बिना प्रशिक्षण दिए योग कराने का फरमान,  सरकार को खुश करने कागजों पर आदेशों की कवायद, प्रशिक्षण भी नहीं हो सके पूरे

⚫  21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के संबंध में जिलों में पहुंच रहे आदेश
⚫ हर जिले से 200 छात्र-छात्रओं को लखनऊ ले जाने का फरमान जारी
हर जिले में मास्टर ट्रेनर सिखाएंगे योग प्रदर्शन के गुर

इलाहाबाद : विकास खंड स्तर के प्राथमिक शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण नहीं मिला, लेकिन प्रदेश भर में विद्यालय स्तर पर योग करने का आदेश जारी हो गया है। तीन महीने पहले जनवरी में योग प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन, अधिकांश जगह जिला स्तर के आगे नहीं बढ़ सकी। खंड शिक्षा अधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी इस संबंध में तेजी नहीं दिखाई, बल्कि अब योग कराने का विद्यालयों में दबाव बनाया जा रहा है। यह सारी सरकार को खुश करने के लिए की जा रही है।

बेसिक शिक्षा परिषद ने दो दिन पहले प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए समय सारिणी जारी की है। इसमें एक लाख से अधिक प्राथमिक व करीब 50 हजार उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रार्थना के बाद योग करने का आदेश दिया गया है। अफसरों ने यह फरमान जारी करने से पहले विद्यालय स्तर की जमीनी हकीकत नहीं जानी कि विद्यालय के शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण ही नहीं मिला है। असल में शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण देने का खाका छह जुलाई 2016 को ही खींचा गया था। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उप्र यानी एससीईआरटी के निदेशक ने आदेश के पांच माह बाद पांच जनवरी को प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी किया। इसमें सभी जिलों से दो-दो जिला स्तरीय संदर्भदाताओं को प्रशिक्षित किया जाना था। इसके लिए 11 से 13, 16 से 18 और 19 से 21 जनवरी तक का कार्यक्रम जारी हुआ। यह प्रशिक्षण परिषद कार्यालय लखनऊ में दिया गया।


एससीईआरटी ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट के जरिये दो-दो संदर्भदाताओं को प्रशिक्षित करके भेजा। उन्हें अपने जिले के डायट में दूसरे शिक्षकों को प्रशिक्षित करना था। इसमें पहले बीआरसी स्तर पर और फिर उसी क्रम में आगे शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाना था। प्रदेश के कुछ जिलों को छोड़कर योग का प्रशिक्षण डायट स्तर से आगे नहीं बढ़ सका। कहा गया कि प्राथमिक स्कूलों में शारीरिक शिक्षक नहीं होते हैं वहां पर चालीस वर्ष से कम आयु के शिक्षकों को इसका प्रशिक्षण दिया जाए। एससीईआरटी ने इस संबंध में डायट प्राचार्य व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को समान रूप से निर्देश दिये थे लेकिन, डायट और बीएसए ने यह काम एक-दूसरे का मानकर ठीक से मानीटरिंग ही नहीं की। इसलिए प्रशिक्षण पाने के लिए न तो शिक्षकों ने रुचि दिखाई और प्रशिक्षण दाताओं ने ही ब्लाक स्तर पर भ्रमण करके योग सिखाया।


अब परिषद सचिव संजय सिन्हा का आदेश होने के बाद से हड़कंप मचा है। योग के नाम पर अब स्कूलों में खानापूरी हो रही है।राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश के सभी जिलों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की तैयारियां जल्द ही तेज हो जाएंगी। 21 जून को लखनऊ में होने वाले योग प्रदर्शन कार्यक्रम में हर जिले से 200 छात्र-छात्रओं के पहुंचने का लक्ष्य तय किया गया है। शासन की ओर से योग से जुड़ी सीडी व मास्टर ट्रेनर का भी प्रबंध किया जा रहा है, ताकि जो प्रदर्शन छात्रों को सामूहिक रूप से करना है उसका विधिवत अभ्यास पहले कर लिया जाये। देश ही नहीं दुनिया के कई देशों में 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है। इस बार प्रदेश की राजधानी लखनऊ में योग प्रदर्शन कार्यक्रम हो रहा है।


अफसरों का दावा है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग लेंगे। इस आयोजन में करीब 50 हजार लोगों के प्रतिभाग करने का लक्ष्य रखा गया है।  अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन की ओर से सभी जिलों में इस संबंध में निर्देश पहुंच रहे हैं। आदेश में कहा गया है कि करीब एक घंटे के योग आसन का कार्यक्रम है। इस संबंध में सीडी व मास्टर ट्रेनर का प्रबंध किया जाएगा। इसमें प्रतिभाग कराने के लिए हर जिले से 15 से 25 वर्ष तक के 200 छात्र-छात्रओं व नागरिकों को चिह्न्ति करने का निर्देश दिया गया है। यह आयोजन सुबह सात से आठ बजे के बीच होगा। इसके लिए मंडल व जिला स्तर पर एक-एक अधिकारी को नोडल अफसर के रूप में नियुक्ति दी जा रही है। शासन ने उसका नाम, पदनाम व मोबाइल नंबर भी मांगा है। यह भी निर्देश दिया गया है कि जिन छात्र-छात्रओं और नागरिकों को आयोजन में प्रतिभाग करना है उनका चिह्नंकन जल्द किया जाए, ताकि समय रहते उन्हें प्रशिक्षित भी कर दिया जाए।

बिना प्रशिक्षण दिए योग कराने का फरमान,  सरकार को खुश करने कागजों पर आदेशों की कवायद, प्रशिक्षण भी नहीं हो सके पूरे Reviewed by Sona Trivedi on 6:36 AM Rating: 5

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