मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म देने के बावजूद नही बढ़ रहा रुझान, सरकारी स्कूलों में पांच वर्ष में कम हो गए 23 लाख विद्यार्थी, सुविधाओं और पढ़ाई की गुणवत्ता में कमी से लगातार घट रही संख्या


मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म देने के बावजूद नही बढ़ रहा रुझान, सरकारी स्कूलों में पांच वर्ष में कम हो गए 23 लाख विद्यार्थी, सुविधाओं और पढ़ाई की गुणवत्ता में कमी से लगातार घट रही संख्या।



बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बीते पांच सत्रों में विद्यार्थियों की संख्या में काफी गिरावट हो रही है। इन वर्षों में 23 लाख 62 हजार विद्यार्थी कम हुए हैं।



मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर सरकार 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए 1 से 15 जुलाई तक खूब पढ़ो आगे बढ़ो और 1 जुलाई से 31 जुलाई तक चलो स्कूल अभियान शुरू करने जा रही है। दोनों अभियानों में सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाकर बच्चों को स्कूल भेजना सरकार और विभाग के लिए एक चुनौती है।




2012-13 के सत्र में प्रदेश के 1 लाख 12 हजार से अधिक राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की कुल संख्या 135.12 लाख थी। जबकि 46 हजार से अधिक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में यह संख्या 40.81 लाख थी। लेकिन सुविधाओं के अभाव और शिक्षा की गुणवत्ता में कमी के चलते बच्चों की संख्या लगातार कम होती रही।


तत्कालीन सपा सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए अभियान भी चलाया लेकिन यह बहुत सफल नहीं रहा। 2016-17 में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या घटकर 116.93 लाख रह गई। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में यह संख्या कम होकर 35.38 लाख हो गई।

अभियान बने चुनौती

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार निशुल्क पुस्तकें, यूनिफॉर्म, स्कूल बैग और जूते मोजे भी बांट रही है।


‘खूब पढ़ो आगे बढ़ो’ और ‘स्कूल चलो अभियान’ एक जुलाई से शुरू किए जाएंगे। सांसद, विधायक और ग्राम प्रधान को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों से बच्चों को जोड़कर इनकी तादाद बढ़ाना सरकार और शिक्षा विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है।




⚫ सरकारी स्कूलों के प्रति धारणा बदलनी होगी

आरटीआई कार्यकर्ता समीना बानो का कहना है कि सरकारी स्कूलों को लेकर लोगों की यह गलत धारणा बन गई है कि वहां अच्छी पढ़ाई नहीं होती। ऐसी धारणा बनने का मुख्य कारण विभाग की नीति और सिस्टम है।




सरकारी स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध नहीं होते, वे स्कूल जाते हैं तो पढ़ाई नहीं कराते। इन्हीं वजहों से लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में प्रवेश नहीं दिलाना चाहते। स्कूलों में दाखिले बढ़ाने के लिए यह मानसिकता बदलनी होगी।




⚫ लोगों की धारणा बदलेंगे

बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम सिंह का कहना है कि हम सरकारी स्कूलों को लेकर लोगों की धारणा बदलने का प्रयास करेंगे। हमारे विभाग के अधिकारी और शिक्षक इस धारणा को बदलकर स्कूलों में नामांकन बढ़ाएंगे।



⚫ ये आकड़े बताते हैं शिक्षा का हाल

शैक्षिक सत्र--कक्षा 1 से 5 तक कुल विद्यार्थी--कक्षा 5 से 8 तक कुल विद्यार्थी (लाख में)

2012-13--134.12--40.81

2013-14--130.54--39.76

2014-15--125.50--38.99

2015-16--125.48--37.28

2016-17--116.93--35.38




सरकारी और निजी स्कूल दोनों मिलाकर आंकड़ा

शैक्षिक सत्र--कक्षा 1 से 5 तक कुल विद्यार्थी--कक्षा 5 से 8 तक कुल विद्यार्थी

2012-13--266.71--104.27

2013-14--260.33 --107.88

2014-15--258.08--110.33

2015-16--252.70--111.55

2016-17--238.99--108.07


मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म देने के बावजूद नही बढ़ रहा रुझान, सरकारी स्कूलों में पांच वर्ष में कम हो गए 23 लाख विद्यार्थी, सुविधाओं और पढ़ाई की गुणवत्ता में कमी से लगातार घट रही संख्या Reviewed by Ram Krishna mishra on 7:42 AM Rating: 5

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