मिड- डे मील के लिए नहीं शिक्षक : हाई कोर्ट ने कहा आपूर्ति नीति स्पष्ट करे सरकार


  •  मिड- डे मील के लिए नहीं शिक्षक
  •   अगली सुनवाई पांच अगस्त को
  •   आपूर्ति नीति स्पष्ट करे सरकार : हाईकोर्ट
  •   टीचर पढ़ाने के लिए हैं बच्चों को मिड- डे मील पकाकर देने के लिए नहीं
इलाहाबाद । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील दिए जाने की सरकारी नीति स्पष्ट करे। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को मिड-डे मील देने की नीति प्रदेश के हर जिले के लिए एक समान होनी चाहिए। कहीं पर एनजीओ द्वारा मिड- डे मील की आपूर्ति तथा कहीं पर स्कूल के प्रधानाचार्य को इसमें शामिल करना ठीक नहीं हैं। टीचर पढ़ाने के लिए हैं, बच्चों को मिड- डे मील पकाकर देने के लिए नहीं। कोर्ट ने इस मामले में पांच अगस्त को सुनवाई करने का निर्देश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह व न्यायमूर्ति विक्रमनाथ के खंडपीठ ने मेरठ के यूपी प्रधानाचार्य परिषद के सचिव सुशील कुमार सिंह की तरफ से दायर जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में जिला विद्यालय निरीक्षक के 19 जून, 2013 के उस आदेश को चुनौती दी गयी जिसमें कहा गया था कि स्कूलों में बच्चों के लिए खाना पकाने की व्यवस्था प्रधानाचार्य की ही देखरेख में होगी।  टीचर पढ़ाने के लिए हैं बच्चों को मिड- डे मील पकाकर देने के लिए नहीं इसके लिए प्रदेश के हर जिले में एक समान नीति होनी चाहिए |
(साभार-:-राष्ट्रीय सहारा)

  • राज्य की नीति स्पष्ट करने का निर्देश
  • जनहित याचिका पर सुनवाई 5 अगस्त को
इलाहाबाद : प्रदेश में सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों को मिड-डे-मील योजना की सरकारी नीति में एकरूपता के मुद्दे पर इलाहाबाद हाई कोर्ट 5 अगस्त को सुनवाई करेगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी नीति पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।1 उप्र प्रधानाचार्य परिषद मेरठ ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर प्रधानाचार्यो को मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था करने के सरकारी आदेशों को यह कहते हुए चुनौती दी है कि कई जिलों में एनजीओ द्वारा मिड-डे-मील की व्यवस्था की जा रही है। ऐसे में मेरठ के स्कूलों में मध्यान्ह भोजन का जिम्मा प्रधानाचार्यो पर योजना उचित नहीं है। वैसे भी इन पर पढ़ाई व प्रशासनिक कार्यो का दबाव रहता है। कोर्ट ने जिले में जारी व्यवस्था को ही कायम रखने का निर्देश दिया है और इसी मामले को लेकर दाखिल अन्य जिलों की याचिकाएं भी सुनवाई के लिए मंगा ली है। मामले की सुनवाई 5 अगस्त को होगी।1यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह तथा न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की खंडपीठ ने दिया है। याची के अधिवक्ता अनुराग खन्ना का कहना है कि मेरठ जिले में 11 एनजीओ कार्यरत हैं। बागपत व मुजफ्फर नगर में हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश से एनजीओ कार्य कर रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा प्रधानाचार्यो पर दबाव डालना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सरकारी नीति में एकरूपता होनी चाहिए और पूरे प्रदेश में एक जैसी व्यवस्था होनी चाहिए। व्यापक हित में इस मामले पर सरकार अपना पक्ष रखे ताकि कोर्ट पर अनावश्यक याचिकाओं का दबाव न बढ़े।
  • बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए जनहित याचिका

     इलाहाबाद : ह्यूमन राइट लॉ नेटवर्क की शोध छात्रओं ने कुपोषण के शिकार पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों को बेहतर सुविधाएं दिलाए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है। अगरिमा सहित आधे दर्जन शोध छात्र-छात्रओं की टीम ने कौशाम्बी जिले के तीन ब्लाकों का सर्वे कर कोर्ट के समक्ष बच्चों को कुपोषण से बचाने के उपाय किए जाने के लिए समादेश जारी करने की मांग की है। इनका कहना है कि इस जिले के कुछ ब्लाकों में 404 बच्चे कुपोषण के शिकार होकर कमजोर हैं जिनमें से 6 बच्चों की मौत भी हो चुकी है। सवाल उठाया है कि एक जिले का यह हाल है तो तो पूरे प्रदेश की क्या दशा होगी। याचियों का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां इस काम के लिए लगी हैं किन्तु योजना को सही तरीके से लागू न करने के कारण ही बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं।
    (साभार-:-दैनिक जागरण)


मिड- डे मील के लिए नहीं शिक्षक : हाई कोर्ट ने कहा आपूर्ति नीति स्पष्ट करे सरकार Reviewed by BRIJESH SHRIVASTAVA on 7:27 PM Rating: 5

6 comments:

Unknown said...

Transfer ke list kab aa rahi hai.sarkar kab nilalegi 2nd list.

yashwant said...

ye court ka order sarahniye ha

ashish said...

bahut hi achhee yachika hai . agar aisa ho jaye to teacher ki 50% distarbance kam ho jaye lekin lagta nahi hai aisa ho payega ,
Teacher ko khujali ki dawa man rahi hai sarkar jaha khujali hue laga diya .

Anonymous said...

-!kaash aisa ho jaye to teacher sahi maemo me teacher ho jaye...

Shivnath Pandey Shastri said...

Very good order.

Unknown said...

adhyapak ko mdm se alag kar diya jay

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