प्रोटीन और फाइबर की भी प्रचुर मात्रा।
कुल उत्पादन: 40.41 लाख टन

बाजरा
मुख्य उत्पादक: उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु।
खासियत: चावल से आठ गुना आयरन। प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम एवं मैग्नीशियम से भरपूर।
कुल उत्पादन: 70.78 लाख टन

रागी
मुख्य उत्पाद: तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश
खासियत: हड्डी मजबूत करने वाले खनिज पदार्थों कैल्शियम एवं फास्फोरस समेत अन्य खनिज पदार्थों से भरपूर 

कोदो: 
मुख्य उत्पादक: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक
खासियत: आसानी से पचने वाला। बीमारियों से बचाने वाले फाइटोकेमिकल एवं एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर। 

सांबा
मुख्य उत्पादक: बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
खासियत: गेंहू से छह गुना ज्यादा फाइबर, कैल्शियम एवं फास्फोरस से भरपूर और अच्छी एंटीऑक्सीडेंट प्रोफाइल 

चुनौतियां
3.65 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से छत्तीसगढ़ में मिलता था 
1000 रुपये महीना रसोइए को मानदेय, जो न्यूनतम मजदूरी से भी कम है

अलग अलग राज्यों में समस्याएं
केंद्र की अप्रेजल रिपोर्ट में कई राज्यों में महिला रसोइया को मानदेय नहीं मिलने की शिकायत
चावल आपूर्ति की राशि लंबित
मासिक व वार्षिक डाटा इंट्री शतप्रतिशत नहीं 
ऑटोमेटिक मॉनीटरिंग सिस्टम के तहत डाटा इंट्री नहीं 
स्कूलों में लकड़ी से मिड डे मील तैयार जाना
मानकों के विपरीत भोजन बनना
बिचौलियों की मदद से अनाज बाजार में बेचना 
रसोईघर का लचर संचालन 

बजट में कोताही
- 12 करोड़ बच्चों को प्रतिदिन खाना मुहैया कराया जाता है दुनिया की इस सबसे बड़ी योजना में  
- 10,000 करोड़ रुपये मिड डे मील में आबंटित हुए 2017-18 के बजट में 

जातिवाद, छुआछुत
कई राज्यों में पिछले दिनों शिकायतें आई थीं कि स्कूलों में दलित समुदाय के बच्चों को अलग खिलाया जाता है। या कई स्कूलों में कच्चा अनाज दे दिया जाता है। 

केंद्र का फैसला : बच्चों की सेहत सुधारने को मिड डे मील में परोसा जाएगा मोटा अनाज Reviewed by Ram Krishna mishra on 9:27 AM Rating: 5

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