समेकित शिक्षा के अन्तर्गत को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंन्द्रों की कार्यकत्रियों के प्रशिक्षण कराये जाने के सम्बन्ध में
समावेशी शिक्षा के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा प्रशिक्षण, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जल्द पहचान पर रहेगा जोर
1 से 30 सितंबर तक ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों का होगा प्रशिक्षण
लखनऊ। हर बच्चे की सीखने की गति और जरूरत अलग होती है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर पहचान और शुरुआती सहयोग उनकी आगे की शिक्षा के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकता है। इसी उद्देश्य से बेसिक शिक्षा विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों को समावेशी शिक्षा की शुरुआती कड़ी के रूप में मजबूत कर रहा है।
प्रदेश के सभी 75 जिलों में को लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं के साथ प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जल्द पहचान, शुरुआती हस्तक्षेप, समावेशी आंगनबाड़ी केंद्र और दिव्यांगता समावेशन पर विशेष जोर रहेगा।
राज्य परियोजना निदेशालय ने प्रशिक्षण के लिए लगभग 2.98 करोड़ रुपये की लिमिट जारी की है। इसमें मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए 17.70 लाख रुपये और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए 2.80 करोड़ रुपये शामिल हैं। इससे जमीनी स्तर पर कार्यरत कार्मिकों की क्षमता बढ़ेगी और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शुरुआती स्तर पर उचित सहयोग देकर आगे की शिक्षा के लिए तैयार किया जा सकेगा।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, शत-प्रतिशत प्रतिभागिता और निर्धारित समयसीमा में कार्यक्रम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशिक्षण की प्रगति और आख्या राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए बेसिक शिक्षा और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के बीच समन्वय पर भी जोर दिया है।
पहले तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर्स
30 अगस्त तक जिला स्तर पर एआरपी को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर्स आगे ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण का नेतृत्व करेंगे। इसमें गतिविधि आधारित और व्यावहारिक तरीकों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि विषयों को सरल व प्रभावी ढंग से समझाया जा सके।
1 से 30 सितंबर तक ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण
1 से 30 सितंबर तक ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण होगा। इससे दोनों स्तरों के कार्मिकों के बीच समन्वय बेहतर होगा। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, शुरुआती सहयोग और समावेशी शिक्षण वातावरण तैयार करने की प्रक्रिया मजबूत होगी।
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Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
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6:34 AM
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