प्रधानाध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय के पद पर पदोन्नति हेतु तैयार होने वाली ज्येष्ठता सूची के सम्बन्ध में एक विचार

प्रधानाध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय के पद पर पदोन्नति हेतु तैयार होने वाली ज्येष्ठता सूची के निर्माण के सम्बन्ध में लगातार प्राइमरी का मास्टर डॉट कॉम पर चर्चा की जा रही है कि आखिर क्या हो हमारी वरिष्ठता का वास्तविक और वैधानिक अधिकार?




चर्चा की इसी कड़ी और क्रम में आप सभी के सामने प्रस्तुत है 
दिनेश चन्द्र शर्मा  जी के विचार !



सम्पूर्ण प्रदेश में प्र0अ0, उ0प्रा0 वि0 के रिक्त पदों पर पदोन्नति हेतु स0अ0, उ0प्रा0 वि0 अथवा प्र0अ0, उ0प्रा0 वि0 की सयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार की जा रही हैं। इस सम्बन्ध में प्रतिदिन हमारे साथियों के फोन आ रहे हैं कि वरिष्ठता का निर्धारण स0अ0, प्रा0वि0 पद पर प्रथम नियुक्ति से होगा अथवा प्र0अ0, प्रा0 वि0 / स0अ0, उ0 प्रा0 वि0 के पद पर पदोन्नति की तिथि से होगा।

उपरोक्त के सम्बन्ध में अवगत होने का कष्ट करें कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 (अद्यतन) के नियम 22  के अनुसार "किसी संवर्ग में किसी अध्यापक की ज्येष्ठता मौलिक रूप में उसकी नियुक्ति के दिनांक से अवधारित की जायेगी"।

उक्त से स्पष्ट से कि जो शिक्षक जिस संवर्ग में नियुक्त हुआ है उसकी नियुक्ति तिथि से ज्येष्ठता निर्धारित की जायेगी।

अब कुछ साथियों का तर्क है कि जब हम प्र अ प्रा वि/स अ उच्च प्रा वि के पद पर आ गये तो हमारा संवर्ग बदल गया इसलिये वर्तमान संवर्ग में आने की तिथि से ज्येष्ठता निर्धारित होनी चाहिये। लेकिन मेरा मत है कि पदोन्नति के आधार पर संवर्ग परवर्तित होने पर उसे उस संवर्ग की नियुक्ति नहीं माना जा सकता है।

कुछ साथियों का तर्क है कि सचिव बेसिक शिक्षा परिषद् द्वारा दिनांक 14-6-2013 को निर्गत पत्र जिसमें सचिव महोदय द्वारा प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता निर्धारित करने के निर्देश दिये गये थे उसे सचिव महोदय द्वारा दिनांक 28-5-2015 को निरस्त कर दिया गया है जिससे स्पष्ट है कि अब वरिष्ठता प्रथम नियुक्ति तिथि से न बनकर पदोन्नति की तिथि से बनेगी।

स्पष्ट करना चाहूँगा कि उक्त तर्क पूर्णत भ्रामक है क्योंकि नियमावली होते हुए किसी अन्य पत्र का कोई औचित्य नहीं है। इस पत्र के आलावा भी कुछ अन्य पुराने पत्र हमारे साथियों द्वारा सोशल साईट पर डाल कर बहस की जा रही है। यहाँ स्पष्ट करना चाहूँगा कि नियमावली के रहते यदि उसके सापेक्ष परिषद् का कोई अधिकारी कोई पत्र निर्गत करता है तो उसका कोई मतलब नहीं बनता है क्योकि नियमावली कैबिनेट की मंजूरी से बनती है और वो किसी भी विभागीय अधिकारी के पत्र को अवक्रमित करती है। सचिव साहब द्वारा कुछ लोगों के अनुरोध पर स्थिति स्पष्ट करने के लिये उक्त पत्र निर्गत किया गया था जिसे हमारे कुछ साथियों ने मा उच्च न्यायालय से स्थगित करवा दिया था और जिसकी बजह से पदोन्नति रुक गई तथा अनेक साथी जोकि पदोन्नति लेकर सेवानिवृत्त होते तथा अधिक पेन्सन व राशिकरण प्राप्त करते वो पदोन्नति प्राप्त किये बिना ही सेवानिवृत्त हो गये ।हमारे देश में न्याय प्राप्त करने की गति कितनी तेज है उससे सभी परिचित हैं जिसको ध्यान में रखते हुए उक्त स्थगन पर विभाग द्वारा विधिक राय से स्पष्ट हुआ कि सचिव महोदय का उक्त पत्र स्टे हुआ है नियमावली स्टे नहीं है जबकि उक्त पत्र का कोई औचित्य नहीं है इसलिये विभाग द्वारा पत्र निरस्त कर दिया जिससे मा उच्च न्यायालय के स्टे का प्रभाव समाप्त हो गया तथा अध्यापक सेवा नियमावली अपनी जगह प्रभाव रख रही है जिसके अनुसार पदोन्नति के आदेश निर्गत किये गये हैं।

स्पष्ट करना चाहूँगा कि यदि आपके वर्तमान संवर्ग जिसमें आप पदोन्नति होकर आये है यदि उसमें कोई अन्य अध्यापक सीधी भर्ती से नियुक्त हो जाता है तब उसके सापेक्ष आपकी वरिष्ठता वर्तमान संवर्ग में आने की तिथि व उसकी सीधी नियुक्ति की तिथि की तुलना के अनुसार आगणित की जायेगी।

कुछ साथियों का तर्क है कि यदि किसी स अ प्रा वि ने अपनी पदोन्नति छोड़ दी है और उससे कनिष्ठ से पदोन्नति ले ली है तो कौन वरिष्ठ होगा?

स्पष्ट करना चाहूँगा कि पदोन्नति की लिये दो सूचियों की आवश्यकता होती है 1-वरिष्ठता सूची 2-पात्रता सूची। अर्थात वरिष्ठता सूची प्रथम नियुक्ति के आधार पर बनेगी। जबकि पात्रता अध्यापक के प्र अ प्रा वि/स अ उ प्रा वि में पदोन्नति के आधार पर बनेगी।



प्र अ उ प्रा वि के पद पर पदोन्नति हेतु प्र अ प्रा वि / स अ उ प्रा वि के पद पर 3 वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता है।ऐसी स्थिति वरिष्ठता क्रम में केवल वो ही शिक्षक पदोन्नत हो सकेंगे जिनके पास प्र अ प्रा वि/स अ उ प्रा वि के पद पर 3 वर्ष का अनुभव होगा। यदि कोई अध्यापक वरिष्ठता सूची में वरिष्ठ है परन्तु उसके पास 3 वर्ष का अनुभव नहीं है तो उसको पदोन्नति नहीं दी जायेगी जबकि उससे कनिष्ठ अध्यापक जिसके पास 3 वर्ष का अनुभव है उसको पदोन्नति दे जायेगी। इसी प्रकार यदि किसी कनिष्ठ के पास 10 वर्ष का अनुभव है और वरिष्ठ के पास के 3 वर्ष का अनुभव है पहले वरिष्ठ को हो पदोन्नति दी जायेगी।

मृतक शिक्षकों के आश्रितों के रूप में अप्रशिक्षित अध्यापक के पद पर नियुक्त शिक्षकों को प्रशिक्षण मुक्ति/प्रशिक्षित वेतनमान / प्रशिक्षण प्राप्त करने में जिसकी तिथि पहले होगी उस तिथि से वरिष्ठता मानी जायेगी। सामान्यतः किसी भी सरकारी सेवक की वरिष्ठता एक वार निर्धारित होती है जो बार बार नहीं बदलती है उसके बाद नियुक्त या आने वाले कर्मचारी उसके बाद जुड़ जाते हैं।

ऐसे जनपद जहाँ के सम्मानित बी एस ए भ्रमित है उनसे उस जनपद के साथी एक प्रश्न कर सकते हैं कि उनकी सेवा में पहला संवर्ग जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी/वरिष्ठ प्रवक्ता डायट/प्रधानाचार्य रा इ का का है । दूसरा संवर्ग A D Basic / DIOS का है।तथा तीसरा उप शिक्षा निदेशक का है। क्या कोई बी एस ए, DIOS के पद पर पदोन्नति पाने के बाद जब उप शिक्षा निदेशक के पद पर पदोन्नति पाते है तो DIOS बनने की तिथि से पाते है अथवा प्रथम नियुक्ति तिथि से पाते है?

इसलिए सभी सम्मानित साथी भ्रमित न हो और शीघ्र पदोन्नति में सहयोग करें जिससे शिक्षकों को लाभ मिल सके।

(उपरोक्त लेख मेरी निजी जानकारी पर आधारित है। इसमे चर्चा परिचर्चा के लिए पोस्ट पर ही कमेन्ट करें! )

प्रान्तीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
उत्तर प्रदेश



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प्रधानाध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय के पद पर पदोन्नति हेतु तैयार होने वाली ज्येष्ठता सूची के सम्बन्ध में एक विचार Reviewed by प्रवीण त्रिवेदी on 4:00 PM Rating: 5

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