RTE : सिर्फ चार जिलों ने की सभी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति, दिसंबर में जारी बजट का अब तक जिलों ने नहीं किया इस्तेमाल
आरटीई : सिर्फ चार जिलों ने की सभी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति, दिसंबर में जारी बजट का अब तक जिलों ने नहीं किया इस्तेमाल
शासन की सख्ती के बाद मात्र 19 जिलों में आंशिक भुगतान
सिर्फ गौतमबुद्धनगर ने दी पूरी वित्तीय सहायता
अभिभावकों को मिलने वाली वित्तीय सहायता में भी स्थिति चिंताजनक है। केवल गौतमबुद्धनगर जिले ने 100 प्रतिशत भुगतान किया है, जबकि 11 जिलों ने आंशिक भुगतान किया है। शेष 63 जिलों में अभी तक अभिभावकों को यह सहायता नहीं मिली है।
14 मार्च 2026
लखनऊ। प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों को फीस प्रतिपूर्ति और अभिभावकों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता के भुगतान में जिलों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। दिसंबर में बजट जारी होने के बावजूद अधिकांश जिलों ने अभी तक इसका पूरा उपयोग नहीं किया है। शासन की सख्ती के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
13 मार्च तक प्रदेश के केवल - चार जिलों मैनपुरी, प्रतापगढ़, बलिया और प्रयागराज ही ऐसे हैं जिन्होंने सभी स्कूलों को शत प्रतिशत फीस प्रतिपूर्ति कर दी है। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों को प्रवेश लेने वाले प्रत्येक छात्र के लिए 450 रुपये प्रति माह की प्रतिपूर्ति दी जाती है।
इसके अलावा छात्रों के अभिभावकों को किताब, स्टेशनरी आदि के लिए 5000 रुपये सालाना की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। बेसिक शिक्षा विभाग ने दिसंबर में ही जिलों को बजट जारी कर दिया था ताकि समय पर विद्यालयों और अभिभावकों को भुगतान किया जा सके, लेकिन अधिकांश जिलों में प्रगति बेहद धीमी है।
अब तक 19 जिलों गौतमबुद्धनगर, बांदा, सुल्तानपुर, बुलंदशहर, सीतापुर, बागपत, कुशीनगर, बस्ती, गाजियाबाद, गोरखपुर, अंबेडकरनगर, वाराणसी, लखीमपुर खीरी, मेरठ, अमेठी, सिद्धार्थनगर, कन्नौज, आजमगढ़ और संतकबीरनगर ने आंशिक भुगतान किया है।
बेसिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को पत्र भेजकर इस पर नाराजगी जताई है और तत्काल बजट का उपयोग कर भुगतान की सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा 16 मार्च को इस मामले की समीक्षा करेंगे।
RTE : स्कूलों को एक सप्ताह में करें फीस प्रतिपूर्ति, ज्यादातर जिलों में नहीं हुआ भुगतान, मुख्य सचिव ने अपनाया कड़ा रुख
7 मार्च 2026
लखनऊः प्रदेश में निश्शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति में लापरवाही सामने आई है। इस पर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह में अभिभावकों को वित्तीय सहायता और निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 12 (1) शिक्षा को अधिकार (ग) के तहत मान्यताप्राप्त निजी स्कूलों में पढ़ने वाले अलाभित समूह और कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए सरकार की ओर से फीस प्रतिपूर्ति और वित्तीय सहायता दी जानी है। इसके लिए पहले भी बेसिक शिक्षा निदेशक की ओर से दो बार सभी जिलों को निर्देश भेजे गए थे। इसके बावजूद अधिकांश जिलों में भुगतान की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
समीक्षा में सामने आया है कि केवल गाजियाबाद और बागपत जिलों में ही पूरी तरह भुगतान किया गया है, जबकि कुशीनगर में आंशिक भुगतान हुआ है। अन्य जिलों में न तो अभिभावकों को वित्तीय सहायता दी गई और न ही स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि जारी की गई। शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा, बेसिक शिक्षा निर्देशक, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
RTE : सिर्फ चार जिलों ने की सभी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति, दिसंबर में जारी बजट का अब तक जिलों ने नहीं किया इस्तेमाल
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
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5:57 AM
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