‘सक्षम मॉड्यूल’ से बदलेगी परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर, प्रधानाध्यापकों के नेतृत्व विकास से लेकर बच्चों को विद्यालय से जोड़ने तक पर विशेष फोकस
‘सक्षम मॉड्यूल’ से बदलेगी परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर, प्रधानाध्यापकों के नेतृत्व विकास से लेकर बच्चों को विद्यालय से जोड़ने तक पर विशेष फोकस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, प्रभावी नेतृत्व और बाल-केंद्रित विद्यालयी वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से ‘सक्षम मॉड्यूल’ लागू किया गया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा तैयार इस मॉड्यूल के माध्यम से प्रधानाध्यापकों की नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने के साथ विद्यालयों के समग्र प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की पहल की गई है।
एससीईआरटी में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सक्षम मॉड्यूल को विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश दिए थे। मॉड्यूल प्रधानाध्यापकों को प्रशासनिक, शैक्षिक, वित्तीय, सामुदायिक सहभागिता, मानव संसाधन प्रबंधन, कार्य विभाजन, समय प्रबंधन, छात्र नामांकन और उपस्थिति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
इसी क्रम में राजधानी लखनऊ के 100 परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विद्यालय ऐसा बने जहां बच्चा स्वयं स्कूल आने के लिए उत्साहित हो और शिक्षक उसके मित्र, मार्गदर्शक तथा प्रेरक की भूमिका निभाएं।
प्रशिक्षण के दौरान बच्चों की जिज्ञासाओं को समझने, नियमित अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ने, उनकी सीखने की क्षमता का आकलन करने तथा प्रेरक शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करने की रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
एससीईआरटी के अनुसार, मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के बाद सभी जनपदों में प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को सक्षम मॉड्यूल के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य विद्यालयों में ऐसा सकारात्मक, सहभागी और सीखने के अनुकूल वातावरण विकसित करना है, जिससे नेतृत्व क्षमता मजबूत हो, बच्चों की उपस्थिति बढ़े और परिषदीय विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता में ठोस सुधार दिखाई दे।
‘सक्षम मॉड्यूल’ से बदलेगी परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर, प्रधानाध्यापकों के नेतृत्व विकास से लेकर बच्चों को विद्यालय से जोड़ने तक पर विशेष फोकस
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
on
6:08 AM
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