RTE : तैयारी नहीं हुई पूरी जनवरी के अंत में ही आवेदन, बेसिक शिक्षा विभाग नहीं जारी कर सका कार्यक्रम

RTE : तैयारी नहीं हुई पूरी जनवरी के अंत में ही आवेदन, बेसिक शिक्षा विभाग नहीं जारी कर सका कार्यक्रम

तकनीकी व्यवस्था दुरुस्त करने में लग रहा समय

02 जनवरी 2025
लखनऊ। प्रदेश के निजी विद्यालयों में प्रवेश की उम्मीद लगाए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों का इंतजार और बढ़ता जा रहा है। दिसंबर भी बीत गया, लेकिन आरटीई के तहत प्रवेश के लिए कार्यक्रम नहीं जारी किया जा सका है। जानकारी के अनुसार अभी इसमें 15 दिन और समय लगेगा। इसके बाद जनवरी अंत में ही आवेदन शुरू हो सकेंगे।

आरटीई की आवेदन प्रक्रिया पिछले साल एक दिसंबर से शुरू हो गई थी। ऐसे में इस साल भी काफी अभिभावक इसके लिए इंतजार कर रहे हैं। किंतु विभाग इससे जुड़े पोर्टल की तकनीकी समस्याओं और उसको अपडेट करने में काफी समय ले रहा है। इसकी वजह से अभी तक आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का यह भी कहना है कि पिछले सत्र की अपेक्षा निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की निगरानी की प्रक्रिया बढ़ाई जा रही है। यही वजह है कि पोर्टल को अपग्रेड करने में समय लग रहा है।

ऐसे में विभाग आवश्यक औपचारिकता पूरी कर 15 जनवरी तक कार्यक्रम जारी करने की तैयारी में है। इसके बाद जनवरी अंत में ही आवेदन शुरू हो पाएंगे। समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि पोर्टल का अपग्रेडेशन आखिरी चरण में है। जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम जारी कर प्रवेश प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।




RTE अंतर्गत 67 हजार निजी स्कूलों में प्रवेश देने की है तैयारी, पोर्टल अपडेट के चलते आवेदन प्रक्रिया में हो रही देरी

प्री प्राइमरी व पहली कक्षा में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित

17 दिसम्बर 2025
 लखनऊनिश्शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों में दुर्बल और वंचित वर्ग के बच्चों को प्री-प्राइमरी और कक्षा एक में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। हालांकि, इस बार आवेदन प्रक्रिया पिछले सत्र की तुलना में देरी से शुरू हो रही है। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार आरटीई पोर्टल में तकनीकी बदलाव और नए अपडेट किए जा रहे हैं। इन्हीं कारणों से आवेदन प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी।


 इस शैक्षणिक सत्र में प्रदेश भर के करीब 67 हजार निजी विद्यालयों को आरटीई पोर्टल पर मैप किया गया है। इन सभी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के तहत आरक्षित की गई हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र में आरटीई के तहत प्रवेश के लिए एक दिसंबर से आवेदन शुरू हो गए थे, लेकिन इस बार प्रक्रिया देर से शुरू होगी। जबकि नियमों के अनुसार शैक्षणिक सत्र शुरू होने से कम से कम चार महीने पहले आरटीई प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए।

आरटीई में आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह आनलाइन और दो चरणों में सत्यापन के साथ होगी। पहले चरण में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) आवेदन का सत्यापन करेंगे। इसके बाद दूसरे चरण में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अंतिम सत्यापन करेंगे। साथ ही आवेदन के साथ लगाए गए सभी प्रमाणपत्रों का संबंधित विभागों से आनलाइन सत्यापन कराया जाएगा। यदि किसी प्रमाणपत्र का सत्यापन नहीं हो पाया तो आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे आवेदन करते समय सही और वैध प्रमाणपत्र ही अपलोड करें। किसी भी तरह की गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज देने पर बच्चे का आरटीई में प्रवेश रद हो सकता है।




RTE प्रवेश में 50 हजार सीटें बढ़ेंगी, आधार अनिवार्य होगा

लखनऊ । शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में जल्द प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होगी। आरटीई पोर्टल को अपडेट किया जा रहा है और इस पर स्कूलों की फीडिंग का कार्य चल रहा है। अभी तक 67 हजार निजी स्कूलों की मैपिंग की जा चुकी है। पिछले वर्ष यह संख्या 62 हजार थी। ऐसे में इस बार 50 हजार सीटें बढ़ना तय माना जा रहा है।


गरीब परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर मुफ्त दाखिला देने के लिए जल्द आवेदन फॉर्म मांगे जाएंगे। अब आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में प्रवेश लेने वाले बच्चे व उसके अभिभावक का आधार कार्ड से सत्यापन कर उन्हें प्रवेश दिया जाएगा। जिससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। पांच से छह चरण में प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी की जा रही है। अंतिम चरण में छात्रों को अगर उनके वार्ड में सीट रिक्त नहीं है तो अगल-बगल के वार्ड में भी प्रवेश देने पर मंथन किया जा रहा है।


बच्चों को निजी स्कूल प्रवेश दें इसके लिए सभी जिलों में खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को निर्देश दिए गए हैं कि अपने ब्लॉक के एक-एक निजी स्कूल को सूचीबद्ध करें। अगर कोई निजी स्कूल आनाकानी कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करें। पिछले वर्ष 62 हजार निजी स्कूल पंजीकृत थे और 6.20 लाख सीटें थीं। अब स्कूलों की संख्या बढ़कर 67 हजार हो गई है। ऐसे में 50 हजार सीटें बढ़ रही हैं।
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