बेसिक-माध्यमिक स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य, पुनः जारी हुआ आदेश

अखबार कम करेंगे छात्रों का स्क्रीन टाइम

स्कूलों में और गति पकड़ेगा समाचार पत्र पढ़ने का अभियान। सुपर 20 व सुपर 30 रीडर अभियान भी किया जाएगा शुरू

लखनऊ। प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में समाचार पत्र पढ़ने व इससे जुड़ी गतिविधियों को नए सत्र 2026-27 में और गति मिलेगी। नए सत्र में छात्र-छात्राओं का स्क्रीन टाइम कम करने और समाचार पत्र पढ़ने, पठन अभियान को गति देने के लिए शैक्षिक कैलेंडर में विशेष प्राथमिकता दी गई है। समाचार पत्र छात्रों को स्क्रीन से पन्नों की ओर लाएंगे।

बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से इस अभियान को गति देने के लिए बुधवार को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि विद्यालयों में समाचार पत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए।

विद्यालयों में समाचार वाचन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, भाषा व शब्दकोष, एकाग्रता में वृद्धि को नियमित किया जाए। शैक्षिक कैलेंडर का शत-प्रतिशत क्रियान्यवन किया जाए।

उन्होंने कहा है कि नए सत्र में प्राथमिक स्तर के छात्र-छात्राओं द्वारा 20 या उससे अधिक, उच्च प्राथमिक व माध्यमिक स्तर के छात्र-छात्राओं द्वारा 30 या उससे अधिक किताबें पढ़ने पर उन्हें सुपर 20 व सुपर 30 रीडर के रूप में पुरस्कृत किया जाए। उन्होंने कहा है कि बुके नहीं बुक अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया जाए। सभी पुरस्कार वितरण समारोहों में स्मृति चिह्न के स्तर पर किताबें ही दी जाएं।

उन्होंने कहा है कि विद्यालयों में रीडिंग क्लब का गठन पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए। पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हर हफ्ते का एक घंटा पढ़ने को समर्पित किया जाए। इसमें प्रधानाध्यापक, शिक्षक व छात्र-छात्रा अपनी पसंद की किताबें, कहानी व पत्रिका आदि पढ़ें। स्थानीय लेखकों से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाए। ताकि विद्यार्थी उनसे प्रेरणा ले सकें।

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि छात्रों द्वारा समाचार पत्र पढ़ने, किताबों, बाल साहित्य आदि के आधार पर छात्रों को स्वतंत्र लेखन कराया जाए। हर महीने विद्यालय स्तर पर लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाए। इसके लिए छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा। 



बेसिक-माध्यमिक स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य

अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने फिर जारी किए शिक्षा अधिकारियों को निर्देश

लखनऊः प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक स्कूलों में इस शैक्षिक सत्र से बच्चों को मोबाइल फोन की स्क्रीन से दूर कर किताबों और अखबारों की दुनिया से जोड़ने की तैयारी और तेज की जाएगी। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी मंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्कूलों में पठन संस्कृति को मजबूत बनाने, दैनिक समाचार पत्र पढ़ने की आदत विकसित करने और पुस्तकालय गतिविधियों को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देने के लिए कहा है। अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने साफ किया है कि यह केवल अभियान नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य को संवारने का साझा संकल्प है।


इससे पहले पिछले वर्ष दिसंबर में उन्होंने सभी स्कूलों में अखबार पढ़ने की अनिवार्यता को लेकर निर्देश जारी किए थे, लेकिन कई विद्यालयों में इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इसका संज्ञान लेते हुए बुधवार को एक बार फिर उन्होंने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।

 इसमें कहा गया है कि स्कूलों में रीडिंग आवर्स और पठन गतिविधियों को शैक्षिक कैलेंडर का अहम हिस्सा बनाया गया है। सभी विद्यालय तय समय सारिणी के अनुसार पठन कार्यक्रम चलाएं और पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराएं, ताकि विद्यार्थियों को पुनरावृत्ति और स्व-अध्ययन का पर्याप्त समय मिल सके। विद्यालयों में अखबारों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ प्रार्थना सभा में प्रमुख खबरों और संपादकीय लेखों पर चर्चा कराई जाएगी। 

इसके माध्यम से विद्यार्थियों में भाषा कौशल, शब्द भंडार, तार्किक सोच, सामाजिक जागरूकता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की क्षमता विकसित करना है। स्कूलों और पुस्तकालयों में स्थानीय लेखकों, साहित्यकारों और वरिष्ठ पाठकों के साथ लेखक संवाद कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। वहीं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और विद्यालयी पुस्तकालयों को भी इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा। विभाग ने बताया कि कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की पुस्तकालयों में पुस्तकें उपलब्ध करा दी गई हैं। इसके साथ ही 'बुके नहीं, बुक अभियान' के तहत पुरस्कार समारोहों में स्मृति चिह्न की जगह पुस्तकें भेंट करने पर जोर रहेगा।


एक पीरियड में सब कुछ छोड़ पढ़ने पर जोर

सभी स्कूलों में रीडिंग क्लब बनाए जाएंगे और हर सप्ताह एक पीरियड 'सब कुछ छोड़कर पढ़ें' गतिविधि के लिए तय होगा, जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी अपनी पसंद की किताबें पढ़ेंगे। इसके अलावा हर महीने 'पठन प्रश्नोत्तरी उत्सव' और लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। प्राथमिक स्तर पर 20 से अधिक और उच्च प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर 30 से अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुपर-20 और सुपर-30 रीडर्स के रूप में सम्मानित किया जाएगा। सत्र के अंत में सबसे अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र-छात्रा को चैंपियन रीडर आफ द ईयर घोषित किया जाएगा। इन गतिविधियों और पुरस्कारों का खर्च स्कूलों की कंपोजिट ग्रांट से वहन किया जाएगा।
बेसिक-माध्यमिक स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य, पुनः जारी हुआ आदेश Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2 on 6:16 AM Rating: 5

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