बेसिक शिक्षा में लागू हुई KPI प्रणाली, अब हर योजना की होगी परिणाम आधारित मॉनिटरिंग
बेसिक शिक्षा में लागू हुई KPI प्रणाली, अब हर योजना की होगी परिणाम आधारित मॉनिटरिंग
लखनऊ। प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा के कामकाज को लक्ष्य आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। बेसिक शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए 'की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स' (केपीआई) तय कर दिए हैं। अब विभाग की सभी प्रमुख योजनाओं की प्रगति निर्धारित मानकों के आधार पर परखी जाएगी।
पोर्टल आधारित मॉनिटरिंग, गैप एनालिसिस और समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई के माध्यम से जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर तक जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने इस संबंध में सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, डायट प्राचार्यों, जिला समन्वयकों एवं संबंधित अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नई व्यवस्था के अंतर्गत हर जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर पर निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्यों की नियमित समीक्षा होगी। अधिकारियों को समय-सीमा में सभी गतिविधियों की प्रगति संबंधित पोर्टलों पर दर्ज करनी होगी। जिलों के प्रदर्शन का मासिक विश्लेषण किया जाएगा और जहां लक्ष्य प्राप्ति में कमी मिलेगी, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्य-योजना लागू की जाएगी।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने यह निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी निर्धारित समय सीमा का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केपीआई व्यवस्था विभाग में परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति को मजबूत करेगी तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही को नई गति देगी।
निपुण भारत और गुणवत्ता सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता
केपीआई में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी, कैच-अप कार्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता वृद्धि, कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता, अधिगम स्तर का मूल्यांकन, नियमित शैक्षणिक अनुश्रवण तथा विद्यालयों में समय-सारिणी के प्रभावी अनुपालन को प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में शामिल किया गया है। इसके साथ ही प्रेरणा पोर्टल, दीक्षा, एनबीएमसी, यू-डाइस तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समयबद्ध डाटा अपडेट भी अनिवार्य रहेगा।
निर्माण कार्यों से लेकर बाल वाटिका तक होगी सतत निगरानी
विद्यालय निर्माण, ऑपरेशन कायाकल्प, स्वीकृत निर्माण परियोजनाओं की प्रगति, जर्जर भवनों के निस्तारण, आधारभूत सुविधाओं के विकास, फर्नीचर की उपलब्धता तथा अन्य संसाधनों की स्थिति की नियमित समीक्षा होगी। वहीं बाल वाटिका के अंतर्गत नामांकन, विद्यालय तैयारी कार्यक्रम, टीएलएम की उपलब्धता, गतिविधि आधारित शिक्षण और नियमित निरीक्षण को भी केपीआई में शामिल किया गया है।
आरटीई, समेकित शिक्षा और पीएमश्री विद्यालयों के लिए भी तय हुए मानक
आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों का सत्यापन, आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों का चिह्नांकन एवं नामांकन, शारदा कार्यक्रम, विद्यालय प्रबंधन समितियों की सक्रियता, सामुदायिक सहभागिता, पुस्तक वितरण तथा पीएम श्री विद्यालयों में निर्धारित गतिविधियों की नियमित समीक्षा की जाएगी। समेकित शिक्षा के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, मूल्यांकन, सहायक उपकरणों की उपलब्धता, यू-डाइस अद्यतन तथा समावेशी शिक्षा से जुड़े सभी संकेतकों की भी सतत मॉनिटरिंग होगी।
एमआईएस और वित्तीय प्रबंधन पर भी रहेगी नजर
केपीआई में मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस), विभिन्न पोर्टलों पर डाटा की गुणवत्ता, वित्तीय प्रगति, समयबद्ध व्यय, लंबित प्रकरणों के निस्तारण, निरीक्षण, समीक्षा बैठकों के अनुपालन तथा विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी शामिल किया गया है। प्रत्येक माह जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर लक्ष्य प्राप्ति के आधार पर समीक्षा की जाएगी।
बेसिक शिक्षा विभाग में परिणाम आधारित कार्यप्रणाली लागू, जुलाई, अगस्त व सितंबर के लिए तय हुए परफॉर्मेंस इंडिकेटर
पोर्टल से निगरानी, गैप एनालिसिस व कार्रवाई से बढ़ाएंगे जवाबदेही
लखनऊ। प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा के कामकाज को लक्ष्य आधारित और परिणामोन्मुख बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। विभाग ने समग्र शिक्षा के तहत जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स (केपीआई) तय किए हैं। विभाग पोर्टल से मॉनिटरिंग, गैप एनालिसिस और समय से सुधारात्मक कार्रवाई के माध्यम से जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर तक जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। अधिकारियों को समय-सीमा में सभी गतिविधियों की प्रगति संबंधित पोर्टलों पर दर्ज करनी होगी।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा है कि जिलों के प्रदर्शन का मासिक विश्लेषण किया जाएगा। जहां लक्ष्य प्राप्त करने में कमी मिलेगी, वहां सुधारात्मक कार्य-योजना लागू की जाएगी। इस संबंध में उन्होंने सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, डायट प्राचार्यों, जिला समन्वयकों एवं संबंधित अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि केपीआई में निपुण भारत मिशन, कैच-अप कार्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता वृद्धि, कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता, समय सारिणी के अनुपालन को प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में शामिल किया गया है।
निर्माण कार्यों से लेकर बाल वाटिका तक की निगरान
केपीआई में विद्यालय निर्माण, ऑपरेशन कायाकल्प, स्वीकृत निर्माण परियोजनाओं की प्रगति, जर्जर भवनों के निस्तारण, आधारभूत सुविधाओं के विकास, फर्नीचर की उपलब्धता तथा अन्य संसाधनों की स्थिति की नियमित समीक्षा होगी। वहीं बाल वाटिका के अंतर्गत नामांकन, विद्यालय तैयारी कार्यक्रम, टीएलएम की उपलब्धता, गतिविधि आधारित शिक्षण और नियमित निरीक्षण को भी केपीआई में शामिल किया गया है।
आरटीई और पीएमश्री विद्यालयों के लिए भी मानक आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों का सत्यापन, आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों का चिह्नांकन व नामांकन, शारदा कार्यक्रम, विद्यालय प्रबंधन समितियों की सक्रियता, सामुदायिक सहभागिता, पुस्तक वितरण तथा पीएमश्री विद्यालयों में निर्धारित गतिविधियों की नियमित समीक्षा की जाएगी। समेकित शिक्षा में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, मूल्यांकन, सहायक उपकरणों की उपलब्धता, यू-डाइस अद्यतन तथा समावेशी शिक्षा से जुड़े संकेतकों की भी सतत मॉनिटरिंग होगी।
जिलावार बनेगी शिक्षा सुधार की रणनीति, बेसिक शिक्षा विभाग 28 और 29 जुलाई को एससीईआरटी लखनऊ में राज्य स्तरीय मंडलवार कार्यशालाएं आयोजित करेगा
लखनऊः परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई का स्तर बेहतर बनाने के लिए अब परख-2024 रिपोर्ट केवल दस्तावेज नहीं रहेगा, बल्कि इसी के आधार पर सुधार की ठोस कार्ययोजना तैयार होगी।
बेसिक शिक्षा विभाग 28 और 29 जुलाई को राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) लखनऊ में राज्य स्तरीय मंडलवार कार्यशालाएं आयोजित करेगा, जहां रिपोर्ट के निष्कर्षों का विश्लेषण कर जिलावार रणनीति बनाई जाएगी।
28 जुलाई को मेरठ और सहारनपुर, जबकि 29 जुलाई को आजमगढ़, झांसी और आगरा मंडल के अधिकारी भाग लेंगे। प्रत्येक मंडल से उप शिक्षा निदेशक/डायट प्राचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
कार्यशालाओं में विषयवार और कक्षावार अधिगम स्तर का विश्लेषण होगा। इसके आधार पर शिक्षण पद्धति में सुधार, आवश्यक शैक्षणिक हस्तक्षेप और जिला स्तर की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
संयुक्त निदेशक (एसएसए) डा. पवन सचान ने कहा कि परख-2024 शिक्षा की गुणवत्ता सुधार का आधार बनेगी और डाटा आधारित योजना से विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों में ठोस सुधार लाया जाएगा।
बेसिक शिक्षा में लागू हुई KPI प्रणाली, अब हर योजना की होगी परिणाम आधारित मॉनिटरिंग
Reviewed by प्राइमरी का मास्टर 2
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5:56 AM
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