उर्दू को स्कूलों में अनिवार्य बनाने की कोई योजना नहीं, उर्दू समेत अन्य भाषाओं के विकास के लिए कदम उठा रही सरकार


नई दिल्ली : सरकार  उर्दू भाषा को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठा रही है, लेकिन इसे स्कूलों में अनिवार्य बनाने की कोई योजना नहीं है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को कहा कि सरकार ने ऊर्दू समेत अन्य भाषाओं के विकास की दिशा में कारगर पहल की है।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान जावड़ेकर ने कहा कि त्रिभाषा फामरूला सभी राज्यों में लागू है। किसी भाषा का चयन छात्रों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कक्षा एक से 12 तक की ऊर्दू की किताबें तैयार हैं। ऊर्दू शिक्षकों के प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता के तौर पर लिया जा रहा है। मानव संसाधन राज्य मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जमशेदपुर और रांची के कई शिक्षण संस्थानों को सरकार ने 133 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह राशि उन्हें राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत दी गई है। उन्होंने कहा कि मंत्रलय एक बार जगह मिल जाने के बाद रांची के आइआइएम के भवन निर्माण को तीन साल के भीतर पूरा कराएगी।

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