बिना अधिकार वकीलों को भुगतान कर फसें बेसिक शिक्षा परिषद सचिव, गलत भुगतान की वसूली का हाईकोर्ट का निर्देश, वकीलों की नियुक्ति के लिए नियम बनाए सरकार

☀ बेसिक शिक्षा परिषद में मानदेय पर अधिवक्ताओं को रखने का मामला, 

☀ सचिव से गलत भुगतान की वसूली का हाईकोर्ट का निर्देश, 

☀ सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए नियम बनाए सरकार 


इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के विभागों में पैनल अधिवक्ता नियुक्त करने के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने शासनादेश के विपरीत बेसिक शिक्षा परिषद में दो वकीलों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय तय करने को अधिकार क्षेत्र के बाहर करार दिया है। 




कोर्ट ने इससे सरकार को हुई आर्थिक क्षति को गंभीरता से लिया है और कहा है कि परिषद के सचिव की व्यक्तिगत सम्पत्ति से इसे वसूल किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण टण्डन तथा न्यायमूर्ति नाहिद आरा मुनीस की खंडपीठ ने अधिवक्ता घनश्याम मौर्य की याचिका पर दिया है। 




कोर्ट ने कहा है कि 16 फरवरी, 09 के शासनादेश के तहत राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही परिषद के वकीलों की नियुक्ति की जा सकती है। कोर्ट ने सरकारी व राज्य निधि से भुगतान पर संस्थानों के अधिवक्ता पैनल की नियुक्ति की गाइड लाइन या नियम एक माह में बनाने का निर्देश दिया है तथा कार्यवाही रिपोर्ट मांगी है। 




कोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा से अनुपालन हलफनामा मांगा है तथा ऐसा न करने पर 28 नवम्बर को हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने किस अधिकार से अधिवक्ता पैनल नियुक्त किया और दो वकीलों का 15 हजार प्रतिमाह मानदेय तय किया। 




याचिका के अनुसार 27 अगस्त 12 के शासनादेश से राज्य सरकार ने इलाहाबाद व लखनऊ में लीगल सेल गठित की। प्रभावी पैरवी के लिए दोनों जगह चार वकीलों को 15 हजार मानदेय पर नियुक्त किया गया किंतु परिषद के सचिव ने दो और अधिवक्ताओं को भी बिना अधिकार के 15 हजार मानदेय देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इसे सही नहीं माना और कहा कि इसकी जवाबदेही वकीलों की नहीं है।


बिना अधिकार वकीलों को भुगतान कर फसें बेसिक शिक्षा परिषद सचिव, गलत भुगतान की वसूली का हाईकोर्ट का निर्देश, वकीलों की नियुक्ति के लिए नियम बनाए सरकार Reviewed by Sona Trivedi on 6:25 AM Rating: 5

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