विद्यालयों में अखबार पढ़ने के साथ प्रमुख खबरों पर होगी चर्चा, बीस से ज्यादा किताब पढ़ने वाले सुपर 20 और 30 से ज्यादा वाले सुपर 30 पाठक घोषित किए जायेंगे
विद्यालयों में अखबार पढ़ने के साथ प्रमुख खबरों पर होगी चर्चा, बीस से ज्यादा किताब पढ़ने वाले सुपर 20 और 30 से ज्यादा वाले सुपर 30 पाठक घोषित किए जायेंगे
लखनऊ । सूबे के के माध्यमिक एवं बेसिक विद्यालयों में इसी शैक्षिक सत्र से बच्चों में पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करने के लिए "सब कुछ छोड़कर पढ़ें" अभियान शुरू किया है। इसके तहत सभी विद्यालयों में बच्चे रोज समाचार पत्र पढ़ेंगे और प्रमुख खबरें पर चर्चा करेंगे। 20 से ज्यादा किताबें बढ़ने वालों को सुपर-20 और 30 से ज्यादा किताबें पढ़ने वालों को सुपर-30 पाठक घोषित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यालयों में पढ़ने की आदत विकसित करना, डिजिटल उपकरणों पर लगने वाला समय कम करना और समाचार पत्र पढ़ने की संस्कृति को संस्थागत रूप देना है।
विभाग ने पिछले वर्ष शुरू किए गए पठन अभियान को अब और प्रभावी बनाने का फैसला किया है। शासनादेश में कहा गया है कि विद्यार्थियों का डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक समय चिंता का विषय है। इसलिए विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार किया जाए जिससे छात्र-छात्राएं मोबाइल पर कम समय बिताकर पुस्तकें और अन्य अध्ययन सामग्री पढ़ें। विद्यालयों में प्रतिदिन समाचार-पत्र वाचन और प्रमुख समाचारों पर चर्चा की जाएगी। स्थानीय लेखकों और साहित्यकारों से संवाद कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अन्य पुस्तकालयों को अभियान का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया जाएगा। विभाग ने पठन अभियान को जन आंदोलन का रूप देने पर जोर दिया है। हर सप्ताह एक निर्धारित कालांश "सब कुछ छोड़कर पढ़ें" गतिविधि के लिए होगा। इस दौरान प्रधानाध्यापक, शिक्षक और छात्र-छात्राएं अपनी पसंद की पाठ्य सामग्री पढ़ेंगे। हर महीने पढ़ी गई पुस्तकों और अखबारों के आधार पर "पठन प्रश्नोत्तरी उत्सव" आयोजित किया जाएगा।
प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में अब हफ्ते में एक दिन DEAR अभियान, सब कुछ छोड़कर बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए किया जाएगा प्रेरित
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने और मोबाइल आदि के प्रयोग कम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अब विद्यालयों में ड्राप एवरीथिंग एंड रीड (डियर) अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत विद्यालयों में सप्ताह में एक दिन 30 मिनट पाठ्य पुस्तकों से इतर बच्चों के किताब, कहानी, कविता के पढ़ने पर फोकस किया जाएगा।
इसमें छात्रों को अपनी रुचि की किताबें पढ़ने के लिए विद्यालय की समय-सारिणी में पुस्तकालय का एक घंटा (कालांश) निर्धारण किया जाएगा। शिक्षकों के निर्देशन में समय समय पर पढ़ने व लिखने की विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी ताकि पढ़ना छात्रों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन सके।
इसके साथ ही शिक्षक बताएंगे कि ऐसी कौन-सी किताब, कहानी, कविता व लेख है जिसने उनके जीवन की सोच बदल दी? तीन-चार शिक्षक बच्चों से अपने अनुभव साझा करेंगे। साथ ही बच्चों के साथ बैठकर किताबें भी पढ़ेंगे। वहीं संकुल की बैठक में शिक्षक यह बताएंगे कि उनके विद्यालय में किस प्रकार पढ़ने से जुड़ी गतिविधियां कराई जा रही हैं? इसमें क्या दिक्कत आई और किस प्रकार उनका निराकरण किया गया?
इसके साथ ही बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने यह भी निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों में स्क्रीन टाइम कम करने के लिए समाचार पत्र पढ़ने व इससे जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया जाए। विद्यालयों में समाचार पत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के साथ ही छात्रों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, भाषा व शब्दकोश संवर्धन किया जाएगा। साथ ही प्रार्थना सभा में समाचार वाचन और प्रमुख लेखों पर चर्चा से जुड़ी गतिविधियां की जाएंगी।
उन्होंने यह भी कहा है कि विद्यालयों में रीडिंग क्लब का गठन किया जाए ताकि छात्रों में हमारी समृद्ध और विविध सांस्कृतिक व साहित्यिक विरासत की समझ विकसित हो सके। विद्यालयों में बुके नहीं, बुक अभियान को गति दी जाए।
विद्यालयों में अखबार पढ़ने के साथ प्रमुख खबरों पर होगी चर्चा, बीस से ज्यादा किताब पढ़ने वाले सुपर 20 और 30 से ज्यादा वाले सुपर 30 पाठक घोषित किए जायेंगे
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
on
6:20 AM
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