‘आदर्श’ स्कूलों पर भारी अदूरदर्शिता : हर ब्लाक से दो विद्यालय लिए गए हैं गोद

इलाहाबाद : पटरी से उतर चुकी परिषदीय विद्यालयों की पठन-पाठन व्यवस्था सुधारने की हर कवायद बेमानी साबित हुए। नए-नए नियम बने, बड़े-बड़े कदम उठाए गए। जो चंद दिनों बाद सभी धूलभरी फाइलों में दबकर रह गए। इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरणा लेते हुए प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री ने सांसद आदर्श गांव की तर्ज पर, अधिकारियों से विद्यालयों को गोद लेकर उसे आदर्श बनाने का आदेश दे डाला। मंत्री जी, का आदेश मिलते ही विभाग हरकत में आया।

अफसरों ने तेजी दिखाते हुए हर ब्लाक से एक पूर्व माध्यमिक व एक प्राथमिक विद्यालय को गोद भी ले लिया। मजे की बात यह है कि गोद लिए विद्यालयों में होना क्या है, इसका किसी को ज्ञान ही नहीं है। अधिकतर विद्यालयों में बिजली, पानी, बच्चों के बैठने की व्यवस्था यहां तक कि पढ़ने के लिए कापी-किताब तक की व्यवस्था नहीं है, जिसे सुधारने का अधिकारियों के पास कोई खाका नहीं है।

प्रदेश में एक लाख 33 हजार 413 प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। इसमें 88 हजार 500 प्राथमिक व 44 हजार 913 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के तकरीबन 304411 के लगभग पद खाली हैं। इसमें 50322 के लगभग विद्यालय सिर्फ एक शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। शासन ने अधिकारियों से ब्लाकस्तर पर विद्यालयों को गोद लेकर वहां की व्यवस्था सुधार कर उसे मॉडल बनाने का निर्देश दिया है। इसके लिए अधिकारियों के पास न तो कोई फंड होगा, न अतिरिक्त अधिकार। ऐसे में विद्यालय आदर्श कैसे बनेंगे उसका अंदाजा स्वत: लगाया जा सकता है। 
  • सफाई की नहीं है व्यवस्था-:
परिषदीय विद्यालयों में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। शहरीय हो या ग्रामीण क्षेत्र, हर जगह प्रधानाध्यापक व शिक्षक सफाई की व्यवस्था कराते हैं। सफाई के लिए अतिरिक्त फंड न होने के चलते अधिकतर विद्यालयों में बच्चे गंदगी के बीच बैठते हैं।

  • कम्पूयटर है अजूबा
सर्वशिक्षा अभियान के तहत कक्षा पांच के बाद बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देने का प्राविधान है। लेकिन विद्यालयों में बिजली का कनेक्शन न होने के चलते कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं, अधिकतर विद्यालयों के प्रधानाध्यापक सुरक्षा का हवाला देकर उसे घर उठा ले गए हैं।

  • शिक्षकों पर नहीं है लगाम:-
 शासन का शिक्षकों पर कोई लगाम नहीं है। अधिकतर शिक्षक सिर्फ रजिस्टर में हस्ताक्षर करने विद्यालय जाते हैं। कई माहभर का हस्ताक्षर एक साथ कर देते हैं। इसे जो नेता किस्म के शिक्षक हैं वह बिना हस्ताक्षर किए वेतन ले रहे हैं, जिनके ऊपर विभाग का कोई जोर नहीं है।
हमारे पास जो संसाधन हैं उसका सही उपयोग विद्यालयों को आदर्श बनाया जाएगा। काम में कहीं संसाधन आड़े नहीं आएंगे।
                                                      -राजकुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी।
बिना अतिरिक्त सुविधा व संसाधन दिए विद्यालयों को आदर्श बनाने की कवायद सफल होगी इसका कम अंदेशा है। शासन को इसके लिए अतिरिक्त बजट देना चाहिए।
                                                       -सुरेश कुमार त्रिपाठी, शिक्षक विधायक।
आदर्श विद्यालय के मानक :-
  • विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति 90 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए।
  • शिक्षक बिना किसी ठोस कारण के अनुपस्थित न रहें।
  • बच्चों को किताब, कापी व यूनीफार्म की पूर्ण उपलब्धता हो।
  • बच्चों की पढ़ाई ठीक से हो रही है या नहीं अधिकारी स्वयं उसकी पड़ताल करेंगे।
  • मिड डे मील की गुणवत्ता व मेन्यू के अनुसार मिलना चाहिए।
  • विद्यालय में ब्लैक बोर्ड, चाक के साथ बच्चों के बैठने के लिए टाट व बेंच की व्यवस्था होनी चाहिए। 
  • विद्यालय में पंखा, प्रकाश के साथ शुद्ध पेयजल की आपूर्ति होनी चाहिए।
  • बच्चों को अंग्रेजी व कंप्यूटर की शिक्षा मिलनी चाहिए।

खबर साभार : दैनिक जागरण

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