हर सरकारी प्राइमरी स्कूल में होगी पोषण वाटिका, खाली पड़ी जमीनों पर बच्चों की मदद से फल और सब्जी उगाने की योजना


जमीन न होने पर स्कूल की छतों पर उगाई जाएंगी सब्जियां

14 Nov 2019
परिषदीय एवं राजकीय प्राथमिक स्कूलांे मंे जमीन न होने पर स्कूल की छतांे, गमलों, मटके एवं बोरों में सब्जियां उगाई जाएंगी। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों मंे स्थित इन स्कूलों मंे किचन गार्डन के अन्तर्गत सब्जियां उगाने की योजना है। किचन गार्डन के लिए पंचायती राज विभाग का सहयोग भी लिया जा सकता है। प्रत्येक विद्यालय को पांच हजार रूपए की धनराशि मुहैया कराई जाएगी।

अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को किचन गार्डन के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। शासन ने कहा है कि आम तौर पर प्राथमिक स्कूलों की काफी भूमि निष्प्रयोज्य रहती है। इसे देखते हुए यहां किचन गार्डन विकसित किए जाएंगे। जिससे छात्रों को एमडीएम में अधिक पोषण परोसा जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों मंे भूमि की पैमाइश के लिए राजस्व विभाग की मदद ली जा सकती है। शहरी क्षेत्रों के स्कूलों मंे जमीन की कमी होने पर छतों, गमलों एवं मटकों मंे सब्जियां एवं फल फूल उगाए जाएंगे। पोषण वाटिका की पहली बार स्थापना करने में ग्राम्य विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग का सहयोग लिया जा सकता है। 

छात्र समूहों को पोषण वाटिका के देखभाल की जिम्मेदारी दी जा सकेगी तथा अभिभावकों का सहयोग लिया जाएगा। शासन ने किचन गार्डन मंे होने वाले व्यय का एक मॉडल स्टीमेट भी तैयार किया है। जिसमें ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों मंे आने वाले व्यय का लेखा जोखा दिखाया गया है। पोषण वाटिका से सम्बन्धित आय व्यय विद्यालय में अलग पंजिका में अंकित किया जाएगा। ग्राम पंचायत द्वारा ग्राम विकास कार्य योजना मंे किचन गार्डन विकसित करने के प्लान को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। 

प्राइमरी स्कूलों की खाली पड़ी जमीनों पर बच्चों की मदद से फल और सब्जी उगाने की योजना

हर सरकारी प्राइमरी स्कूल में होगी पोषण वाटिका

14 Nov 2019
शहरी क्षेत्रों में जहां जमीन मौजूद नहीं है वहां सरकारी प्राइमरी स्कूलों में छत पर, गमलों और जूट बैग आदि में सब्जी व फल उगाया जाएगा। सभी सरकारी प्राइमरी स्कूलों में मिड डे मील के तहत किचन गार्डन बनाने के लिए 5000 रुपये प्रति स्कूल दिया जाएगा। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने आदेश जारी कर दिया है।
आदेश के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध जमीन चिह्नित कर ली जाए। वहीं शहरी क्षेत्रों में जूट व प्लास्टिक के थैलों (ग्रो बैग) में सब्जियों व फलों को उगाया जाए। मॉडल स्टीमेट के मुताबिक, इस पोषण वाटिका को लगाने के लिए गांव में 8050 और शहरों में 10120 रुपये खर्च होंगे। हालांकि पोषण वाटिका के लिए सरकार 5 हजार रुपये ही देगी। बची हुई धनराशि का इंतजाम वार्ड निधि, 14वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग के तहत किया जाएगा। वाटिका तैयार करने के लिए मनरेगा के तहत भी मदद ली जा सकती है।
फलों में तरबूज, खरबूजा और सब्जियों में भी भिंडी, साग, तरोई, टमाटर, प्याज, लहसुन, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी, फूल गोभी आदि उगाने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम के मुताबिक सब्जियों की सूची जारी की गई है लेकिन कहा गया है कि इनके चयन में विद्यार्थियों की मदद ली जाए।
हर क्यारी का हो नाम: पोषण वाटिका के प्रति बच्चों में अपनत्व की भावना जगाने के लिए हर पौधे या वाटिका को गोद लेने का सुझाव दिया गया है। वहां पर बच्चों के नामों की पट्टिका भी लगेगी ताकि वे उसकी देखभाल करें और उनमें पर्यावरण को लेकर जागरूकता पैदा हो।

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