139 करोड़ से होगा 1.40 लाख स्कूलों का सेफ्टी आडिट, भूकंप, बाढ़ और जर्जर भवनों पर फोकस, 30-40 साल पुराने स्कूलों की पहले होगी जांच
139 करोड़ से होगा 1.40 लाख स्कूलों का सेफ्टी आडिट, भूकंप, बाढ़ और जर्जर भवनों पर फोकस, 30-40 साल पुराने स्कूलों की पहले होगी जांच
हर स्कूल के लिए आपदा प्रबंधन योजना, बच्चों को मिलेगा अधिक सुरक्षित शिक्षण वातावरण
दो चरण में किया जाएगा आडिट, 545 दिनों का लक्ष्य
16 जून 2026
लखनऊ: प्रदेश के 1.40 लाख से अधिक सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर सेफ्टी आडिट कराया जाएगा। करीब 139 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले इस अभियान के तहत स्कूल भवनों की मजबूती, भूकंप और बाढ़ के खतरे, अग्नि सुरक्षा, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, सड़क सुरक्षा तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का आकलन किया जाएगा। आडिट के आधार पर कमियों की पहचान कर सुधार संबंधी सुझाव दिए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को अधिक सुरक्षित शिक्षण वातावरण मिल सके।
शिक्षा विभाग ने इसके लिए एक अधिकृत एजेंसी का चयन किया है। एजेंसी प्रदेश के कुल 1,40,555 विद्यालयों का सुरक्षा आडिट और जोखिम आकलन करेगी। इसमें पहले चरण में 27,581 राजकीय हाईस्कूल, इंटर कालेज, कंपोजिट विद्यालय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का आडिट 180 दिनों में पूरा किया जाएगा। दूसरे चरण में 1,12,974 परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का आडिट 365 दिनों में किया जाएगा।
कुल 545 दिनों में परियोजना पूरी करने का लक्ष्य है। शिक्षा विभाग पहले भी जर्जर भवनों का सर्वे कराता रहा है, लेकिन इस बार भवनों के साथ-साथ आपदा जोखिम, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा के सभी पहलुओं का समग्र मूल्यांकन होगा। इससे दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा और बच्चों को अधिक सुरक्षित तथा बेहतर शिक्षण वातावरण मिल सकेगा।
1.33 लाख परिषदीय विद्यालय, 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 4,516 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय और 2444 राजकीय माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। परियोजना में 30 से 40 वर्ष पुराने स्कूल भवनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। ऐसे भवनों की दीवारों, छतों और संरचनात्मक मजबूती की विशेष जांच होगी। साथ ही भूकंप संभावित और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के विद्यालयों का आडिट पहले कराया जाएगा।
उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वर्ष 2023 के भूकंप सुरक्षा दिशा-निर्देशों और फ्लड हैजार्ड एटलस के आधार पर जोखिम मूल्यांकन किया जाएगा। भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार प्रदेश के जिले भूकंप जोन-दो, तीन और चार में आते हैं। उच्च जोखिम वाले जोन-चार में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, अमरोहा, रामपुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और कुशीनगर सहित 16 जिले शामिल हैं। आडिट के दौरान हर विद्यालय की आपदा प्रबंधन योजना की भी समीक्षा होगी। जहां ऐसी योजना नहीं होगी या उसमें सुधार की जरूरत होगी, वहां नई योजना तैयार कर स्कूलों को सौंपी जाएगी, जिससे आपदा के समय त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके
1.40 लाख बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों का होगा सुरक्षा ऑडिट, बेसिक-माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बेनेट कोलमैन के साथ किया MOU
30 मई 2026
लखनऊ। प्रदेश के करीब डेढ़ लाख सरकारी और अशासकीय सहायता प्राप्त बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों का सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। इसमें विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक मूल्यांकन होगा। साथ ही जोखिमों की पहचान कर सुधार भी किए जाएंगे।
बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने हाल ही में बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (बीसीसीएल) के साथ एक अनुबंध किया है। यह अनुबंध महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की उपस्थिति में हुआ। इसके तहत 14055 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, समग्र, माध्यमिक और कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों का आकलन होगा।
सभी जिलों में स्थित विद्यालयों का वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों पर मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें विद्यालय भवनों की संरचनात्मक स्थिति की जांच होगी। आग से सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, भूकंप, बाढ़ आदि से संबंधित तैयारियां भी देखी जाएंगी। आपदा प्रबंधन, स्वच्छता सुविधाएं, प्रवेश व निकास व्यवस्था तथा विद्यार्थियों की समग्र सुरक्षा के पहलुओं की जांच होगी।
यह कार्यक्रम केवल सुरक्षा मानकों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। यह विद्यालयों में सुरक्षा जागरूकता और जोखिम प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था विकसित करेगा। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित व अनुकूल माहौल मिलेगा। इस अवसर पर सुरेंद्र कुमार तिवारी, प्रताप सिंह बघेल, कुलदीप पारिक और बृजेश कुमार मिश्रा उपस्थित थे।
139 करोड़ से होगा 1.40 लाख स्कूलों का सेफ्टी आडिट, भूकंप, बाढ़ और जर्जर भवनों पर फोकस, 30-40 साल पुराने स्कूलों की पहले होगी जांच
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
on
6:45 AM
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