1.72 लाख शिक्षामित्रों को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट की हाईकोर्ट के फैसले पर रोक, शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन का मामला

नई दिल्ली/लखनऊ। सूबे के 1,72,825 शिक्षामित्रों को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत ने शिक्षामित्रों की सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति को निरस्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। साथ ही न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने यूपी सरकार समेत अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद कुछ शिक्षामित्रों के खुदकुशी करने की घटनाएं सामने आईं थीं। फैसले के खिलाफ यूपी शिक्षामित्र कल्याण समिति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। इस मामले में हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने कहा था कि शिक्षामित्रों का समायोजन बिना पद स्वीकृत किए और चयन प्रक्रिया व आरक्षण का पालन किए बिना कर दिया गया। यह असंवैधानिक, मनमाना और अवैध है। प्रदेश सरकार को बेसिक शिक्षा सेवा नियमावली में संशोधन कर न्यूनतम योग्यता और अध्यापक की परिभाषा बदलने का अधिकार नहीं है।

यूपी में शिक्षामित्रों की नियुक्ति बिना किसी परीक्षा के ग्राम पंचायत स्तर पर मेरिट के आधार पर की गई थी। 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार ने नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) से इनके दो वर्षीय प्रशिक्षण की अनुमति ली थी। इसी आधार पर इन्हें दूरस्थ शिक्षा के अंतर्गत दो वर्ष का बीटीसी प्रशिक्षण दिया गया। वर्ष 2012 में सपा सरकार ने इन्हें तीन चरणों में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित करने का फैसला किया।

याचिकाकर्ता समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम स्वामी और महालक्ष्मी पवनी ने पीठ के समक्ष दलील दी कि केंद्र सरकार की ओर से दी गई रियायत के आधार पर इन शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाया गया था। इनके पास ओपन लर्निंग का तजुर्बा है। इन्होंने बेसिक टीचर ट्रेनिंग भी ले रखी है। लेकिन, हाईकोर्ट ने इन बातों को नजरअंदाज कर दिया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 12 सितंबर को अपने आदेश में कहा था कि शिक्षामित्र टीईटी पास नहीं हैं। इन्हें सहायक अध्यापक बनाने के लिए बेसिक शिक्षा सेवा नियमावली में असंवैधानिक और मनमाने तरीके से संशोधन कर दो वर्षीय दूरस्थ शिक्षा प्रशिक्षण दिया गया। इसलिए इनका समायोजन अवैध है। हाईकोर्ट की एक पूर्णपीठ ने कहा था कि न्यूनतम अर्हता में छूट देने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है, राज्य सरकार को नहीं।

1.72 लाख शिक्षामित्रों को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट की हाईकोर्ट के फैसले पर रोक, शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन का मामला Reviewed by प्रवीण त्रिवेदी on 6:42 AM Rating: 5

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