केंद्र सरकार ने सेवारत शिक्षकों के अनिवार्य टीईटी मुद्दे पर राज्यों से 16 जनवरी तक मांगी रिपोर्ट, शिक्षा मंत्रालय ने पूछा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उनके राज्य से कितने शिक्षक प्रभावित हो रहे?
केंद्र सरकार ने सेवारत शिक्षकों के अनिवार्य टीईटी मुद्दे पर राज्यों से 16 जनवरी तक मांगी रिपोर्ट, शिक्षा मंत्रालय ने पूछा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उनके राज्य से कितने शिक्षक प्रभावित हो रहे?
यह मांगा ब्योरा 👇
कितने शिक्षकों को एनसीटीई के वर्ष 2011 की अधिसूचना से पहले नियुक्ति मिली
कितने शिक्षकों को वर्ष 2011 के बाद नियुक्त किया गया
वर्ष 2011 से पहले सीटेट, टीईटी पास शिक्षकों की संख्या
टीईटी या सीटेट पास कुल शिक्षक और कितने शिक्षक टीईटी से बाहर हैं?
नई दिल्ली। देश के करीब 12 लाख शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत भरी उम्मीद की खबर है। केंद्र सरकार ने पहली से आठवीं कक्षा के वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) मामले में सभी राज्यों से रिपोर्ट तलब की है। इसमें सभी राज्यों को प्रभावित होने वाले शिक्षकों की 16 जनवरी तक विस्तार से रिपोर्ट बनाकर देनी होगी। केंद्र ने 31 दिसंबर को ही सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिख दिया था।
शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के फैसले के बाद उनके कितने शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। कितने शिक्षकों को एनसीटीई के वर्ष 2011 की अधिसूचना से पहले नियुक्ति मिली है, कितने शिक्षकों को वर्ष 2011 के बाद नियुक्त किया गया है। इसमें से वर्ष 2011 से पहले सीटेट, टीईटी या एसईटीईटी पास शिक्षकों की संख्या, टीईटी या सीटेट पास कुल शिक्षक और कितने शिक्षक टीईटी से बाहर होते हैं आदि का ब्यौरा मांगा है।
इसके अलावा, पहली से पांचवीं और छठीं से आठवीं कक्षा, उनकी शैक्षिक योग्यता, ट्रेनिंग, 21 से 21 आयु वर्ग, 26 से 30 आयु, 31 से 35 आयु, 36 से 40 आयु, 41 से 45 आयु, 46 से 50 आयु, 51 से 55 आयु, 56 से 60 आयु और 60 साल से अधिक वर्ग के शिक्षकों की जानकारी मांगी है।
एनसीटीई के फैसले से हमारी पढ़ाने की काबलियत पर सवाल उठाः यूपी के अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक अनिल यादव ने कहा, एनसीटीई के एक फैसले से उनकी पढ़ाने की काबलियत पर सवाल उठा है। जबकि समय-समय पर प्रदेश शिक्षा विभाग उन्हें गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए ट्रेनिंग देता रहा है। इस फैसले से यूपी के करीब 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
वहीं, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की महामंत्री प्रो गीताभट्ट ने बताया कि बृहस्पतिवार को वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस मुद्दे पर मिले थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से करीब 12 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति तथा आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका की जानकारी दी गई। यह फैसला, उस समय प्रचलित वैध शैक्षणिक व व्यावसायिक योग्यताओं के अंतर्गत नियुक्त होकर वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर लागू करना गलत होगा। इसलिए वे इस विषय में हस्तक्षेप करें।
बच्चों को पढ़ाएं या खुद की परीक्षा की तैयारी करें : शिक्षक संगठनों का कहना है, वर्ष 2011 से पहले भर्ती होने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी की कोई अनिवार्य शर्त नहीं थी। यदि होती तो वे उस समय अनिवार्य पात्रता परीक्षा का पास करते। अब अचानक 2025 में शिक्षकों को टीईटी अनिवार्य का फैसला थोपा गया है। ऐसे में वे बच्चों को पढ़ाएं या फिर अपनी परीक्षा की तैयारी करें। उदाहरण के तौर मोहन लाल की आयु 53 साल है, अब उन्हें नौकरी बचाए रखने में परीक्षा देनी होगी। एक अनुमान के मुताबिक, टीईटी लागू होने से उत्तर प्रदेश में लगभग 1. 86 लाख और देश भर में लगभग 12 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
यूपी में करीब 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित : लखनऊ। यूपी के अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक अनिल यादव ने कहा, इससे यूपी के करीब 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) के प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर मामले में राहत देने की मांग की। एबीआरएसएम के अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, महासचिव प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि एनसीटीई की अधिसूचना में स्पष्ट है कि एक से 8वीं 5 के शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यताएं अधिसूचना की तिथि से प्रभावी गी। इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट रहेगी।
केंद्र ने राज्यों से 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों का मांगा ब्योरा, 1.86 लाख शिक्षक उत्तीर्ण नहीं हैं
लखनऊ : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को राहत दिए जाने की संभावना बन रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्य सरकार से ऐसे सभी शिक्षकों का विस्तृत और सटीक ब्योरा मांगा है, जो सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के फैसले से प्रभावित हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश में लगभग 1.86 लाख ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने टीईटी पास नहीं किया है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों, शिक्षक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से अभ्यावेदन मिले हैं। इनमें चिंता जताई गई है कि सेवा के अंतिम चरण में पहुंचे शिक्षकों के लिए टीईटी जैसी परीक्षा पास करना कठिन है और इससे उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। इसी को देखते हुए राज्यों से कहा गया है कि वे 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की संख्या, उनकी वर्तमान सेवा स्थिति और फैसले से पड़ने वाले संभावित प्रभावों का पूरा विवरण भेजें।
केंद्र ने यह भी पूछा है कि ऐसे शिक्षकों को राहत देने के लिए कानूनी या नीतिगत स्तर पर विकल्प हो सकते हैं. इस पर राज्य सरकार अपनी स्पष्ट राय दे।
मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया है कि शिक्षक भर्ती से जुड़े सभी नियम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के तय मानकों के अनुरूप होने चाहिए। सभी जानकारियां 16 जनवरी तक अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि यह कदम शिक्षकों के लंबे संघर्ष की बड़ी उपलब्धि है। संगठन ने ज्ञापन, हस्ताक्षर अभियान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात और दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के जरिये शिक्षकों की आवाज उठाई। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दायर की गई। केंद्र का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में शिक्षकों के हित में सकारात्मक फैसला हो सकता है।
भारत सरकार
शिक्षा मंत्रालय
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग
शास्त्री भवन
नई दिल्ली - 110 115
प्राची पांडेय
संयुक्त सचिव (संस्थान और प्रशिक्षण)
दूरभाष संख्या: 011-23389247
ईमेल आईडी: prachi.p@gov.in
अर्ध-शासकीय पत्र संख्या 3-3/2024-IS.20
नई दिल्ली, 31 दिसंबर, 2025
आदरणीय महोदया/महोदय,
यह दिनांक 01.09.2025 के उस निर्णय के संदर्भ में है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह निर्देश दिया है कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से कम समय शेष है, वे निर्णय की तारीख तक, बिना टीईटी (TET) पास किए अपनी अधिवर्षिता (superannuation) की आयु तक सेवा जारी रख सकते हैं। हालाँकि, पदोन्नति के लिए उन्हें टीईटी पास करना होगा। आरटीई (RTE) अधिनियम लागू होने से पहले भर्ती किए गए ऐसे सेवारत शिक्षक, जिनके पास सेवानिवृत्ति के लिए 5 वर्ष से अधिक का समय है, उन्हें सेवा जारी रखने की तारीख से 2 वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। यदि ऐसे शिक्षक उस समय सीमा के भीतर टीईटी पास करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया जा सकता है और उन्हें मिलने वाले टर्मिनल लाभों का भुगतान किया जाएगा।
न्यायालय ने यह भी कहा कि नियुक्ति के इच्छुक और पदोन्नति के इच्छुक सेवारत शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। इसके बाद, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय दिनांक 17.11.2025 के माध्यम से उपरोक्त निर्णय को दोहराया है।
इस विभाग को व्यक्तिगत शिक्षकों, शिक्षक संघों, संसद सदस्यों आदि से बड़ी संख्या में अभ्यावेदन (representations) प्राप्त हुए हैं, जिनमें उपरोक्त निर्णय के प्रभावों से राहत मांगी गई है। इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि उन शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना कठिन और भावनात्मक रूप से कष्टदायक हो सकता है जो अपने करियर के अंतिम पड़ाव (twilight) पर हैं। यह भी तर्क दिया गया है कि यह निर्णय ऐसे शिक्षकों द्वारा दशकों की सेवा में अर्जित वित्तीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके अलावा, अनुभवी शिक्षकों के संभावित निष्कासन से राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण रिक्ति (शून्य) पैदा हो सकती है।
इस विभाग को मामले की सही परिप्रेक्ष्य में जांच करने में सक्षम बनाने के लिए, उक्त निर्णय से प्रभावित होने वाले शिक्षकों की सटीक संख्या का पता लगाना अनिवार्य है। तदनुसार, यह अनुरोध किया जाता है कि आपके राज्य में संबंधित अधिकारियों को संलग्न प्रारूप में अपेक्षित डेटा संकलित करने के लिए निर्देशित किया जाए।
डेटा प्रस्तुत करने से पहले, कृपया इसकी सत्यता और सटीकता को सत्यापित करने के लिए इसे पूरी लगन से जाँचा जाए।
मैं आगे यह अनुरोध करूँगी कि आपके राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में निर्णय के प्रभावों पर टिप्पणियाँ और प्रभावित शिक्षकों को राहत प्रदान करने के संभावित रास्ते भी प्रस्तुत किए जाएं। टिप्पणियाँ प्रदान करते समय, कृपया अपने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के सक्षम प्राधिकारी से उचित कानूनी राय भी मांगी जाए।
(दूसरा पृष्ठ)
कृपया सुनिश्चित करें कि मांगी गई जानकारी और टिप्पणियाँ 16 जनवरी, 2026 तक उपलब्ध करा दी जाएं।
मैं आपका ध्यान इस विभाग के पत्र संख्या 7-2/2025-IS.20 दिनांक 24.03.2025 (प्रति संलग्न) की ओर आकर्षित करना चाहूँगी, जिसमें आपके राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में भर्ती नियमों (RRs) को अपडेट करने का अनुरोध किया गया था ताकि उन्हें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों के अनुरूप लाया जा सके। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में, यदि समयबद्ध तरीके से इसे सुनिश्चित किया जाए तो मैं आभारी रहूँगी।
यह विभाग के सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से जारी किया गया है।
सादर,
(हस्ताक्षर)
(प्राची पांडेय)
प्रति:
अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (शिक्षा)
सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश।
केंद्र सरकार ने सेवारत शिक्षकों के अनिवार्य टीईटी मुद्दे पर राज्यों से 16 जनवरी तक मांगी रिपोर्ट, शिक्षा मंत्रालय ने पूछा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उनके राज्य से कितने शिक्षक प्रभावित हो रहे?
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
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7:52 AM
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