अनुदेशकों को 2017 से ही मिलेगा बढ़ा मानदेय, उत्तर प्रदेश सरकार की दलील ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पुनर्विचार याचिका, देखें कोर्ट ऑर्डर

अनुदेशकों को मिलेगा 9-9 लाख एरियर, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से 24 हजार अनुदेशकों में जगी नियमितीकरण की भी उम्मीद, बेसिक शिक्षा विभाग शासन स्तर पर लेगा विधिक परामर्श

लखनऊ। प्रदेश के जूनियर हाईस्कूल में कार्यरत 24 हजार से अधिक अनुदेशकों को पिछले नौ साल का एरियर मिलने व नियमितीकरण की उम्मीद बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) व सभी मॉडिफिकेशन आवेदन खारिज करने से वे काफी खुश हैं। साथ ही इसे जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं। अनुदेशक संघ के अनुसार इससे 24296 अनुदेशकों को लगभग नौ-नौ लाख रुपये एरियर भी मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अपने आदेश में कहा कि इस मामले में 04 फरवरी 2026 को पारित निर्णय में पुनर्विचार की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। अतः राज्य सरकार द्वारा दाखिल समीक्षा याचिका निरस्त की जाती है। तत्संबंधी सभी लंबित संशोधन स्थगन अर्जियां स्वतः निस्तारित मानी जाती हैं।

परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश में कहा था कि एक दशक से अधिक समय से इन अनुबंधित अनुदेशकों को मात्र 7000 रुपये मासिक मानदेय पर रखना अनुचित है। साथ ही 2017-18 से 17 हजार रुपये मासिक मानदेय देने और उस समय से देय अंतर की राशि (एरियर) भुगतान के आदेश दिए थे।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बिना न्यायोचित कानूनी प्रक्रिया के मानदेय में की गई कटौती को अप्रमाणिक एवं असंगत माना था। विक्रम सिंह ने कहा कि संगठन नि मुख्यमंत्री, बेसिक शिक्षा मंत्री व शासन से मांग करता है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा चार फरवरी को दिए गए फैसले के क्रम में अनुदेशकों के स्थायीकरण व मानदेय संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए जल्द शासनादेश जारी करें।

साथ ही अनुदेशकों के बकाया मानदेय एरियर का नियमसंगत भुगतान सुनिश्चित किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप स्थायी नीति तैयार की जाए। वहीं महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि इस मामले में शासन स्तर पर विधिक परामर्श लिया जाएगा। शासन के निर्देश पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।



अनुदेशकों को 2017 से ही मिलेगा बढ़ा मानदेय, उत्तर प्रदेश सरकार की दलील ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पुनर्विचार याचिका, देखें कोर्ट ऑर्डर 

अनुबंध खत्म होने के बाद अनुदेशकों की नियुक्ति स्थायी मानें : कोर्ट

नई दिल्ली । जूनियर हाई स्कूलों में कार्यरत 25 हजार अनुदेशकों के वेतन बढ़ोतरी मुद्दे पर यूपी सरकार को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने 4 फरवरी के अपने फैसले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने महज 7 हजार रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय बढ़ा दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि अनुबंध खत्म होने के बाद उनकी नियुक्ति स्थायी मानी जाएगी।

जस्टिस विक्रम नाथ और पी.बी. वराले की पीठ ने इस फैसले की समीक्षा की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। पीठ ने एक पन्ने के अपने आदेश में कहा कि 4 फरवरी, 2026 को पारित फैसले में किसी तरह की कोई खामी नहीं है। उक्त फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक दशक से भी अधिक समय से इन अनुबंधित अनुदेशकों को महज 7 हजार रुपये मासिक मानदेय पर रखना एक अनुचित प्रथा है जो बंधुआ मजदूरी/बेगार के समान है। यह संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है। 

पीठ ने अनुदेशकों को वित्तीय वर्ष  2017-18 से 17 हजार रुपये मासिक के हिसाब से वेतन देने का आदेश दिया था। पीठ ने यूपी सरकार को आदेश दिया है कि वह 1 अप्रैल, 2026 से इस श्रेणी के अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रति माह की दर से मानदेय देना शुरू करें और छह माह में बकाया रकम का भुगतान करें।

सरकार ने दलील दी थी कि केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना के लिए केंद्र से पैसा नहीं मिलने के बाद राज्य सरकार को पूरा मानदेय देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। इसे कोर्ट ने ठुकरा दिया था। कहा था कि ये अनुदेशक जो लगातार दस साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं, उन्हें स्थायी रूप से नियुक्त माना जाएगा। समय के साथ और काम की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए ऐसे पद अपने आप बन जाते हैं।

🔴 कोर्ट ऑर्डर 👇 

अनुदेशकों को 2017 से ही मिलेगा बढ़ा मानदेय, उत्तर प्रदेश सरकार की दलील ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पुनर्विचार याचिका, देखें कोर्ट ऑर्डर Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2 on 6:19 AM Rating: 5

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