बेसिक शिक्षकों को प्रोन्नत वेतनमान दिए जाने पर सरकार का जवाब, वर्षों से नहीं मिला लाभ, मामलों के परीक्षण के दिए निर्देश

बेसिक शिक्षकों को प्रोन्नत वेतनमान दिए जाने पर सरकार का जवाब, वर्षों से नहीं मिला लाभ, मामलों के परीक्षण के दिए निर्देश


लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के प्रथम सत्र 2026 के प्रश्नकाल में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को देय प्रोन्नत वेतनमान का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठाया गया। वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य श्री अरुण पाठक द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने प्रोन्नत वेतनमान की वर्तमान व्यवस्था तथा संबंधित जिलों की स्थिति स्पष्ट की।

सरकार ने बताया कि शासनादेश दिनांक 20 दिसंबर 2001 के अनुसार प्राथमिक शिक्षकों को सामान्य वेतनमान में 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण करने पर प्रथम प्रोन्नत वेतनमान तथा चयन वेतनमान में 12 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण करने के उपरांत चयन वेतनमान के पदधारकों की संख्या की 20 प्रतिशत सीमा तक प्रोन्नत वेतनमान दिए जाने का प्रावधान है।

सदस्य द्वारा वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर जनपदों में पिछले पाँच वर्षों के दौरान प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृत किए जाने की जानकारी मांगी गई थी। इसके उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया कि इन चारों जनपदों में पिछले पाँच वर्षों के दौरान किसी भी शिक्षक को प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृत नहीं किया गया है।

साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि जिन जनपदों में प्रोन्नत वेतनमान के प्रकरण लंबित हैं, वहां प्राप्त मामलों का विधिवत परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

सरकार के इस उत्तर से स्पष्ट है कि प्रोन्नत वेतनमान का विषय अभी भी कई जिलों में लंबित है और पात्र शिक्षकों के मामलों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। यह मुद्दा प्रदेश के हजारों बेसिक शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें लंबे समय से प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृत होने की प्रतीक्षा है।



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