निपुण भारत मिशन के अंतर्गत डी०एल०एड० प्रशिक्षुओं के माध्यम से कराये गये आकलन के उपरान्त निपुण विद्यालय परिणाम घोषित करने के संबंध में
निपुण आकलन में हरदोई, अलीगढ़ और शाहजहांपुर अव्वल, लखनऊ और वाराणसी जैसे जिले पिछड़े, देखें जनपदवार निपुण रिपोर्ट
लखनऊ। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 के बच्चों के निपुण आकलन (DIET Led Assessment 2025-26) के ताजा आंकड़ों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने रख दी है। इस मूल्यांकन में हरदोई जिले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि कई बड़े और संसाधन संपन्न जिले अपेक्षा से काफी पीछे रह गए हैं। जारी आंकड़ों के अनुसार हरदोई में सर्वाधिक 1002 विद्यालय निपुण घोषित किए गए, जो प्रदेश में शीर्ष स्थान पर है। इसके विपरीत कई जिलों में निपुण विद्यालयों की संख्या और प्रतिशत दोनों ही चिंताजनक रूप से कम हैं।
सीतापुर जैसे बड़े जिले में 2910 विद्यालयों में से केवल 446 विद्यालय ही निपुण घोषित हो सके। इसी तरह बहराइच में 2414 में से मात्र 307, जौनपुर में 2345 में से 243 और गोंडा में 2137 में से 437 विद्यालय ही निपुण की श्रेणी में आ पाए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि इन जिलों में आधारभूत शिक्षण स्तर पर अभी भी गंभीर सुधार की आवश्यकता है।
अन्य जिलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं कही जा सकती। उन्नाव में 2201 में से 375, आजमगढ़ में 2200 में से 558, कुशीनगर में 2091 में से 676 और प्रयागराज में 2409 में से 808 विद्यालय ही निपुण घोषित किए गए हैं। प्रतिशत के आधार पर भी इन जिलों का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार अलीगढ़, कासगंज और महाराजगंज जैसे कुछ जिलों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए ऊंचा प्रतिशत दर्ज किया है, जबकि कई जिलों में 20 से 35 प्रतिशत के बीच ही निपुण विद्यालयों की हिस्सेदारी सीमित रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि शिक्षण की गुणवत्ता, मॉनिटरिंग व्यवस्था और जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन का आईना हैं। जहां एक ओर हरदोई जैसे जिलों ने बेहतर रणनीति और निगरानी के बल पर सफलता हासिल की है, वहीं अन्य जिलों में प्रशिक्षण, मूल्यांकन और फॉलोअप की कमी साफ दिखाई दे रही है।
शिक्षा विभाग के लिए यह रिपोर्ट एक चेतावनी भी है कि निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और सतत निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। अब देखना होगा कि पिछड़े जिलों में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, ताकि प्राथमिक स्तर पर बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत किया जा सके।
लखनऊ। प्रदेश में डीएलएड प्रशिक्षुओं के माध्यम से कराए गए आकलन में 32480 विद्यालय निपुण विद्यालय के रूप में उभर कर सामने आए हैं। इन विद्यालयों के शिक्षकों को सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा। इन विद्यालयों में निपुण विद्यालय का लोगो भी पेंट कराया जाएगा।
बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा है कि निपुण विद्यालय के शिक्षकों को डीएम-सीडीओ के माध्यम से प्रशंसा पत्र दिया जाए। शिक्षकों का सम्मान समारोह 25 मार्च तक आयोजित किया जाए। इसके लिए प्रति जिले को 50 हजार का बजट भी स्वीकृत किया गया है। आयोजन में जनप्रतिनिधियों को भी बुलाया जाए।
निपुण भारत मिशन के अंतर्गत डी०एल०एड० प्रशिक्षुओं के माध्यम से कराये गये आकलन के उपरान्त निपुण विद्यालय परिणाम घोषित करने के संबंध में
निपुण भारत मिशन के अंतर्गत डी०एल०एड० प्रशिक्षुओं के माध्यम से कराये गये आकलन के उपरान्त निपुण विद्यालय परिणाम घोषित करने के संबंध में
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
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6:49 AM
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